इस रैली का सबसे बड़ा कारण अमेरिका द्वारा कॉपर पर लगाए जाने वाले टैरिफ को लेकर अनिश्चितता है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने अगस्त 2025 में कुछ कॉपर आयात पर 50% का सेक्शन 232 टैरिफ लगाया था । अप्रैल 2026 में इसमें संशोधन किया गया, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि यह टैरिफ रिफाइंड कॉपर पर भी लागू होगा या नहीं । इस अनिश्चितता के कारण अमेरिका में बड़े पैमाने पर कॉपर का स्टॉक करना (hoarding) शुरू हो गया है । व्यापारी अमेरिकी आयात पर संभावित शुल्क (levies) से बचने के लिए भारी मात्रा में कॉपर खरीद रहे हैं ।
इसका नतीजा यह हुआ कि अमेरिका वैश्विक कॉपर के लिए एक 'वैक्यूम' बन गया है: जुलाई में 200,000 मीट्रिक टन से अधिक कॉपर का रिकॉर्ड आयात हुआ, जो एक दशक में सबसे अधिक मासिक मात्रा है। इसने बाकी दुनिया में उपलब्ध आपूर्ति को काफी कम कर दिया है ।
7 अगस्त, 2026 तक, LME के कुल कॉपर वेयरहाउस स्टॉक घटकर केवल 223,000 मीट्रिक टन रह गए थे - पिछले 30 दिनों में 33.1% की गिरावट। लगातार 29 ट्रेडिंग सत्रों से धातु की निकासी हो रही है । रॉयटर्स के अनुसार, LME के मुख्य स्टॉक मई के लगभग 400,000 टन के शिखर से गिरकर जुलाई के अंत तक 262,000 टन पर आ गए थे, और वारंट पर उपलब्ध (available) इन्वेंट्री छह महीने के निचले स्तर 100,000 टन से थोड़ा ऊपर आ गई थी । यह गिरावट मुख्य रूप से एशियाई स्थानों, जैसे ताइवान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर के गोदामों से भारी मात्रा में शिपमेंट को अमेरिका भेजे जाने के कारण हुई है ।
दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर उपभोक्ता और रिफाइनर, चीन, पर्याप्त धातु का उत्पादन करने के लिए संघर्ष कर रहा है। जुलाई 2026 में चीन का कॉपर कैथोड उत्पादन गिरकर 1.1268 मिलियन मीट्रिक टन पर आ गया, जो बाजार की उम्मीदों से 39,200 मीट्रिक टन कम था ।
इसकी एक बड़ी वजह यह है कि स्पॉट ट्रीटमेंट और रिफाइनिंग चार्ज (TC/RCs) - जो खनिक स्मेल्टरों को अयस्क को संसाधित करने के लिए भुगतान करते हैं - 2026 में निगेटिव हो गए हैं। इसका मतलब है कि चीनी स्मेल्टर प्रभावी रूप से खुद खनिकों को उनका अयस्क लेने के लिए भुगतान कर रहे हैं । इसने स्मेल्टरों की लाभप्रदता को चरमरा दिया है। चीन के शीर्ष स्मेल्टरों ने, चाइना स्मेल्टर्स पर्चेज टीम (CSPT) के माध्यम से, 2026 में उत्पादन में 10% से अधिक की कटौती करने पर सहमति जताई है ।
LME फॉरवर्ड कर्व पूरी तरह से 'बैकवर्डेशन' में आ गया है - जहां कैश की कीमतें फ्यूचर की कीमतों से अधिक होती हैं - जो फिजिकल कॉपर की भारी कमी का संकेत देता है। अगस्त की शुरुआत तक, LME का कैश-टू-थ्री-मंथ प्रीमियम बढ़कर 65 डॉलर प्रति टन हो गया, जो जनवरी के बाद से सबसे अधिक है । यह एक स्पष्ट संकेत है कि बाजार डिलीवर करने योग्य धातु के लिए संघर्ष कर रहा है ।
सिटीग्रुप ने अनुमान लगाया है कि आपूर्ति बाधाओं और टैरिफ-प्रेरित विकृतियों के कारण कॉपर 15,000 डॉलर प्रति टन ($6.80/पाउंड) तक जा सकता है । कई विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि कॉपर की कीमतें रिफाइंड कॉपर पर सेक्शन 232 के फैसले के प्रति बेहद संवेदनशील रहेंगी ।
हालांकि, जोखिम भी मौजूद हैं। एक सतत मूल्य रैली अंततः नई आपूर्ति को आकर्षित कर सकती है। अमेरिकी गोदामों में अनुमानित 118,000 टन ऑफ-वारंट कॉपर पड़ा है, जो LME सिस्टम में वापस आ सकता है ।
2026 की कॉपर रैली एक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान है: अमेरिका में टैरिफ के कारण हो रही जमाखोरी LME गोदामों को खाली कर रही है, जबकि चीन में स्मेल्टर कटौती और स्क्रैप की कमी वैश्विक रिफाइंड उत्पादन को प्रभावित कर रही है। बैकवर्डेशन पुष्टि करता है कि यह कमी वास्तविक है, न कि सिर्फ अटकलें । LME स्टॉक कई महीनों के निचले स्तर पर हैं और टैरिफ के फैसले से पहले अमेरिकी आयात की मांग बढ़ रही है, ऐसे में उम्मीद है कि कीमतें 2026 के बाकी समय में ऊंची और अस्थिर बनी रहेंगी ।