छवि के मध्य भाग में:
इसका महत्व केवल इसकी सुंदरता में नहीं है। इतनी बड़ी और गहरी तस्वीर से वैज्ञानिक आकाशगंगाओं के विकास, डार्क मैटर के वितरण और ब्रह्मांड की विशाल संरचनाओं का अध्ययन कर सकेंगे . EDP2 में कच्ची और कैलिब्रेट की गई एकल-अवलोकन तस्वीरें, संयुक्त छवियां, बदलाव दिखाने वाली difference images और detection catalogs भी शामिल हैं, ताकि शोधकर्ता इनका तुरंत वैज्ञानिक विश्लेषण कर सकें .
इसी अवधि में सामने आई विस्तृत रिपोर्टों में रुबिन वेधशाला की दूसरी अहम भूमिका SN 2026gzf नामक दुर्लभ सुपरनोवा से जुड़ी है। इस घटना को सबसे पहले चीन के Einstein Probe अंतरिक्ष मिशन ने 21 मार्च 2026 को EP260321a नाम के एक्स-रे फ्लैश के रूप में दर्ज किया था। इसका स्रोत पृथ्वी से करीब 50 करोड़ प्रकाश-वर्ष दूर स्थित एक आकाशगंगा था .
रुबिन वेधशाला, Dark Energy Camera और DESI यंत्र से लैस Mayall 4-मीटर टेलीस्कोप समेत कई अन्य दूरबीनों ने इस संकेत के कुछ ही घंटों के भीतर उस क्षेत्र का निरीक्षण शुरू कर दिया . इस तेज़ समन्वय ने वैज्ञानिकों को शॉक ब्रेकआउट पकड़ने में मदद की।
शॉक ब्रेकआउट उस क्षण को कहते हैं जब किसी मरते हुए तारे के विस्फोट से बनी शक्तिशाली झटका-तरंग तारे की बाहरी सतह को तोड़कर बाहर निकलती है। यही सुपरनोवा की पहली रोशनी का चरण होता है . यह घटना बेहद कम समय तक चल सकती है, इसलिए इतने शुरुआती क्षण को दर्ज करना असाधारण रूप से कठिन है। वैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग 20 वर्षों में किसी विशाल तारे के ऐसे शुरुआती शॉक ब्रेकआउट को पकड़ने का यह केवल दूसरा अवसर था .
कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी की अगुवाई में चलाए गए वैश्विक अवलोकन अभियान से पता चला कि SN 2026gzf, broad-lined Type Ic सुपरनोवा से जुड़े अब तक के सबसे मंद शॉक ब्रेकआउट में से एक है। इसके तापीय एक्स-रे उत्सर्जन की अधिकतम चमक 2.2×10⁴⁴ erg/s दर्ज की गई .
रुबिन वेधशाला ने जून 2026 के अंत में Legacy Survey of Space and Time (LSST) औपचारिक रूप से शुरू किया। यह दक्षिणी गोलार्ध के आकाश का 10 साल लंबा सर्वे है .
चिली के Cerro Pachón पर्वत पर स्थित Simonyi Survey Telescope में लगा 3.2 गीगापिक्सल का कैमरा हर कुछ रातों में दिखाई देने वाले पूरे आकाश की तस्वीर लेगा . एक ही क्षेत्र को बार-बार देखने से वैज्ञानिक केवल यह नहीं जान पाएंगे कि ब्रह्मांड में क्या मौजूद है, बल्कि यह भी देख सकेंगे कि समय के साथ उसमें क्या बदल रहा है।
इसी वजह से LSST को ब्रह्मांड की एक बेहद चौड़ी और उच्च-रिजॉल्यूशन वाली 10 साल की टाइम-लैप्स फिल्म कहा जा रहा है . इस रिकॉर्ड में सुपरनोवा, बदलती चमक वाले तारे, क्षुद्रग्रह और अन्य transient घटनाएं विशेष रूप से महत्वपूर्ण होंगी।
LSST से जुड़े करीब 2,800 वैज्ञानिक डार्क एनर्जी और डार्क मैटर की प्रकृति, हमारी आकाशगंगा की संरचना, सौर मंडल और पृथ्वी के नज़दीक से गुजरने वाली वस्तुओं का अध्ययन करेंगे . सर्वे का एक प्रमुख लक्ष्य ऐसी खगोलीय घटनाओं को जल्द पहचानना भी है जो कुछ घंटों या दिनों में बदल जाती हैं।
रुबिन वेधशाला ने अपनी शुरुआती संचालन अवधि में ही तेज़ चेतावनी प्रणाली की क्षमता दिखा दी थी। कमीशनिंग के दौरान उसने एक ही रात में 800,000 transient alerts जारी किए थे . आने वाले दशक में इसी तरह के त्वरित अलर्ट वैज्ञानिकों को दुनिया भर की अन्य दूरबीनों को तुरंत किसी नई घटना की ओर मोड़ने में मदद कर सकते हैं।
COSMOS की छवि इस लंबी यात्रा की पहली झलक है; SN 2026gzf जैसे दुर्लभ विस्फोट बताते हैं कि बार-बार और तेज़ी से आकाश को देखने वाली वेधशाला कितनी अनोखी घटनाएं पकड़ सकती है।