यह फैसला कोई आकस्मिक नहीं है। इसके पीछे Sony का एक ऐसा कारोबार भी है जिसके बारे में उद्योग में कोई खुलकर बात नहीं करता।
यह फैसला सिर्फ पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं है। इसका दुनिया के कई हिस्सों पर गहरा असर पड़ेगा।
यह फैसला महीनों पहले से प्लान था। Sony का ऑस्ट्रिया के थालगाउ शहर में स्थित फ्लैगशिप डिस्क प्लांट (Sony DADC), जहाँ रोज़ाना 6 लाख डिस्क बनती थीं (जिनमें से आधी PlayStation के लिए), को पहले से ही एक माइक्रो ऑप्टिक्स लैब में बदला जा रहा है। इस प्लांट के सभी 300 कर्मचारियों को नए काम के लिए री-ट्रेन किया जा रहा है।
Sony का यह कदम उद्योग को पूरी तरह से डिजिटल बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। जहाँ एक तरफ यह Sony और पब्लिशर्स के मुनाफे को तो बढ़ाएगा, वहीं दूसरी तरफ गेमर्स के मालिकाना हक, सेकेंड-हैंड बाजार और भारत जैसे मूल्य-संवेदनशील देशों के गेमर्स पर इसका गहरा नकारात्मक असर पड़ेगा।