शोधकर्ताओं के अनुसार, कैंसर कोशिकाओं के अंदर ROCK नामक एक अणु एक जैविक 'डोरिया' (drawstring) की तरह काम करता है। यह कोशिका के ढांचे को तना हुआ रखता है, जिससे कोशिकाएं सिकुड़कर गोल आकार ले लेती हैं और ऊतकों के बीच से रेंगकर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल सकती हैं। ROCK को ब्लॉक करने से ये कैंसर कोशिकाएं फैलने की अपनी क्षमता खो देती हैं। यह समानता तीन अलग-अलग प्रकार के कैंसर - एपिथीलियल सॉलिड ट्यूमर (ब्रेस्ट कैंसर), नॉन-एपिथीलियल सॉलिड ट्यूमर (मेलेनोमा) और ब्लड कैंसर (एएमएल) - में पाई गई है।
यह कोई एक-आकार-सभी-के-लिए-फिट (one-size-fits-all) दृष्टिकोण नहीं है। ICR टीम ने अलग-अलग जैविक मार्करों की पहचान की है, जो यह बता सकते हैं कि कौन से ट्यूमर ROCK इन्हिबिटर दवा के प्रति सबसे अधिक प्रतिक्रिया देंगे।
सभी ट्यूमर प्रकारों में, वे कोशिकाएं जो ROCK इन्हिबिटर के प्रति अधिक संवेदनशील थीं, उनमें कोशिका पहचान और विभाजन को नियंत्रित करने वाले जीनों की गतिविधि भी अधिक थी।
शोधकर्ताओं ने कई चरणों में इस खोज को मान्य किया। पहले उन्होंने एक बड़े ड्रग-सेंसिटिविटी डेटाबेस का विश्लेषण किया और ROCK इन्हिबिटर प्रतिक्रिया को विशिष्ट आनुवंशिक और सेलुलर लक्षणों से जोड़ने वाले पैटर्न खोजे। फिर उन्होंने मरीजों के ट्यूमर सैंपलों पर प्रयोगशाला में और चूहों पर किए गए अध्ययनों में इन पैटर्न की पुष्टि की।
चूंकि ROCK इन्हिबिटर जैसे फासुडिल (fasudil), नेटार्सुडिल (netarsudil) और रिपासुडिल (ripasudil) पहले से ही ग्लूकोमा के इलाज के लिए स्वीकृत हैं और उनकी सुरक्षा साबित हो चुकी है , इसलिए इन्हें कैंसर के इलाज में इस्तेमाल करना एक तेज़ रास्ता हो सकता है। पूरी तरह से नई दवाओं के विपरीत, इन दवाओं को विषाक्तता और सुरक्षा परीक्षणों के शुरुआती चरणों से नहीं गुजरना पड़ेगा।
भविष्य में, डॉक्टर एक बायोप्सी (ट्यूमर के ऊतक का नमूना) लेकर यह पता लगा सकेंगे कि मरीज के ट्यूमर में ऐसे मार्कर मौजूद हैं या नहीं जो यह संकेत देते हैं कि वह ROCK इन्हिबिटर थेरेपी से लाभ उठा सकता है या नहीं।
ICR के अनुसार, यह अध्ययन 'सटीक पुन: उपयोग (precision repurposing)' की नींव रखता है। अध्ययन के पहले लेखक डॉ. जाउमे बार्सेलो (अब बार्ट्स कैंसर इंस्टीट्यूट में) के अनुसार, अगला कदम ROCK इन्हिबिटर्स को अन्य मौजूदा उपचारों के साथ मिलाकर परखना है ताकि मरीजों को अधिकतम लाभ मिल सके। टीम का लक्ष्य निकट भविष्य में क्लिनिकल ट्रायल शुरू करना है।