Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, AI डेटा सेंटरों में बिजली के ये उतार-चढ़ाव उपकरणों की डिजाइन क्षमता से 50% तक अधिक हो सकते हैं . लगातार दोहराए जाने वाले ये विद्युत, यांत्रिक और थर्मल झटके उन प्रणालियों को तेजी से घिसते हैं जिन्हें स्थिर लोड के लिए डिजाइन किया गया था।
सबसे उल्लेखनीय मामलों में xAI की Colossus सुविधा शामिल है, जो Memphis, Tennessee में स्थित है। वहां गैस टर्बाइनों में तेज पावर-साइक्लिंग से पैदा हुए लगातार थर्मल और यांत्रिक तनाव के कारण दरारें विकसित होने की खबर है .
रिपोर्ट के अनुसार, इंजीनियरों ने GPU को जरूरत से अधिक बिजली खपत करने के लिए कस्टम सॉफ्टवेयर लिखा, ताकि मांग में आने वाले अचानक झटकों को कुछ हद तक समतल किया जा सके और टर्बाइनों पर दबाव घटाया जा सके .
समस्या केवल इसी परिसर तक सीमित नहीं बताई गई है। ब्रिटेन के कई छोटे डेटा सेंटरों में भी गैस टर्बाइनों में दरार की समान घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं .
उपकरणों की खराबी का असर सीधे डेटा सेंटरों के कारोबार और AI निवेश पर पड़ रहा है।
इसका अर्थ यह है कि AI डेटा सेंटरों की लागत केवल चिप, सर्वर और बिजली खरीदने तक सीमित नहीं रहेगी। बार-बार बदलने वाले उपकरण, अनियोजित बंदी और अतिरिक्त ग्रिड-सुरक्षा उपाय परियोजनाओं की अर्थव्यवस्था को भी बदल सकते हैं।
डेटा सेंटर के भीतर होने वाली अस्थिरता का असर बाहरी बिजली व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। 4 मई 2026 को North American Electric Reliability Corporation (NERC)—अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के कुछ हिस्सों की बल्क-पावर व्यवस्था पर नजर रखने वाली संस्था—ने दुर्लभ Level 3 'Essential Action' Alert जारी किया। यह उसकी सबसे अधिक तात्कालिकता वाली चेतावनी है .
चेतावनी का आधार ऐसी कई घटनाएं थीं, जिनमें 1,000 मेगावाट से अधिक कंप्यूटेशनल लोड कुछ ही सेकंड में ग्रिड से हट गया या तेजी से दोलन करने लगा। इससे बिजली की आवृत्ति और वोल्टेज में ऐसे बदलाव आए, जो बड़े क्षेत्र में ग्रिड स्थिरता को प्रभावित कर सकते थे . एक रिपोर्टेड घटना में AI डेटा सेंटरों से जुड़ी 1,800 मेगावाट की अचानक गिरावट का उल्लेख किया गया है .
NERC ने ट्रांसमिशन प्लानरों और प्लानिंग कोऑर्डिनेटरों के लिए सात जरूरी कदम तय किए हैं:
NERC ने कहा कि ग्रिड ऑपरेटरों के पास फिलहाल “कंप्यूटेशनल लोड से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए पर्याप्त प्रक्रियाएं, तरीके या प्रणालियां नहीं हैं” .
AI डेटा सेंटरों की चुनौती केवल कुल बिजली खपत की नहीं है, बल्कि खपत की गति और उसके पैटर्न की भी है। अंदरूनी स्तर पर यही मिलीसेकंड वाली उछाल बैटरियों और टर्बाइनों को नुकसान पहुंचा रही है; बड़े पैमाने पर यही उतार-चढ़ाव ग्रिड में आवृत्ति और वोल्टेज संबंधी अस्थिरता भेज सकता है .
इसलिए AI इंफ्रास्ट्रक्चर का अगला चरण केवल अधिक GPU लगाने की दौड़ नहीं होगा। डेटा सेंटरों को ऐसे पावर सिस्टम, नियंत्रण सॉफ्टवेयर और ग्रिड-समन्वय की जरूरत होगी जो अचानक बदलते कंप्यूटिंग लोड को संभाल सकें।