इस इश्यू की सबसे बड़ी खासियत इसकी मांग रही। निवेशकों ने अधिकतम करीब 115 अरब डॉलर के ऑर्डर दिए—यानी 25 अरब डॉलर के सौदे के मुकाबले मांग 4.6 गुना से ज्यादा रही । ऑर्डर-बुक के लिहाज से यह 2026 का तीसरा सबसे बड़ा सौदा था; इससे आगे Oracle का करीब 129 अरब डॉलर और Amazon का करीब 126 अरब डॉलर का ऑर्डर-बुक रहा ।
छह बैंकों ने इस बिक्री का अंडरराइटिंग किया, जिनमें Goldman Sachs और J.P. Morgan भी शामिल थे ।
10 साल वाले बॉन्ड की राशि 4.5 अरब डॉलर थी। इसे शुरुआती तौर पर समान अवधि वाले अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड से 0.85 प्रतिशत अंक, यानी 85 बेसिस पॉइंट, अधिक यील्ड पर पेश किया गया था ।
40 साल वाले सबसे लंबे बॉन्ड की शुरुआती कीमत अमेरिकी ट्रेजरी से 1.55 प्रतिशत अंक अधिक यील्ड पर रखी गई। अंतिम कीमत तय होने तक यह प्रीमियम घटकर 1.3 प्रतिशत अंक रह गया । कुछ हिस्सों में Alphabet के पहले से जारी कर्ज की तुलना में भी करीब 0.4 प्रतिशत अंक तक अतिरिक्त स्प्रेड दिया गया—निवेश-ग्रेड बॉन्ड बाजार में यह असामान्य रूप से उदार रियायत मानी जाती है ।
सरल शब्दों में, मांग बहुत मजबूत थी, लेकिन Alphabet को निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सामान्य से अधिक ब्याज देना पड़ा। यही इस सौदे का अहम संकेत है: निवेशक Alphabet जैसे मजबूत क्रेडिट वाले नामों से पूरी तरह दूर नहीं हुए हैं, लेकिन AI पर होने वाले भारी खर्च के जोखिम का दाम जरूर मांग रहे हैं।
बॉन्ड बिक्री से कुछ ही सप्ताह पहले Alphabet ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को लेकर कई बड़े संकेत दिए थे:
Alphabet की CFO Anat Ashkenazi ने विश्लेषकों से कहा कि कंपनी अभी भी “आपूर्ति की कमी वाले माहौल” में काम कर रही है और 2027 में पूंजीगत खर्च में बड़ी वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है ।
इसका अर्थ यह है कि AI की मांग को पूरा करने के लिए Alphabet केवल अपने मौजूदा नकदी प्रवाह पर निर्भर नहीं रह सकती। डेटा सेंटर, सर्वर, चिप और नेटवर्किंग क्षमता बढ़ाने के लिए उसे कर्ज समेत बाहरी पूंजी का सहारा लेना पड़ रहा है।
Alphabet का 25 अरब डॉलर का सौदा अलग-थलग घटना नहीं है। 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ी टेक कंपनियां रिकॉर्ड गति से बॉन्ड जारी कर रही हैं।
जुलाई के मध्य तक Alphabet, Amazon, Meta, Oracle, Nvidia और SpaceX ने मिलकर दुनिया भर में करीब 244 अरब डॉलर के बॉन्ड जारी किए थे। यह 2025 में इन कंपनियों द्वारा जुटाए गए करीब 108 अरब डॉलर से दोगुने से भी अधिक है । 7 जुलाई तक केवल Amazon, Alphabet, Meta और Oracle ही करीब 194 अरब डॉलर के बॉन्ड जारी कर चुके थे ।
Nvidia ने जुलाई 2026 में 25 अरब डॉलर का बॉन्ड सौदा किया—पांच साल में उसका पहला बॉन्ड इश्यू । SpaceX ने अपने रिकॉर्ड IPO के कुछ ही समय बाद 25 अरब डॉलर के बॉन्ड बेचे ।
Goldman Sachs का अनुमान है कि Microsoft समेत शीर्ष पांच हाइपरस्केलर कंपनियां आने वाले वर्षों में हर साल करीब 300 अरब डॉलर के बॉन्ड जारी कर सकती हैं । S&P Global के अनुसार, 2026 में हाइपरस्केलर और उनसे जुड़ी कंपनियों का बॉन्ड इश्यू 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है ।
