अगस्त 2026 तक यह विरोध इतना बड़ा हो गया कि प्राइवेसी-फोकस्ड सर्च इंजन DuckDuckGo ने एक मजाकिया अंदाज में 35 डॉलर का एनालॉग चश्मा लॉन्च कर दिया — और वह भी एक हफ्ते में बिक गया। तो आइए समझते हैं कि आखिर मामला क्या है, यूरोपीय नियामक क्यों इन चश्मों पर सख्ती कर रहे हैं, और इसका भविष्य पर क्या असर हो सकता है।
सबसे बड़ी और साफ दिखने वाली समस्या इन चश्मों का डिस्क्रीट कैमरा है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुष इन चश्मों को पहनकर सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के पास पहुंचते हैं और उनकी सहमति के बिना उनके रिएक्शन रिकॉर्ड करते हैं। ये वीडियो सोशल मीडिया पर 'प्रैंक' या 'पिक-अप लाइन' के नाम से वायरल होते हैं।
इन चश्मों में रिकॉर्डिंग का संकेत देने वाली एक छोटी LED लाइट होती है, लेकिन आयरलैंड के डेटा प्रोटेक्शन कमिश्नर (DPC) ने सवाल उठाया है कि क्या यह लाइट किसी को सचेत करने के लिए काफी है? EFF (इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन) ने चेताया है कि डिफ़ॉल्ट रूप से मीडिया ऑटोमैटिकली मेटा AI ऐप में इंपोर्ट हो जाता है और सभी AI फीचर्स लोकली नहीं चल सकते — यानी 'Hey Meta' बोलने पर सारा फुटेज सीधे मेटा के सर्वर पर चला जाता है।
यह समस्या कहीं अधिक संरचनात्मक है। 2026 की शुरुआत में स्वीडिश अखबारों स्वेन्स्का डागब्लाडेट और गोटेबोर्ग्स-पोस्टेन की संयुक्त जांच में सामने आया कि नैरोबी, केन्या में कॉन्ट्रैक्टर यूजर्स के AI चश्मों से कैप्चर हुए अंतरंग फुटेज देख रहे थे — जिसमें लोगों के नहाने, कपड़े बदलने और यौन गतिविधियों के वीडियो शामिल थे। ये कॉन्ट्रैक्टर एक तीसरे पक्ष की डेटा एनोटेशन फर्म के लिए काम कर रहे थे और उन्होंने क्रेडिट कार्ड नंबर जैसे संवेदनशील दस्तावेज़ भी देखने की बात कही।
इसका नतीजा यह हुआ कि अमेरिका में क्लास-एक्शन मुकदमा दायर हुआ और यूके के इंफॉर्मेशन कमिश्नर ऑफिस (ICO) ने औपचारिक जांच शुरू की। यूरोपीय संसद के सांसदों ने यूरोपीय आयोग से सवाल पूछा कि क्या यूरोपियों के डेटा को बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के केन्या भेजना GDPR का उल्लंघन नहीं है?
अप्रैल 2025 में मेटा ने चुपचाप अपनी प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट कर दी। AI डेटा कलेक्शन डिफ़ॉल्ट रूप से ऑन कर दिया गया और वॉइस रिकॉर्डिंग को ऑप्ट-आउट का विकल्प दिए बिना सेव किया जाने लगा। हालांकि मेटा का कहना है कि वह क्लाउड मीडिया सेटिंग्स की परवाह किए बिना यूजर्स के फोटो और वीडियो का इस्तेमाल विज्ञापन या AI ट्रेनिंग के लिए नहीं करता है , लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे यूजर का नियंत्रण खत्म हो जाता है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों ने यह भी दिखाया कि इन चश्मों का फुटेज बाहरी फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम से जोड़कर सार्वजनिक स्थानों पर अजनबियों की पहचान की जा सकती है। मेटा ने खुद यह फीचर लागू नहीं किया है, लेकिन तीसरे पक्षों को इससे नहीं रोका है।
यूरोपीय नियामकों ने दुनिया के किसी भी दूसरे क्षेत्र की तुलना में ज्यादा आक्रामक तरीके से कार्रवाई की है। आइए जानते हैं कैसे:
जुलाई 2026 के अंत में, DuckDuckGo ने सैन डिएगो के आईवियर ब्रांड नॉकअराउंड के साथ मिलकर 'दुनिया का सबसे इनोवेटिव एंटी-सर्विलांस सनग्लासेज' लॉन्च किया — जिसका नाम था 'Normal F*ing Sunglasses'**।
इस चश्मे की कीमत सिर्फ 35 डॉलर थी और इसमें कोई कैमरा, कोई माइक्रोफोन, कोई बैटरी, कोई AI और कोई भी इलेक्ट्रॉनिक्स नहीं था। DuckDuckGo का कैंपेन सीधे-सीधे मेटा के स्मार्ट ग्लासेज़ पर तंज कस रहा था, और इसे 'pervert glasses' (बदमाश चश्मा) कह रहा था। 30 जुलाई को लॉन्च हुए ये चश्मे कुछ ही दिनों में बिक गए। DuckDuckGo के CEO गेब्रियल वेनबर्ग कहते हैं, 'AI ग्लासेज़ को स्मार्ट होने की ज़रूरत नहीं है — उन्हें सिर्फ ग्लासेज़ होना चाहिए।'
वायरल वीडियो, नैरोबी में अंतरंग डेटा की समीक्षा, यूरोपीय प्रतिबंधों की संभावना और 35 डॉलर के एनालॉग चश्मों के रूप में विरोध — ये सब मिलकर संकेत देते हैं कि स्मार्ट ग्लासेज़ एक नियामक और सांस्कृतिक चौराहे पर खड़े हैं। यूरोप का समन्वित जवाब, EDPB की आगामी रिपोर्ट और जर्मनी में संभावित प्रतिबंध यह दर्शाते हैं कि मौजूदा मॉडल, जो हर जगह रिकॉर्ड करने में सक्षम है, GDPR के दायरे में अपने वर्तमान स्वरूप में शायद नहीं बच पाएगा। मेटा के लिए, जिसने लाखों की संख्या में ये चश्मे बेचे हैं , यह प्राइवेसी संकट कोई मामूली शिकायत नहीं, बल्कि पूरे प्रोडक्ट कैटेगरी के लिए एक संरचनात्मक खतरा है।