यह बयान जापान द्वारा अमेरिकी निर्मित टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के पहले समुद्री परीक्षण के कुछ दिनों बाद आया।
किम यो जोंग ने जापान को ‘युद्ध राज्य में बदलता हुआ युद्ध अपराधी राज्य’ बताया। उनके अनुसार, टोक्यो मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव और भू-राजनीतिक टकराव का फायदा उठाकर अपनी आक्रामक सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है ।
उन्होंने मुख्य रूप से ये कारण गिनाए:
टॉमहॉक परीक्षण जापान की व्यापक रक्षा नीति में बदलाव का हिस्सा है। टोक्यो ने लगभग 400 टॉमहॉक मिसाइलें खरीदने के लिए 2 अरब डॉलर से अधिक का प्रावधान किया है । जापान के मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 9 ट्रिलियन येन से अधिक का रिकॉर्ड रक्षा बजट भी मंजूर किया, जबकि वित्त वर्ष 2025 का बजट 8.7 ट्रिलियन येन था । यह योजना रक्षा खर्च को 2027 तक सकल घरेलू उत्पाद के 2 प्रतिशत तक ले जाने के लक्ष्य से जुड़ी है ।
4 अगस्त को जारी जापान की 2026 रक्षा श्वेतपत्र में देश के आसपास के सुरक्षा माहौल को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे गंभीर और जटिल बताया गया। रिपोर्ट में चीन, रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग, बमवर्षक विमानों की गश्त और उत्तर कोरिया के सैन्य आधुनिकीकरण के लिए रूस के समर्थन का उल्लेख किया गया ।
जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने भी देश की सैन्य क्षमताओं को ‘तात्कालिकता और संकट की भावना’ के साथ मजबूत करने की जरूरत बताई । हालांकि, जापान का रक्षा मंत्रालय इन कदमों को आत्मरक्षा और क्षेत्रीय खतरों को रोकने के लिए आवश्यक बताता है ।
चीन ने भी टॉमहॉक परीक्षण की आलोचना करते हुए कहा कि यह जापान की चीन के हितों को कमजोर करने और चीनी लोगों को नुकसान पहुंचाने की मंशा दर्शाता है। बीजिंग ने जापानी सैन्यवाद के फिर उभरने को लेकर चिंता जताई ।
विश्लेषकों के अनुसार, जापान के खिलाफ किम यो जोंग की तीखी भाषा का एक उद्देश्य उत्तर कोरिया के अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को उचित ठहराना भी है । प्योंगयांग अक्सर बाहरी सैन्य खतरे को अपनी हथियार प्रणालियों के विकास के लिए रक्षात्मक वजह के रूप में पेश करता है। इसलिए उनकी चेतावनी केवल जापान को संबोधित राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि उत्तर कोरिया की संभावित जवाबी सैन्य कार्रवाई का संकेत भी मानी जा रही है।