तकाचुक ने उरालड्रोंज़ावोद नामक एक निजी रक्षा कंपनी की स्थापना की थी, जो 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद अस्तित्व में आई । यह कंपनी उपीर (Upyr, जिसका अर्थ है 'पिशाच' या 'वैम्पायर') परिवार के फर्स्ट-पर्सन-व्यू (FPV) हमलावर ड्रोन का उत्पादन करती है, जिसका उपयोग रूसी सेना यूक्रेन के मोर्चों पर व्यापक रूप से कर रही है । फरवरी 2026 में, कंपनी ने यूक्रेनी ठिकानों के खिलाफ 'उपीर-18' नामक एक भारी-भरकम वेरिएंट तैनात करने की घोषणा की, जो 10 किलो विस्फोटक ले जाने में सक्षम है । कंपनी ने दिसंबर 2025 में रूसी सेना को बेर्डीश (Berdysh) नामक भारी लड़ाकू ड्रोनों की पहली खेप भी भेजी थी ।
अपनी निर्माण भूमिका के अलावा, तकाचुक एक लोकप्रिय युद्ध समर्थक टेलीग्राम चैनल 'पोवेर्नुते ना वोयने' ("युद्ध के दीवाने") भी चलाते थे, जिसके 660,000 से अधिक सब्सक्राइबर हैं । यह चैनल यूक्रेन युद्ध पर रूसी प्रचार का एक मंच था।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, व्लादिमीर तकाचुक और उनकी कंपनी उरालड्रोंज़ावोद अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में नहीं हैं । हालाँकि, द इनसाइडर की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024 में यूरोपीय संघ ने अपने 15वें प्रतिबंध पैकेज के तहत उरालड्रोंज़ावोद पर प्रतिबंध लगा दिए थे । इसका मतलब यह हो सकता है कि तकाचुक और उनकी कंपनी औपचारिक रूप से अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे से बाहर हैं।
तकाचुक पर हमला रूसी सैन्य और रक्षा क्षेत्र के महत्वपूर्ण लोगों को निशाना बनाकर किए जा रहे हत्याकांडों की एक श्रृंखला का नवीनतम उदाहरण है, जो यूक्रेन युद्ध से जुड़े हैं:
कई रिपोर्टों में बताया गया है कि तकाचुक पर हमला दावीदोव की हत्या के कुछ ही दिनों बाद हुआ, जो इन ऑपरेशनों की तीव्रता को दर्शाता है । हालांकि किसी भी समूह ने आधिकारिक तौर पर तकाचुक पर हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन कार बम का इस्तेमाल और रूस के अंदर गहरे वरिष्ठ रक्षा उद्योग के लोगों को निशाना बनाने का पैटर्न यूक्रेनी खुफिया ऑपरेशनों की ओर इशारा करता है ।