Naftogaz के कार्यवाहक प्रमुख सर्ही फेडोरेंको ने कहा, "रूस सर्दियों से पहले यूक्रेन के तेल और गैस उत्पादन क्षेत्र पर व्यवस्थित रूप से हमला कर रहा है, ताकि हमारे बुनियादी ढांचे को अधिकतम नुकसान पहुंचाया जा सके।" उन्होंने कहा कि इस हमले में किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है ।
जुलाई में हुए पहले के हमलों में रूस ने ओडेसा और पिवदेन्यी बंदरगाहों के ढांचे को निशाना बनाया था। इनमें ईंधन भंडारण, माल चढ़ाने-उतारने की सुविधाएं और एक समुद्री पोत शामिल थे । रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ओडेसा, इज्माइल और मायकोलाइव बंदरगाहों पर हवा से छोड़ी जाने वाली मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए गए। मंत्रालय ने इन्हें यूक्रेन के खिलाफ भारी हमलों के अभियान का हिस्सा बताया ।
7 अगस्त की सुबह यूक्रेनी Liutyi हमलावर ड्रोन ने रूस के येकातेरिनबर्ग स्थित Wildberries लॉजिस्टिक्स केंद्र को निशाना बनाया। यह जगह अग्रिम मोर्चे से करीब 2,000 किलोमीटर दूर बताई गई ।
स्वेर्दलोव्स्क क्षेत्र के कार्यवाहक गवर्नर डेनिस पास्लर ने कहा कि क्षेत्र के ऊपर आठ ड्रोन मार गिराए गए। इनमें से तीन ड्रोन का मलबा लॉजिस्टिक्स केंद्र की छत पर गिरा । Wildberries ने केंद्र में आग लगने की पुष्टि की और बताया कि दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पा लिया है । हमले के बाद करीब 800 लोगों को परिसर से बाहर निकाला गया ।
जुलाई से रूस के समारा, क्रास्नोडार और स्तावरोपोल क्षेत्रों में Wildberries के अन्य ठिकानों पर भी हमले हो चुके हैं । यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के अनुसार, इन लॉजिस्टिक्स केंद्रों का इस्तेमाल रूसी सेना के लिए ड्रोन के पुर्जे, नेविगेशन उपकरण और अन्य सैन्य सामग्री पहुंचाने में किया जा रहा था ।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं की गई है। रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनियों में शामिल Wildberries के गोदामों को निशाना बनाना यूक्रेन की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसमें वह सैन्य आपूर्ति से जुड़े लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर दूर से हमला करने की कोशिश कर रहा है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने 25 जून 2026 को यूक्रेन की सुरक्षा सेवा यानी SBU को रूस पर दबाव बनाने के उद्देश्य से 40-दिन के अभियान की मंजूरी दी थी । घोषित लक्ष्य रूस को युद्ध समाप्त करने के लिए प्रभावित करना था ।
अगस्त की शुरुआत तक SBU ने रूस के भीतर रणनीतिक ठिकानों पर 100 से अधिक सफल हमलों का दावा किया । यूक्रेनी रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान में निशाने पर आए प्रमुख ठिकाने थे:
इसके अलावा, हवाई रक्षा प्रणालियों, कमांड पोस्ट, युद्धपोतों, टैंकरों और रक्षा उद्योग से जुड़ी कंपनियों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई । Institute for the Study of War के आकलन के मुताबिक, इस अभियान का उद्देश्य रूस के लिए युद्ध जारी रखने की लागत बढ़ाना था ।
SBU के अनुसार, अभियान में रूस के सैन्य-औद्योगिक परिसर, एयरबेस, हवाई रक्षा, कमांड पोस्ट, युद्धपोत, तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ के टैंकर, तेल रिफाइनरियां तथा परिवहन और सैन्य लॉजिस्टिक्स ढांचे शामिल थे । विमानन ढांचे पर भी विशेष ध्यान दिया गया। बताए गए ठिकानों में साकी, ह्वारदिस्के, बेलबेक, बागेरोवो, एंगेल्स और खांस्काया एयरफील्ड शामिल हैं ।
इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष अब केवल अग्रिम मोर्चे तक सीमित हमलों के बजाय ऊर्जा, ईंधन, उत्पादन और आपूर्ति-श्रृंखला के दूर-दराज के केंद्रों को भी युद्ध का हिस्सा बना रहे हैं। रूस के हमले यूक्रेन की ऊर्जा और तेल-गैस उत्पादन क्षमता पर दबाव डाल रहे हैं, जबकि यूक्रेन रूस की ईंधन व्यवस्था, सैन्य बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की कमजोरियां तलाश रहा है।
हालांकि, ऐसे हमलों के वास्तविक सैन्य और आर्थिक प्रभाव का स्वतंत्र आकलन समय के साथ ही संभव होगा।