रूस ने इस हमले में कुल 35 मिसाइलें, जिनमें 27 बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल थीं, और 185 ड्रोन लॉन्च किए थे । यूक्रेनी वायु रक्षा प्रणाली केवल 27 बैलिस्टिक मिसाइलों में से दो को ही रोक पाई, जबकि 185 ड्रोनों में से 154 को नष्ट कर दिया गया ।
लिथुआनिया के विदेश मंत्री केस्तुति बुद्रीस ने कहा कि वे इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि यह हमला जानबूझकर दूतावास को निशाना बनाकर किया गया । उन्होंने तर्क दिया कि दूतावास के आसपास कोई सैन्य या महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा नहीं है। सबसे नजदीकी लक्ष्य जिसे रूस लगातार निशाना बनाता है, वह 1.5 किमी दूर एक बिजली संयंत्र है । हालांकि, मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं हैं कि यह हमला जानबूझकर किया गया ।
1 अगस्त को ही लिथुआनिया ने विलनियस स्थित रूसी दूतावास के प्रतिनिधि को तलब करके उन्हें एक औपचारिक विरोध ज्ञापन सौंपा । इस ज्ञापन में हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे 1961 के वियना कन्वेंशन का सीधा उल्लंघन बताया गया । लिथुआनिया ने यह भी स्पष्ट किया कि वह भविष्य में रूस के खिलाफ और जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है ।
लिथुआनिया हुए नुकसान का आकलन करने के बाद रूस से मुआवजे की मांग करने के लिए कानूनी रास्ते तलाश रहा है । विदेश मंत्री बुद्रीस ने कहा कि नुकसान का पूरा आकलन विशेषज्ञ कर रहे हैं और कानूनी तौर पर मुआवजे की मांग संभव है । उन्होंने कहा कि लिथुआनिया पहले ही यूक्रेन में हुए नुकसान के लिए बनाए गए अंतरराष्ट्रीय 'डैमेज रजिस्ट्री' में शामिल हो चुका है और अब एक दावा आयोग का गठन किया गया है, जिसमें लिथुआनिया भी शामिल है ।
हमले के बाद, लिथुआनिया के विदेश मंत्री ने नाटो से सख्त सैन्य और राजनीतिक रुख अपनाने की मांग की । उन्होंने कहा, "हम शांत रहना चाहते हैं, लेकिन हमें हर हाल में सख्त जवाब देना होगा। यह जवाब सबसे पहले सैन्य क्षमताओं के जरिए होना चाहिए" ।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कुछ दिन पहले, 30 जुलाई 2026 को, एक रूसी Kh-101 क्रूज़ मिसाइल पोलैंड की हवाई सीमा का उल्लंघन कर पूर्वी पोलैंड के एक गांव के पास गिरी थी । इस घटना ने पहले से ही तनाव को और बढ़ा दिया था। लिथुआनिया और पोलैंड ने आशंका जताई है कि रूस नाटो की प्रतिक्रिया क्षमता (थ्रेशोल्ड) की परीक्षा ले रहा है ।
ध्यान देने वाली बात यह है कि जहां प्रश्न में जिरकोन हाइपरसोनिक मिसाइलों का जिक्र है, वहीं प्रमुख समाचार एजेंसियों (रॉयटर्स और एनपीआर) की रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं है कि दूतावास के पास गिरने वाली मिसाइलें जिरकोन ही थीं । यह जानकारी एक उपयोगकर्ता द्वारा बनाए गए वीडियो विश्लेषण पर आधारित है ।