जुलाई 2026 में रूस की रिफाइनरी क्रूड प्रोसेसिंग करीब 3.6–3.8 मिलियन bpd रह गई—मई 2000 के बाद का सबसे निचला स्तर । Kpler के अनुसार जुलाई में रूस की करीब 4.3 मिलियन bpd क्षमता डाउनटाइम या हमलों से प्रभावित थी। अगस्त 2025 से अब तक कम-से-कम 25 रूसी रिफाइनरियां ड्रोन हमलों की चपेट में आ चुकी हैं ।
रूसी रिफाइनिंग क्षमता के करीब 2.5 मिलियन bpd के ऑफलाइन होने का प्रचलित अनुमान एक मोटा समेकित आंकड़ा माना जा सकता है। 2025 की शुरुआत में रूसी क्षमता का लगभग 10% प्रभावित हुआ था और सितंबर 2025 तक हमलों की एक लहर में करीब 1.1 मिलियन bpd प्रोसेसिंग क्षमता वाली इकाइयां बंद हुई थीं । 2026 के मध्य तक कुल नुकसान इससे काफी बढ़ चुका है।
Goldman Sachs के अनुसार वैश्विक रिफाइनिंग गतिविधि 2020 की महामारी के बाद इस मौसम के सबसे निचले स्तर पर है। मिडिल डिस्टिलेट—जिसमें डीजल और हीटिंग ऑयल शामिल हैं—का भंडार मौसमी औसत से नीचे चल रहा है । रूस और मध्य पूर्व में युद्ध से जुड़ी बंदियों ने डीजल आपूर्ति को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। अमेरिका और अफ्रीका में बढ़े उत्पादन ने खोई हुई आपूर्ति का केवल करीब एक-तिहाई हिस्सा ही पूरा किया है ।
इस दबाव का असर रिफाइनिंग मार्जिन पर भी दिखा। नवंबर 2025 में यूरोप में डीजल का क्रैक स्प्रेड, यानी कच्चे तेल और तैयार डीजल के बीच का मूल्य अंतर, 43.64 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। जेट ईंधन का प्रीमियम 41.19 डॉलर प्रति बैरल रहा। दोनों स्तर दो साल से ज्यादा समय में सबसे ऊंचे थे ।
पेट्रोल बाजार भी तंग है। मध्य रूस की वे रिफाइनरियां, जो देश के करीब 30% पेट्रोल उत्पादन और लगभग 25% डीजल उत्पादन में योगदान देती हैं, मई 2026 के ड्रोन हमलों के बाद बंद या कम क्षमता पर चलने को मजबूर हुईं । घरेलू कीमतों और उपलब्धता पर नियंत्रण रखने के लिए रूस ने जुलाई 2026 तक पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाई और डीजल निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाने पर विचार किया ।
जून 2026 में ड्रोन हमलों से क्षतिग्रस्त मॉस्को रिफाइनरी की मरम्मत में कम-से-कम छह महीने लगने का अनुमान है। सूत्रों के अनुसार इसके 2026 में उत्पादन फिर शुरू करने की संभावना कम है । कई अन्य अचानक हुई बंदियों के लिए अभी कोई स्पष्ट मरम्मत समयसीमा भी नहीं है ।
जनवरी से मई 2026 के बीच यूक्रेन ने रूस की 16 रिफाइनरियों को निशाना बनाया, जबकि 2025 की इसी अवधि में ऐसी आठ रिफाइनरियां प्रभावित हुई थीं। Reuters की गणना के अनुसार इस दौरान करीब 700,000 bpd क्षमता प्रभावित हुई ।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी कहा है कि यूक्रेनी ड्रोन हमलों का असर कम-से-कम 2026 के मध्य तक रूसी रिफाइनरी रन पर बना रह सकता है । हमलों की निरंतरता से मरम्मत पूरी होने के बाद भी उत्पादन सामान्य होने में देरी हो सकती है।
चौथी तिमाही में उत्तरी गोलार्ध में डीजल और हीटिंग ऑयल की मांग आम तौर पर तेजी से बढ़ती है। अमेरिका में 14 नवंबर 2025 तक एक सप्ताह में हीटिंग ऑयल की मांग 40% बढ़ी, जबकि हीटिंग डिग्री-डेज 10 साल के औसत से 22% ऊपर रहे ।
