स्पेन सरकार ने इटली के इस कदम को 'अनुचित, यूरोपीय संघ के हितों के खिलाफ और स्पेनिश आबादी के प्रति भेदभावपूर्ण' करार दिया । 7 अगस्त को, स्पेनिश प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ (Pedro Sánchez) ने इटली को 9 अगस्त तक का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर उसने सीमा जांच नहीं हटाई तो स्पेन 'आनुपातिक कदम' उठाएगा । जब इटली ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, तो स्पेन ने 8-9 अगस्त की मध्यरात्रि से इटली से आने वाले सभी हवाई और समुद्री यात्रियों के लिए जवाबी सीमा जांच शुरू कर दी, जो 7 सितंबर तक जारी रहने वाली थी । स्पेनिश अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों के 5% से 10% के दस्तावेजों की जांच की जा रही है ।
इटली ने स्पेन की मांग को सीधे-सीधे खारिज कर दिया। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) के कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा, "इटली राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा नियंत्रण के मामलों में विदेश से अल्टीमेटम या थोपे जाने को स्वीकार नहीं करता है" । रोम ने स्पष्ट किया कि ये नियंत्रण कम से कम 15 अगस्त तक जारी रहेंगे, क्योंकि स्यूटा में एक नई 'प्रवासी लहर' आने की संभावना है ।
यह सीमा पार करने की घटना हाल के वर्षों में किसी भी ईयू सीमा पर सबसे बड़ी सामूहिक प्रविष्टियों में से एक थी।
यूरोपीय आयोग ने शुरुआती स्यूटा संकट के प्रति स्पेन की 'त्वरित प्रतिक्रिया' की सराहना की । हालांकि, स्पेन और इटली के बीच बढ़ते आपसी सीमा प्रतिबंधों को लेकर ब्रुसेल्स ने चिंता जताई। आयोग ने इसे 'शेंगेन संकट' करार दिया और दोनों सदस्य देशों से इस विवाद को बातचीत और शेंगेन नियमों के सम्मान के जरिए सुलझाने का आग्रह किया, साथ ही बीच-बचाव के लिए तैयार होने की बात कही ।