NATO ने जुलाई 2026 में पूर्वी हिस्से पर विमानों की उड़ानें 250% बढ़ाईं
नाटो की संयुक्त सेना कमान ब्रन्सम ने जुलाई 2026 में 'अल्फा स्क्रैम्बल' में पिछले साल के मुकाबले 250% से अधिक की वृद्धि दर्ज की, जिसका सीधा कारण रूसी विमानों की बिना योजना और ट्रांसपोंडर के उड़ानें थीं। इस अवधि में बाल्टिक सागर में कई घटनाएँ हुईं, जिनमें रूसी Su 30, Tu 22M बमवर्षक, Su 35S लड़ाकू और Il 20 टोही विमानों...
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नाटो की संयुक्त सेना कमान ब्रन्सम ने जुलाई 2026 में 'अल्फा स्क्रैम्बल' में पिछले साल के मुकाबले 250% से अधिक की वृद्धि दर्ज की, जिसका सीधा कारण रूसी विमानों की बिना योजना और ट्रांसपोंडर के उड़ानें थीं।
इस अवधि में बाल्टिक सागर में कई घटनाएँ हुईं, जिनमें रूसी Su 30, Tu 22M बमवर्षक, Su 35S लड़ाकू और Il 20 टोही विमानों को रोकना शामिल था। रोमानिया में तीन रूसी ड्रोन मार गिराए गए।
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5 अगस्त, 2026 को, नाटो की संयुक्त सेना कमान ब्रन्सम (JFCBS) ने बताया कि गठबंधन के पूर्वी फ्लैंक पर 'अल्फा स्क्रैम्बल' (आपातकालीन विमान उड़ान) में जुलाई 2026 में जुलाई 2025 की तुलना में 250% से अधिक की वृद्धि हुई है । यह चौंकाने वाला आंकड़ा बाल्टिक सागर, पोलैंड, रोमानिया और नॉर्डिक क्षेत्र में तनाव में तेजी से वृद्धि को दर्शाता है, जो रूसी सैन्य विमानों द्वारा बिना उड़ान योजना और ट्रांसपोंडर सिग्नल के उड़ान भरने के कारण हुआ ।
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"NATO ने जुलाई 2026 में पूर्वी हिस्से पर विमानों की उड़ानें 250% बढ़ाईं" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
नाटो की संयुक्त सेना कमान ब्रन्सम ने जुलाई 2026 में 'अल्फा स्क्रैम्बल' में पिछले साल के मुकाबले 250% से अधिक की वृद्धि दर्ज की, जिसका सीधा कारण रूसी विमानों की बिना योजना और ट्रांसपोंडर के उड़ानें थीं।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
नाटो की संयुक्त सेना कमान ब्रन्सम ने जुलाई 2026 में 'अल्फा स्क्रैम्बल' में पिछले साल के मुकाबले 250% से अधिक की वृद्धि दर्ज की, जिसका सीधा कारण रूसी विमानों की बिना योजना और ट्रांसपोंडर के उड़ानें थीं। इस अवधि में बाल्टिक सागर में कई घटनाएँ हुईं, जिनमें रूसी Su 30, Tu 22M बमवर्षक, Su 35S लड़ाकू और Il 20 टोही विमानों को रोकना शामिल था। रोमानिया में तीन रूसी ड्रोन मार गिराए गए।
इसका सीधा कारण रूसी सैन्य विमानों का नाटो के हवाई क्षेत्र के पास बिना उड़ान योजना और ट्रांसपोंडर सिग्नल के उड़ना था । इन 'असहयोगी' उड़ानों से इरादों को लेकर संशय पैदा होता है, जिससे नाटो के लड़ाकू विमानों को दृश्य पहचान और एस्कॉर्ट के लिए उड़ान भरनी पड़ती है। नाटो अधिकारियों के अनुसार, ये उड़ानें गठबंधन की प्रतिक्रिया समय की जांच, वायु रक्षा में कमियों की पड़ताल और सीमा पर लगातार खतरे का माहौल बनाने की एक जानबूझकर की गई रूसी रणनीति का हिस्सा हैं ।
अधिकांश उड़ानें बाल्टिक सागर, पोलैंड के पास और कलिनिनग्राद कॉरिडोर के ऊपर हुईं। कलिनिनग्राद रूस का एक सैन्य दृष्टि से संपन्न इलाका है, जो नाटो सदस्यों पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित है।
जुलाई 2026 में बाल्टिक सागर में दर्ज घटनाएँ
जुलाई 2026 में नाटो के विमानों ने बाल्टिक सागर के ऊपर कम से कम पाँच बार रूसी विमानों को रोका:
13 जुलाई: नाटो के विमानों ने कलिनिनग्राद से उड़े दो रूसी Su-30 लड़ाकू विमानों को रोका, जो बिना फ्लाइट प्लान और ट्रांसपोंडर के उड़ रहे थे ।
14-15 जुलाई: पोलिश सेना ने लगातार दो दिन बाल्टिक सागर में रूसी विमानों को रोका, जिसमें एक रूसी Il-20 टोही विमान शामिल था, जो सहयोगी वायु रक्षा प्रणालियों की निगरानी कर रहा था ।
21 जुलाई: नाटो के विमानों ने दो Tu-22M सामरिक बमवर्षकों और दो Su-35S लड़ाकू विमानों को रोका, जो बाल्टिक राज्यों के पास अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में बिना उड़ान नियमों का पालन किए उड़ रहे थे ।
जुलाई के अंत में: पोलिश ऑपरेशनल कमांड ने कहा कि एक रूसी Il-20 को दो दिनों में दो बार रोका गया, और घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति नाटो के पूर्वी फ्लैंक पर 'बढ़ते तनावपूर्ण सुरक्षा वातावरण' को रेखांकित करती है ।
इससे पहले जून 2026 की शुरुआत में, फ्रांसीसी विमानों ने अकेले एक सप्ताह में 11 बार रूसी विमानों को रोका था ।
2026 की शुरुआत से कितना अलग है यह?
