गेलेंदज़िक के नगर नियंत्रण केंद्र ने बताया कि यह आउटेज "एक उच्च-स्तरीय ग्रिड ऑपरेटर पर स्वचालित लोड-शेडिंग सिस्टम के सक्रिय होने के कारण" हुआ । लोड-शेडिंग एक सुरक्षात्मक उपाय है, जो ग्रिड में अचानक उछाल या अस्थिरता के जोखिम पर बिजली की आपूर्ति को पहले ही काट देता है। इस संदर्भ में, यह ट्रिगर ऊर्जा बुनियादी ढांचे के लिए ड्रोन का खतरा था। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि कुछ घंटों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी ।
इस बड़े ब्लैकआउट से ठीक एक सप्ताह पहले, 3 अगस्त 2026 को, गेलेंदज़िक के पास स्थित रिसॉर्ट गांव अर्खिपो-ओसिपोव्का (Arkhipo-Osipovka) के एक व्यस्त समुद्र तट पर ड्रोन ने हमला कर दिया था । इस हमले में सात लोग मारे गए थे, जिनमें तीन या चार बच्चे शामिल थे, और 40 अन्य घायल हो गए थे, जिनमें से 21 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था । रॉयटर्स और बीबीसी द्वारा सत्यापित सोशल मीडिया फुटेज में एक ड्रोन को समुद्र तट पर धूप सेंक रहे लोगों के बीच गिरते और विस्फोट करते हुए दिखाया गया है ।
रूसी अधिकारियों ने इस हमले के लिए यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया और इसे नागरिकों पर जानबूझकर किया गया हमला बताया । वहीं, यूक्रेन के डिसइंफॉर्मेशन काउंटर करने वाले केंद्र (Center for Countering Disinformation) ने दावा किया कि ड्रोन को रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने मार गिराया था, जिसके बाद वह समुद्र तट पर गिरा। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है ।
10 अगस्त का ब्लैकआउट और समुद्र तट हमला, क्रास्नोडार क्षेत्र में रूसी ऊर्जा और सैन्य ठिकानों के खिलाफ यूक्रेन के बढ़ते ड्रोन अभियान का हिस्सा है।
2026 की शुरुआत से ही, यूक्रेनी सेना ने क्रास्नोडार क्षेत्र में तेल रिफाइनरियों, तेल डिपो और अन्य ऊर्जा सुविधाओं पर हमले तेज कर दिए हैं, जिसमें इल्स्की तेल रिफाइनरी (Ilsky oil refinery) भी शामिल है । 10 अगस्त का बिजली कटौती इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण है कि कैसे इन खतरों ने अधिकारियों को पूरे रिसॉर्ट क्षेत्र में दैनिक जीवन को बाधित करने वाले पूर्व-सावधानी के उपाय करने के लिए मजबूर कर दिया है।
इसका सबसे बुरा असर रूस के काला सागर तट पर पड़ा है, जो एक महत्वपूर्ण ग्रीष्मकालीन पर्यटन स्थल है। 10 अगस्त तक:
10 अगस्त का ब्लैकआउट सीधा हमला नहीं था, बल्कि यह चल रहे ड्रोन खतरे के लिए एक सावधानीपूर्वक स्वचालित ग्रिड प्रतिक्रिया थी, जो युद्ध में रूसी नागरिक समुद्र तट पर हुए सबसे घातक हमले के ठीक एक सप्ताह बाद आई।