यह अंतर संयोग से नहीं हुआ। यह एक स्पष्ट कारण श्रृंखला का नतीजा था, जो भू-राजनीति से शुरू होकर फेडरल रिजर्व (Fed) की ब्याज दरों की पूरी उम्मीदों को बदलने पर खत्म हुआ।
इस पूरे हफ्ते का सबसे बड़ा मैक्रो-इकोनॉमिक कारण (macro catalyst) कच्चे तेल की कीमतों का गिरना था। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर एक नियोजित हमले को रोक दिया और युद्धविराम वार्ता शुरू कर दी । इससे मार्च से बनी 'वॉर प्रीमियम' (युद्ध के कारण बढ़ी कीमत) खत्म हो गई। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) एक ही सत्र में 7% से अधिक गिर गया और पूरे हफ्ते में इसने 8% से अधिक का नुकसान झेला ।
कच्चा तेल ही वह मुख्य कारण था जिसने फेड को पूरे साल सख्त नीति (hawkish) पर रखा था । जैसे ही तेल गिरा, महंगाई की उम्मीदें तेजी से घटीं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने की उम्मीदों ने ऊर्जा की कीमतों के जोखिम को कम किया और महंगाई के उस दबाव को कम किया जिसने फेड की ब्याज दर बढ़ाने की अटकलों को फिर से जगा दिया था ।
इस हफ्ते से पहले, बाजार 67% संभावना देख रहा था कि फेडरल रिजर्व सितंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाएगा । लेकिन यह उम्मीद चरणों में ध्वस्त हो गई।
पहला झटका: जुलाई के ADP नेशनल एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट से लगा, जिसमें दिखा कि प्राइवेट सेक्टर ने सिर्फ 44,000 नौकरियां जोड़ीं, जो उम्मीद (75,000) से काफी कम थी । इसके बाद दूसरा और बड़ा झटका जुलाई की नॉन-फार्म पेरोल (NFP) रिपोर्ट से लगा जिसमें 23,000 नौकरियां खत्म हो गईं, जबकि उम्मीद 80,000 नौकरियां बढ़ने की थी ।
इस डेटा ने सितंबर में दर बढ़ोतरी की सारी उम्मीदों को खत्म कर दिया। कारोबारियों (CME FedWatch पर) ने अब दर कटौती (rate cut) पर दांव लगाना शुरू कर दिया । कम दरों की उम्मीदों ने रियल यील्ड (real yields) और अमेरिकी डॉलर को धराशायी कर दिया – और यही सीधे तौर पर सोने-चांदी के लिए ईंधन बना ।
अमेरिकी डॉलर में कमजोरी दो कारणों से आई: फेड की नीति में बदलाव और अमेरिका-जापान का दुर्लभ संयुक्त हस्तक्षेप । 1 अगस्त को दोनों देशों ने एक साथ येन खरीदने का अभियान चलाया – यह एक दशक से अधिक समय में ऐसा पहला संयुक्त ऑपरेशन था । येन डॉलर के मुकाबले 40 साल के निचले स्तर 163.73 पर आ गया था, जो हस्तक्षेप के बाद उछलकर 157.57 पर पहुंच गया ।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी ने न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक के जरिए गोल्डमैन सैक्स और मॉर्गन स्टेनली के माध्यम से येन खरीदा । इस हस्तक्षेप ने डॉलर को और कमजोर किया, जिससे डॉलर में मूल्यवर्गित धातुओं (Gold, Silver) की कीमतें अपने आप बढ़ गईं ।
चांदी ने करीब 10% की छलांग लगाई, जो सोने (7%) से बेहतर रहा । कई स्रोतों ने औद्योगिक मांग के कारण फिजिकल सिल्वर में लगातार कमी (structural deficit) पर ध्यान दिलाया । विश्लेषकों ने इसे "पोजीशनिंग-आधारित तेजी, मूलभूत कारणों से नहीं" बताया और इसे CTA (कमोडिटी ट्रेडिंग एडवाइजर) और मोमेंटम-संचालित शॉर्ट-कवरिंग (जहां गिरावट पर दांव लगाने वालों को नुकसान उठाकर खरीदना पड़ता है) से जोड़ा ।
अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन और एथेरियम ETF में हफ्तेभर में कुल $1.1 बिलियन का शुद्ध निवेश आया – जो अप्रैल के बाद सबसे मजबूत साप्ताहिक मांग थी । सिर्फ बिटकॉइन ETF में लगातार पांच दिनों में लगभग $853.5 मिलियन आए । लेकिन इसके बावजूद बिटकॉइन $62,000 से $65,000 के बीच सिमटा रहा और हफ्ते के अंत में मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ ।
बिटकॉइन को पीछे रखने वाले कई विशिष्ट कारण थे:
हफ्ते की बाजार चाल को एक साफ कारण श्रृंखला के रूप में समझा जा सकता है:
सबसे अहम बात यह है कि सोने-चांदी को तीन मजबूत हवाएं (triple tailwind) मिलीं – गिरता तेल, कमज़ोर डॉलर और फेड नीति में बदलाव – जबकि बिटकॉइन क्रिप्टो-विशिष्ट संरचनात्मक प्रतिरोधों के कारण इस मैक्रो तेजी का फायदा नहीं उठा सका।