Barclays के मुताबिक, 2026 में पूरे अमेरिकी कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार का आकार 2.46 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो 2025 से 11.8% अधिक होगा । AI से जुड़ा कर्ज साल की शुरुआत से अब तक अमेरिका में जारी हुए कुल कॉरपोरेट बॉन्ड का करीब 15% है ।
Alphabet का सौदा क्रेडिट बाजार की दो विपरीत ताकतों को दिखाता है।
115 अरब डॉलर का ऑर्डर-बुक बताता है कि बड़े संस्थागत निवेशक अभी भी Alphabet के कर्ज को अपेक्षाकृत सुरक्षित मानते हैं। निवेश-ग्रेड रेटिंग वाली मजबूत टेक कंपनियों के बॉन्ड के लिए खरीदारों का आधार अभी गहरा है।
दूसरी ओर, निवेशकों का रवैया पहले जितना बेफिक्र नहीं रहा:
बाजार का मूल सवाल अब यह है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर से मिलने वाला भविष्य का रिटर्न क्या इस भारी कर्ज और ब्याज लागत को सही ठहरा पाएगा। फिलहाल इसका स्पष्ट उत्तर नहीं है।
हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद J.P. Morgan का अनुमान है कि हाइपरस्केलर कंपनियां अपनी मौजूदा क्रेडिट रेटिंग्स को नुकसान पहुंचाए बिना करीब 1.7 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त कर्ज जुटा सकती हैं। इसकी वजह इन कंपनियों का अभी अपेक्षाकृत कम लेवरेज है ।
बैंक का अनुमान है कि 2030 तक AI से जुड़ी कर्ज-आधारित फंडिंग 4.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। केवल 2026 में हाइपरस्केलर डेटा सेंटरों की फंडिंग जरूरत करीब 700 अरब डॉलर हो सकती है ।
इस नजरिए से 2026 में अब तक जुटाया गया 244 अरब डॉलर केवल शुरुआत हो सकता है। असली परीक्षा यह होगी कि बॉन्ड बाजार इन कंपनियों से आने वाले करीब 1.7 ट्रिलियन डॉलर के अतिरिक्त कर्ज को कितनी आसानी से और किस ब्याज दर पर absorb कर पाता है।
S&P Global ने चेतावनी दी है कि कर्ज जुटाने का यह पैमाना निवेशकों की मांग को संभालने की क्षमता की परीक्षा लेने लगा है । Fortune द्वारा उद्धृत Nikkei अध्ययन के अनुसार, अमेरिकी टेक कंपनियों की तथाकथित छिपी देनदारियां—जैसे ऑपरेटिंग लीज, सप्लाई-चेन फाइनेंसिंग और बैलेंस शीट से बाहर की अन्य प्रतिबद्धताएं—चार साल में आठ गुना बढ़कर 1.65 ट्रिलियन डॉलर हो गई हैं ।
Alphabet की बॉन्ड बिक्री 2026 की AI इंफ्रास्ट्रक्चर कहानी का छोटा रूप है: पूंजी की मांग बहुत बड़ी है, निवेशकों की रुचि अभी मजबूत है, लेकिन उस पूंजी की कीमत बढ़ रही है।
क्रेडिट निवेशकों के लिए अहम सवाल यह है कि Alphabet जैसे सौदों में बढ़े हुए स्प्रेड केवल अस्थायी समायोजन हैं या AI जोखिम की लंबे समय तक चलने वाली नई कीमत तय हो रही है।
इक्विटी निवेशकों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है। Alphabet जैसी कंपनियां पहले मजबूत नकदी प्रवाह के जरिए विकास को फंड करती थीं; अब AI पर खर्च बढ़ने के साथ कर्ज और अन्य बाहरी पूंजी की भूमिका बढ़ रही है। 2004 के बाद पहली नकारात्मक फ्री कैश फ्लो तिमाही इस बदलाव का स्पष्ट संकेत है।
J.P. Morgan के अनुसार, AI इंफ्रास्ट्रक्चर के अगले पांच वर्षों के लिए सभी तरह के पूंजी बाजारों से फंडिंग की जरूरत होगी । बॉन्ड बाजार ने अब तक इस जरूरत को पूरा करने के लिए हां कहा है—लेकिन Alphabet का सौदा दिखाता है कि उस हां की कीमत लगातार बढ़ रही है।