यह गिरावट किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई कारणों की जंजीर की वजह से हुई जो एक-दूसरे को और मजबूत करती गई:
अलग-अलग रणनीतियों वाले फंडों पर इस तूफान का असर अलग-अलग रहा। गोल्डमैन सैक्स और JPMorgan के आंकड़ों के आधार पर, नुकसान का अंदाजा कुछ इस प्रकार है:
| फंड का प्रकार / रणनीति | अनुमानित नुकसान |
|---|---|
| ग्लोबल हेज फंड (सभी रणनीतियाँ) | जुलाई में ~3% मुनाफा मिटा; अब भी सालाना ~8% ऊपर |
| टेक-फोकस्ड इक्विटी हेज फंड (TMT) | जुलाई में 10% से ज्यादा का नुकसान |
| सिस्टमैटिक / क्वांट फंड | अगस्त 2024 के बाद का सबसे खराब प्रदर्शन; साल के एक-चौथाई मुनाफे पर पानी फिर गया |
| एशिया-फोकस्ड फंडामेंटल लॉन्ग-शॉर्ट फंड | 28 जुलाई तक औसतन 18.6% का रिकॉर्ड मासिक नुकसान; 22 जुलाई को 40% के पीक से 21 प्रतिशत अंकों का मुनाफा मिट गया |
| व्यक्तिगत एशियाई फंड (Hel Ved Capital, E20 Capital, Valliance Asset Mgmt, WT Asset Mgmt) | जुलाई में दोहरे अंकों में नुकसान ; WT चाइना फंड पहले 120% उछलने के बाद 17 जुलाई तक ~17% नीचे |
| अमेरिकी हेज फंड (टेक हार्डवेयर/सेमीकंडक्टर) | लगातार चार हफ्तों तक चिप स्टॉक्स की नेट बिकवाली; SOX इंडेक्स 21% टूटा |
| लीवरेज्ड / क्राउडेड AI ट्रेड | सबसे ज्यादा दर्दनाक नुकसान; बैंकों ने मार्जिन कॉल जारी की |
सबसे ज्यादा तबाही एशिया में देखने को मिली। गोल्डमैन सैक्स ने इसे रीजनल स्टॉक-पिकर्स के लिए सबसे खराब महीना बताया। फंड्स जिन्होंने 22 जुलाई तक 40% का रिटर्न दिया था, उन्होंने अगले छह कारोबारी दिनों में अपने मुनाफे का आधे से ज्यादा हिस्सा गंवा दिया।
जुलाई के इस तूफान से सबसे अहम सबक सिर्फ नुकसान नहीं है, बल्कि JPMorgan की वह चेतावनी है जिसमें कहा गया है कि यह घटना टेक्नोलॉजी ट्रेड की संरचना को हमेशा के लिए बदल सकती है। जेपी मॉर्गन के रणनीतिकारों (जिसमें निकोलस पनिगिरत्जोग्लू भी शामिल हैं) ने अगस्त की शुरुआत में जारी एक नोट में तीन मुख्य चिंताएं जताईं:
JPMorgan का कहना है कि टेक-फोकस्ड हेज फंड्स ने अपने जोखिम को बहुत कम कर लिया है। ऐसे में, अब टेक्नोलॉजी सेक्टर को खरीदने का काम ज्यादातर रिटेल (खुदरा) निवेशकों को करना होगा। अब संस्थागत पूंजी की तुलना में आम निवेशकों की भूमिका ज्यादा अहम हो जाएगी।
जब बाजार में रिटेल निवेशकों का दबदबा बढ़ेगा, तो उतार-चढ़ाव भी बढ़ेगा। ETF, ऑप्शन्स और मार्जिन ट्रेडिंग के जरिए ये निवेशक तेजी से खरीद-बिक्री करते हैं, जिससे बाजार अस्थिर हो जाता है। जुलाई में ही लगभग आधे कारोबारी दिनों में चिप स्टॉक्स 4% से ज्यादा ऊपर या नीचे बंद हुए थे।
JPMorgan के विश्लेषण (पिवोटलपाथ के डेटा के हवाले से) में कहा गया है कि टेक-फोकस्ड हेज फंड्स को जो नुकसान हुआ है, वह उन्हें लंबे समय तक कमजोर बनाए रखेगा। इससे सेक्टर रिटेल-ड्रिवन बड़े उतार-चढ़ाव की चपेट में आ सकता है। बैंकों द्वारा कोलैटरल की मांग इस बात का सबूत है कि सिस्टम पर कितना दबाव है।
जुलाई की गिरावट के बाद अगस्त की शुरुआत में चिप स्टॉक्स में आंशिक सुधार हुआ है, लेकिन JPMorgan की चेतावनी इस रिकवरी पर भारी पड़ रही है। निवेशकों और फंड मैनेजर्स के लिए यह एक कड़ा सबक है कि भीड़ वाले मोमेंटम ट्रेड, खासकर अगर उनमें भारी उधारी (लीवरेज) शामिल हो, तो कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि टेक्नोलॉजी ट्रेड फिर से संस्थागत निवेशकों का भरोसा हासिल करता है या रिटेल निवेशकों के हाथों की कठपुतली बनकर ज्यादा अस्थिर हो जाता है। यह 2026 की दूसरी छमाही में इक्विटी बाजारों के लिए एक अहम सवाल होगा।