यह शोध विलानोवा यूनिवर्सिटी (Villanova University) की सिडनी सियर्स (Sydney Sears) और डॉ. दीना स्कोलनिक वीसबर्ग (Dr. Deena Skolnick Weisberg) के नेतृत्व में किया गया। इसमें Prolific प्लेटफॉर्म के ज़रिए 18 से 81 साल के 2,500 से अधिक वयस्कों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने तीन प्रकाशित इंसानी लेखकों की मूल लघु कथाओं और ChatGPT द्वारा लिखी गई तीन समान शैली और विषय वस्तु वाली कहानियों का इस्तेमाल किया ।
अध्ययन को तीन भागों में बांटा गया था, जिनमें से प्रत्येक पाठकों की धारणा के अलग-अलग पहलुओं को समझने के लिए डिज़ाइन किया गया:
अध्ययन 1 (1,682 प्रतिभागी): प्रत्येक प्रतिभागी ने एक एकल कहानी पढ़ी और उन्हें सही या गलत तरीके से बताया गया कि वह कहानी इंसान ने लिखी है या AI ने। इसके बाद उन्होंने कहानी की गुणवत्ता और उसमें डूबने (narrative absorption) के अनुभव को रेट किया ।
अध्ययन 2 (424 प्रतिभागी): प्रतिभागियों ने एक इंसान द्वारा लिखी और एक AI द्वारा लिखी कहानी पढ़ी, बिना यह बताए कि कौन सी कौन सी है। फिर उन्हें प्रत्येक कहानी के लेखक का अनुमान लगाना था ।
अध्ययन 3 (481 प्रतिभागी): अध्ययन 2 के समान एक और ब्लाइंड-रीडिंग प्रयोग, जिसमें प्रतिभागियों को बताना था कि कहानी इंसान ने लिखी है या ChatGPT ने ।
परिणाम बेहद स्पष्ट और सभी प्रयोगों में एक जैसे थे:
पहचान में नाकामी: अध्ययन 2 में, सही पहचान का प्रतिशत केवल 39.93% था, जो संयोग से भी बदतर है। अध्ययन 3 में यह 51.97% था, जो सांख्यिकीय रूप से संयोग से अलग नहीं है ।
AI कहानियों को उच्च रेटिंग: सभी अध्ययनों में, AI द्वारा जनित कहानियों को गुणवत्ता और आकर्षण दोनों में उच्च रेटिंग मिली ।
'मानव-समर्थक' पूर्वाग्रह (Pro-human Bias): सबसे अधिक रेटिंग उन कहानियों को मिली, जिनके बारे में प्रतिभागियों को बताया गया था कि वे इंसानों ने लिखी हैं, भले ही वे वास्तव में AI द्वारा लिखी गई थीं । शोधकर्ताओं का तर्क है कि यह मानवीय रचनात्मकता में गहरे विश्वास को दर्शाता है ।
AI साक्षरता मायने रखती है, साहित्यिक विशेषज्ञता नहीं: AI से जुड़ी विशेषज्ञता में प्रत्येक एक-अंक की वृद्धि सही पहचान की संभावना में 14% की वृद्धि से जुड़ी थी। एक मान्य AI साक्षरता पैमाने (AILS) पर प्रत्येक अंक 33% की वृद्धि से जुड़ा था ।
डॉ. वीसबर्ग ने बताया कि AI लेखन अक्सर अधिक स्पष्ट, सीधा और समझने में आसान होता है, जबकि इंसानी लेखन अधिक सूक्ष्म और जटिल होता है। उन्होंने कहा कि "लोग आमतौर पर पूर्वानुमानित चीज़ें पसंद करते हैं, क्योंकि कठिन या सूक्ष्म सामग्री को समझने में अधिक दिमागी शक्ति लगती है" ।
यह अध्ययन इस बात के बढ़ते सबूतों पर आधारित है कि AI द्वारा लिखा गया टेक्स्ट अस्पष्टता से बचता है, पूर्वानुमानित कथा संरचनाओं का पालन करता है और कुशलता से समाधान देता है - ये सभी गुण पढ़ने को सहज बनाते हैं। इसके विपरीत, इंसानी साहित्य अक्सर जटिलता, सूक्ष्मता और अनसुलझे तनाव को अपनाता है, जो कलात्मक रूप से समृद्ध होने पर भी तुरंत संतुष्टि नहीं देता ।
अध्ययन में उजागर हुआ 'प्रो-ह्यूमन' पूर्वाग्रह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। पाठकों ने उन कहानियों को कम रेटिंग दी, जिनके बारे में उन्हें लगा कि वे AI ने लिखी हैं, भले ही सामग्री बिल्कुल वैसी ही थी, जिसकी उन्होंने 'इंसानी' लेबल लगने पर प्रशंसा की थी ।
अध्ययन के निष्कर्षों ने विश्वविद्यालयों और उनकी अकादमिक ईमानदारी की नीतियों के सामने कई मौलिक चुनौतियाँ पेश की हैं:
पता लगाना अविश्वसनीय है: चूंकि प्रशिक्षित पाठक भी AI और इंसानी लेखन में अंतर करने में संयोग के स्तर पर ही प्रदर्शन करते हैं, इसलिए पारंपरिक साहित्यिक चोरी का पता लगाने वाले उपकरण और शिक्षकों का निर्णय अकेले AI-लेखित सबमिशन की पहचान करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं ।
AI साक्षरता सबसे प्रभावी उपाय है: अध्ययन में पाया गया कि AI सिस्टम से परिचित होने से पहचान करने की क्षमता में सुधार हुआ। यह सुझाव देता है कि विश्वविद्यालयों को केवल दंडात्मक कार्रवाई के बजाय छात्रों और संकाय दोनों के लिए AI साक्षरता प्रशिक्षण में निवेश करना चाहिए ।
मूल्यांकन के तरीके में बदलाव ज़रूरी: यदि AI ऐसा लेखन तैयार कर सकता है जिसे पाठक इंसानी काम के बराबर या उससे बेहतर मानते हैं, तो घर ले जाकर लिखे जाने वाले निबंध और मानक लेखन कार्य अब छात्रों की व्यक्तिगत क्षमता के मापदंड नहीं रह सकते। विश्वविद्यालयों को पुनर्विचार करना होगा कि वे वास्तव में किन कौशलों का आकलन कर रहे हैं और कैसे ।
अकादमिक ईमानदारी नीतियों का विकास: अध्ययन बताता है कि एक अधिक सूक्ष्म दृष्टिकोण की आवश्यकता है - जो स्वीकार्य बनाम अस्वीकार्य AI उपयोग को परिभाषित करे, अंतिम उत्पाद पर प्रक्रिया और चिंतन पर ज़ोर दे, और पाठ्यक्रम में AI साक्षरता को शामिल करे ।
डॉ. वीसबर्ग ने ज़ोर देकर कहा कि ये निष्कर्ष इंसानी लेखकों को अप्रचलित नहीं बनाते: "इंसान लिखते हैं ताकि वे आत्म-अभिव्यक्ति कर सकें, खुद को चुनौती दे सकें या अपने अनुभवों को समझ सकें। AI का इंसान जैसी कहानियाँ बनाना इस तथ्य को नहीं बदलता है" ।