पूरा जीनोम संदर्भ और ट्रांसक्रिप्टोमिक डेटा मिलाकर टीम ने PSEN1 जीन के नए ट्रांसक्रिप्ट वेरिएंट या आइसोफॉर्म पहचाने। PSEN1 शुरुआती उम्र में होने वाले पारिवारिक अल्ज़ाइमर रोग का सबसे सामान्य ज्ञात कारणात्मक जीन है, और अब तक इसमें 300 से अधिक संभावित रोग-संबंधी म्यूटेशन दर्ज किए जा चुके हैं ।
ये नए आइसोफॉर्म पुराने, गैप वाले जीनोम असेंबली में दिखाई नहीं देते थे । इनकी खोज से यह जांचने का रास्ता खुलता है कि न्यूरोडीजेनेरेशन में वैकल्पिक स्प्लाइसिंग—एक ही जीन से अलग-अलग RNA रूप बनने की प्रक्रिया—क्या भूमिका निभाती है। फिर भी, इन नए ट्रांसक्रिप्ट वेरिएंट का वास्तविक जैविक और रोग-संबंधी महत्व अभी तय नहीं हुआ है ।
यह खोज पहले से चल रहे मार्मोसेट शोध को भी अधिक मजबूत आधार देती है। 2024 के एक अध्ययन में CRISPR/Cas9 की मदद से PSEN1 में C410Y और A426P जैसी नॉक-इन म्यूटेशन वाले आनुवंशिक रूप से संशोधित मार्मोसेट तैयार किए गए थे। इन जानवरों में अल्ज़ाइमर से जुड़े बायोमार्कर अपेक्षाकृत शुरुआती चरण में दिखाई दिए । नया T2T संदर्भ अब इन और अन्य वेरिएंट का अधिक सटीक अध्ययन करने में मदद कर सकता है।
गैपलेस जीनोम ने मार्मोसेट के राइबोसोमल डीएनए (rDNA) से जुड़ी एक ऐसी गतिशीलता उजागर की, जिसे पहले दर्ज नहीं किया गया था। शोधकर्ताओं के अनुसार, मार्मोसेट गैर-समजात गुणसूत्रों के बीच rDNA एरे—यानी rDNA की दोहराई गई श्रृंखलाओं—का आदान-प्रदान कर सकते हैं ।
असेंबली में rDNA के वितरण के ऐसे पैटर्न भी दिखे जो नर और मादा मार्मोसेट में अलग-अलग थे। गैपलेस संदर्भ के बिना इन लिंग-विशिष्ट वितरणों को पहचानना संभव नहीं था । यह जानकारी केवल रोग-अध्ययन के लिए ही नहीं, बल्कि गुणसूत्रों की संरचना और प्राइमेट विकास को समझने के लिए भी उपयोगी हो सकती है।
टेलोमियर-टू-टेलोमियर अनुक्रमण का अर्थ है कि जीनोम के कठिन, दोहराव वाले और पहले छूटे हुए हिस्सों सहित पूरे गुणसूत्र का संदर्भ तैयार करना। मानव जीनोम में ऐसे गैप भरना लंबे समय तक महंगा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण रहा।
मार्मोसेट परियोजना और T2T Consortium के अन्य काम दिखाते हैं कि बेहतर लंबी-पठन (long-read) प्रयोगशाला तकनीकों, असेंबली एल्गोरिदम और स्वचालित पाइपलाइन के कारण अब यह प्रक्रिया कई प्रजातियों पर नियमित रूप से लागू की जा सकती है । इन सुधारों ने मूल मानव T2T परियोजना की तुलना में संपूर्ण जीनोम तैयार करने की लागत भी काफी घटाई है ।
प्रमुख लेखिका प्रज्ञा हेब्बर के अनुसार, “रूटीन T2T जीनोमिक्स से निष्कर्ष निकालना आसान और अधिक विश्वसनीय हो रहा है।” स्वचालित पाइपलाइन भविष्य में ऐसी चिकित्सा व्यवस्था की नींव रख सकती है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति का संपूर्ण जीनोम उसकी अपनी विशिष्ट चिकित्सकीय संदर्भ-सूची के रूप में इस्तेमाल हो—और वह भी आज की लागत के एक अंश पर ।
इस दिशा में प्रगति केवल मार्मोसेट तक सीमित नहीं है। इसी व्यापक सहयोग से छह एप प्रजातियों के हैप्लोटाइप-रिजॉल्व्ड संदर्भ जीनोम तैयार किए जा चुके हैं और 215 गैपलेस गुणसूत्रों का टेलोमियर-टू-टेलोमियर अनुक्रमण पूरा किया गया है ।
मार्मोसेट लंबे समय से अल्ज़ाइमर और पार्किंसन शोध में महत्वपूर्ण मॉडल जीव रहा है, क्योंकि मानव संज्ञानात्मक गिरावट से जुड़े कई जीन इसमें भी मौजूद हैं । लेकिन जब संदर्भ जीनोम अधूरा हो, तो जटिल क्षेत्रों में मौजूद वेरिएंट, जीन की वैकल्पिक प्रतियां और RNA रूपों की सही पहचान मुश्किल हो जाती है।
नया गैपलेस जीनोम इन सीमाओं को कम करता है। इससे शोधकर्ता रोग-संबंधी जीनों, प्रतिरक्षा क्षेत्र, गुणसूत्र संरचना और जीन अभिव्यक्ति का अधिक बारीकी से अध्ययन कर सकेंगे। यह सीधे तौर पर कोई नई अल्ज़ाइमर दवा या व्यक्तिगत उपचार उपलब्ध नहीं कराता, लेकिन रोग-तंत्र और संभावित उपचारों पर आगे के शोध के लिए कहीं अधिक मजबूत आनुवंशिक आधार देता है ।