अगर भंडार पहले से कम हों और वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता का बड़ा हिस्सा बंद हो, तो ठंड की कोई भी असामान्य लहर बाजार में दबाव और बढ़ा सकती है । इसका असर परिवहन, कृषि, औद्योगिक ईंधन और विमानन क्षेत्र तक पहुंच सकता है।
यह संकट केवल युद्ध और अस्थायी बंदियों तक सीमित नहीं है। यूरोप और चीन में स्थायी बंदियों के कारण 2025 की दूसरी तिमाही में वैश्विक रिफाइनिंग क्षेत्र की क्षमता 350,000 bpd घट गई । BloombergNEF ने 2025 में वैश्विक क्रूड डिस्टिलेशन नाममात्र क्षमता में 188,000 bpd की शुद्ध कमी का अनुमान लगाया था ।
इसका अर्थ है कि भविष्य में मांग बढ़ने पर बाजार के पास अतिरिक्त क्षमता का कुशन पहले की तुलना में छोटा हो सकता है।
रिफाइनरियां बंद होने पर वह कच्चा तेल, जिसे घरेलू स्तर पर ईंधन में बदला जाना था, निर्यात बाजार में भेज दिया जाता है। इसी कारण रूस के पश्चिमी बंदरगाहों से कच्चे तेल का निर्यात मई 2026 में महीने-दर-महीने 15% बढ़कर आठ महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा । जून में बाल्टिक और काला सागर के पश्चिमी बंदरगाहों से निर्यात करीब 3 मिलियन bpd के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया ।
यह संबंध सीधा लेकिन बदलता रहने वाला है। जुलाई के अंत में जब यूक्रेन ने कुछ समय के लिए रिफाइनरियों के बजाय अन्य लक्ष्यों पर अधिक ध्यान दिया, तो रूस का कच्चे तेल निर्यात चार मिलियन bpd से नीचे आकर 3.9 मिलियन bpd रह गया। अधिक कच्चा तेल घरेलू प्रोसेसिंग के लिए रुकने लगा था । यदि रिफाइनरियों पर हमले फिर तेज होते हैं, तो निर्यात दोबारा बढ़ सकता है ।
रूस के सामने अब उलटी समस्या भी खड़ी हो रही है: कच्चे तेल का निर्यात राजस्व बनाए रखता है, लेकिन घरेलू रिफाइनिंग घटने से पेट्रोल और डीजल की कमी बढ़ती है। देश डीजल निर्यात पर रोक और कुछ क्षेत्रों में ईंधन आयात पर विचार कर रहा है ।
जून 2026 में रूस-नियंत्रित क्रीमिया ने ईंधन की कमी के कारण आपात स्थिति घोषित की और ईंधन बिक्री पर रोक लगाई। जुलाई तक रूस के अधिकांश क्षेत्रों में ईंधन प्रतिबंधों की खबरें सामने आईं ।
इससे क्रेमलिन के सामने स्पष्ट विकल्प-संकट है: राजस्व के लिए कच्चा तेल बाहर भेजा जाए या घरेलू ईंधन आपूर्ति संभालने के लिए ज्यादा तेल देश में रखा जाए।
वैश्विक ईंधन बाजार सर्दियों में प्रवेश ऐसे समय कर रहा है, जब डिस्टिलेट—खासकर डीजल—की आपूर्ति- मांग स्थिति कई वर्षों में सबसे ज्यादा तंग है। युद्ध से हुई क्षति, स्थायी रिफाइनरी बंदियां और अचानक आई तकनीकी समस्याएं मिलकर ऐसा दबाव बना रही हैं जिसे केवल कच्चे तेल की अतिरिक्त आपूर्ति से दूर नहीं किया जा सकता।
मरम्मत की समयसीमा अनिश्चित है, ड्रोन हमलों का खतरा बना हुआ है और भंडार मौसमी औसत से नीचे हैं। इसलिए डीजल, जेट ईंधन और पेट्रोल की कीमतों के लिए आगे के जोखिम फिलहाल स्पष्ट रूप से ऊपर की ओर झुके हुए हैं।