Voyager 2 के कई हीटर पूरे सबसिस्टम को गर्म रखते थे, जिनमें कुछ गैर-ज़रूरी हिस्से भी शामिल थे। इंजीनियरों ने इन व्यापक हीटिंग व्यवस्थाओं को बंद कर केवल महत्वपूर्ण घटकों को गर्म रखने वाले कम-शक्ति विकल्पों पर स्विच किया। इससे बिजली की इतनी बचत हुई कि एक और वैज्ञानिक उपकरण को बंद करने की तत्काल ज़रूरत टल गई ।
इस बदलाव के बिना Voyager 2 को 2026 के अंत से पहले अपना तीसरा सक्रिय वैज्ञानिक उपकरण भी बंद करना पड़ता। तब तीन में से केवल दो उपकरण काम करते रहते ।
सफल मैन्युवर के बाद अब Voyager 2 के तीनों बचे वैज्ञानिक उपकरण कम-से-कम एक साल और, यानी लगभग 2027 के मध्य तक या उससे आगे, काम कर सकते हैं । इससे इंटरस्टेलर स्पेस से मिलने वाले दुर्लभ वैज्ञानिक डेटा का सिलसिला कुछ और समय तक जारी रहेगा।
बिजली बचाने के लिए Voyager 2 के कई उपकरण पहले ही बंद किए जा चुके हैं। ‘बिग बैंग’ ने इन तीन सक्रिय उपकरणों को बनाए रखने में मदद की:
ये तीनों उपकरण तारों के बीच के क्षेत्र में काम कर रहा मानवता का एकमात्र प्रत्यक्ष, यानी इन-सिटू, सेंसर नेटवर्क हैं। इनके डेटा का कोई तत्काल विकल्प नहीं है, क्योंकि ऐसा कोई प्रतिस्थापन मिशन फिलहाल वित्तपोषित या नियोजित नहीं है ।
यह एक एक-बार किया जाने वाला, लगभग अपरिवर्तनीय कदम था। कमांड भेजने के बाद इंजीनियर तुरंत परिणाम नहीं बदल सकते थे ।
इसलिए टीम ने अंतिम कमांड भेजने से पहले महीनों तक पूरी प्रक्रिया का मॉडल तैयार किया और उसका परीक्षण किया ।
Voyager 1 भी घटती बिजली की इसी चुनौती से जूझ रहा है। 17 अप्रैल 2026 को JPL इंजीनियरों ने उसका Low-Energy Charged Particle (LECP) उपकरण बंद किया, जिससे मिशन को लगभग एक साल की अतिरिक्त गुंजाइश मिली ।
‘बिग बैंग’ मूल रूप से दोनों Voyager यानों के लिए तैयार किया गया था । Voyager 2 पर इसकी सफलता के बाद NASA Voyager 1 पर भी इसी तरह की पावर-रीकॉन्फिगरेशन करने की योजना बना रहा है ।
हालांकि Voyager 1 के मामले में चुनौती कुछ कठिन है:
अगर Voyager 1 पर भी यह कदम सफल रहता है, तो उसके तीन बचे वैज्ञानिक उपकरण कम-से-कम एक साल और चलते रह सकते हैं। इससे दोनों Voyager मिशनों के 2030 के दशक तक और गहराई से वैज्ञानिक काम जारी रखने की संभावना बन सकती है ।