2026 की शुरुआत में भी रूसी विमानों की गतिविधियाँ बढ़ी हुई थीं, लेकिन जुलाई ने एक अलग उछाल दिखाया।
1 जनवरी से 3 जुलाई 2026 के बीच, नाटो के विमानों ने पूर्वोत्तर फ्लैंक (नॉर्वे और नॉर्डिक क्षेत्र) पर 62 बार उड़ान भरी ।
नॉर्वे ने 2026 की पहली छमाही में 2025 की तुलना में अपनी सीमा के पास अधिक रूसी विमानों की पहचान की ।
इस क्षेत्र में 2025 में कुल 41 बार नाटो विमानों को उड़ान भरनी पड़ी थी ।
जुलाई 2026 का आंकड़ा 2025 की तुलना में 250% से अधिक था, जो एक तीव्र वृद्धि को दर्शाता है। यह उछाल रूसी वायु सेना के अभ्यासों, नाटो की बढ़ी हुई मौजूदगी की जाँच के लिए टोही उड़ानों और कोला प्रायद्वीप व कलिनिनग्राद से बमवर्षक गश्त से जुड़ा है ।
पाँच प्रमुख घटनाएँ जिन्होंने इस तनाव को और बढ़ाया
1. लिथुआनिया में जर्मनी की स्थायी ब्रिगेड
लिथुआनिया में जर्मनी का पैंज़रब्रिगेड 45 (लिथुआनिया ब्रिगेड) तैनात किया जा रहा है, जो 1955 में बुंडेसवेहर की स्थापना के बाद से उसकी पहली स्थायी विदेशी तैनाती है। मार्च 2026 तक, लगभग 1,700 सैनिक तैनात थे, जिन्हें 2026 के अंत तक ~2,000 और 2027 के अंत तक ~5,000 करने की योजना है । मॉस्को ने इस तैनाती को 'उकसावा' बताया है, जिससे संभवतः रूसी हवाई जासूसी में वृद्धि हुई है ।
2. रोमानिया में रूसी ड्रोन घुसपैठ (24-26 जुलाई 2026)
लगातार तीन दिनों तक रोमानिया ने रूसी ड्रोन को मार गिराया:
24 जुलाई: रोमानिया ने पहली बार एक F-16 लड़ाकू विमान से एक ड्रोन को मार गिराया ।
25 जुलाई: एक दूसरे ड्रोन को मार गिराया गया; पुष्टि हुई कि यह रूसी ड्रोन था ।
26 जुलाई: तीसरे रूसी ड्रोन को मार गिराया गया। राष्ट्रपति निकुसोर डैन ने इसे 'अस्वीकार्य और असहनीय' बताया ।
29 मई, 2026: एक रूसी ड्रोन गलाती शहर में एक आवासीय इमारत से टकराया था, जिसमें दो लोग घायल हुए थे ।
रोमानिया ने 27 जुलाई को एक रूसी राजनयिक को निष्कासित कर दिया । 2026 में अकेले 18 बार रूसी ड्रोन ने रोमानिया की सीमा का उल्लंघन किया ।
3. नाटो का विस्तारित बाल्टिक वायु रक्षा मिशन (ईस्टर्न सेंट्री अपग्रेड)
8 जुलाई, 2026 को, नाटो ने बाल्टिक एयर पुलिसिंग मिशन को एक पूर्ण वायु रक्षा मिशन में अपग्रेड करने पर सहमति व्यक्त की, जिससे पायलटों को 'खतरा पैदा करने वाली वस्तुओं को नष्ट करने' का अधिकार मिल गया ।
4. पोलैंड में रूसी मिसाइल घटना (30 जुलाई 2026)
30 जुलाई, 2026 को, एक रूसी मिसाइल पोलिश क्षेत्र में फट गई, जिससे नाटो विमानों को उड़ान भरनी पड़ी और राजनयिक संकट पैदा हो गया । इस घटना ने तनाव को और बढ़ा दिया।
5. रूस द्वारा यूक्रेनी ड्रोन के दुरुपयोग की पोलैंड की चेतावनी
पोलिश अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि रूस यूक्रेन से पकड़े गए ड्रोन को नाटो सीमा पर झूठे झंडे की घटनाओं (फॉल्स-फ़्लैग प्रोवोकेशन) के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
निष्कर्ष
जुलाई 2026 में नाटो विमान उड़ानों में 250% से अधिक की वृद्धि का सीधा कारण रूसी Su-30, Tu-22M, Su-35S लड़ाकू विमानों और Il-20 टोही विमानों की बिना उड़ान योजना और ट्रांसपोंडर के बाल्टिक सागर के ऊपर की गई उड़ानें थीं। यह वृद्धि महज आंकड़ा नहीं है, बल्कि कई घटनाओं का परिणाम है, जो नाटो के पूर्वी फ्लैंक की सुरक्षा के लिए बढ़ते खतरे को दर्शाती हैं।