यह उछाल अचानक नहीं आया। 2022 में 2-वर्षीय यील्ड 0.1% से नीचे थी। इसके बाद BOJ ने अपनी नीति को धीरे-धीरे सामान्य करना शुरू किया—2023 में yield curve control समाप्त किया, मार्च 2024 में नकारात्मक ब्याज दरों से बाहर निकला और जून 2026 में नीति दर बढ़ाकर 1% कर दी ।
अब बाजार में यह विश्वास मजबूत हो रहा है कि महंगाई BOJ के 2% लक्ष्य से ऊपर रह सकती है। यदि मजदूरी और कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो केंद्रीय बैंक पहले के अनुमान से तेज गति से दरें बढ़ा सकता है।
31 जुलाई 2026 को अमेरिकी पूर्वी समय के अनुसार जापान के वित्त मंत्रालय ने अमेरिकी ट्रेजरी के साथ मिलकर येन खरीदने और डॉलर बेचने का हस्तक्षेप किया। इसे 1998 के बाद अमेरिका-जापान का पहला संयुक्त मुद्रा हस्तक्षेप बताया गया है । अभियान का अनुमानित आकार लगभग ¥14 ट्रिलियन यानी करीब 93 अरब डॉलर था, जिससे यह इतिहास का सबसे बड़ा एकल येन-खरीद हस्तक्षेप बन गया । दक्षिण कोरिया ने भी इसी समय हस्तक्षेप किया ।
इस कदम का समय खास था। हस्तक्षेप उसी दिन हुआ जब BOJ की 30–31 जुलाई की नीति बैठक समाप्त हुई । केंद्रीय बैंक ने दर 1% पर स्थिर रखी, लेकिन पहली बार चेतावनी दी कि मूलभूत महंगाई उसके 2% लक्ष्य से ऊपर जा सकती है। BOJ ने आगे की नीति चर्चा में कीमतों से जुड़े ऊपर की ओर जोखिमों पर जोर दिया—यह संकेत था कि सितंबर में दर बढ़ोतरी संभव है ।
इससे बाजार को एक महत्वपूर्ण संदेश मिला। पहले BOJ की आक्रामक दर बढ़ोतरी से येन और मजबूत हो सकता था, जिसे वॉशिंगटन शायद पसंद न करे। लेकिन संयुक्त हस्तक्षेप ने संकेत दिया कि अमेरिका और जापान फिलहाल कमजोर येन को संभालने के मुद्दे पर साथ खड़े हैं ।
ट्रेडरों ने इसे दोहरी कार्रवाई के रूप में देखा—एक ओर येन को सहारा देने का हस्तक्षेप और दूसरी ओर BOJ का महंगाई पर सख्त रुख। इसके बाद सितंबर में दर बढ़ोतरी की संभावना बढ़ी और 2-वर्षीय यील्ड में आगे उछाल आया ।
JPMorgan ने 2027 तक BOJ की दर बढ़ोतरी का अपना अनुमान दो से बढ़ाकर तीन कर दिया है। बैंक का अनुमान है कि नीति दर 2027 के अंत तक 2% तक पहुंच सकती है । हालांकि उसका आधारभूत अनुमान अभी भी अक्टूबर 2026 में अगली बढ़ोतरी का है, लेकिन येन हस्तक्षेप और BOJ के जुलाई के सख्त बयान के बाद सितंबर में ही कदम उठाए जाने का “महत्वपूर्ण ऊपर की ओर जोखिम” बैंक ने स्वीकार किया है ।
OECD का अनुमान भी है कि BOJ की नीति दर 2027 के अंत तक 2% तक पहुंच सकती है। संगठन के अनुसार, यदि महंगाई करीब 2% बनी रहती है, तो मौजूदा 1% दर अर्थव्यवस्था के लिए तटस्थ दायरे के निचले हिस्से के पास है ।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भी BOJ की नीति सामान्यीकरण प्रक्रिया का समर्थन कर रहा है। IMF के दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी Dan Katz ने अगस्त 2026 में कहा कि जापान एक “बहुत महत्वपूर्ण दीर्घकालिक बदलाव” से गुजर रहा है और आर्थिक पुनरुद्धार BOJ को अपनी नीति सामान्य करने की गुंजाइश दे रहा है ।
IMF ने इससे पहले भी कहा था कि मध्य-पूर्व के संघर्ष से जुड़े जोखिमों के बावजूद BOJ को दरें धीरे-धीरे बढ़ाते रहना चाहिए। उसके अनुमान में नीति दर 2026 के अंत तक करीब 1.2% और 2027 में लगभग 1.5% के तटस्थ स्तर तक पहुंच सकती है ।
BOJ की अगली नीति बैठक 17–18 सितंबर 2026 को होगी। बाजार के लिए मुख्य सवाल यह है कि केंद्रीय बैंक सितंबर में दर बढ़ाएगा या अक्टूबर तक इंतजार करेगा। उपलब्ध संकेतों में BOJ का महंगाई पर सख्त रुख, कमजोर येन और अमेरिका-जापान का संयुक्त हस्तक्षेप शामिल हैं। इसलिए सितंबर में कदम उठाए जाने की संभावना अब वास्तविक है, भले ही कई अर्थशास्त्री अभी भी अक्टूबर को अधिक संभावित समय मानते हों।
उपलब्ध स्रोतों में सितंबर की बैठक से पहले भाषण देने वाले तीन विशिष्ट BOJ बोर्ड सदस्यों के नाम या उनके भाषणों की सटीक तारीखों की पुष्टि नहीं मिलती। आम तौर पर BOJ की बैठक से लगभग एक सप्ताह पहले संचार पर रोक रहती है और उससे पहले बोर्ड सदस्य भाषण देते हैं, लेकिन अगस्त 2026 का आधिकारिक कार्यक्रम उपलब्ध जानकारी में दर्ज नहीं था।
जापान में बेहद कम ब्याज दरों का दौर अब निर्णायक रूप से समाप्त हो चुका है। कमजोर येन और आयातित महंगाई BOJ पर दबाव बढ़ा रहे हैं, जबकि अमेरिका-जापान का संयुक्त हस्तक्षेप केंद्रीय बैंक के लिए दरें बढ़ाने की राह में एक अहम बाधा कम करता दिख रहा है।
अब बाजार की नजर इस बात पर है कि सितंबर की बैठक में BOJ सिर्फ सख्त भाषा दोहराएगा या वास्तव में ब्याज दर बढ़ाकर नीति सामान्यीकरण की गति तेज करेगा।