वजन घटाने वाली दवा वेगोवी बनाने वाली कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने दूसरी तिमाही (Q2) में 33.4 बिलियन डेनिश क्राउन (करीब 5.15 बिलियन डॉलर) का एडजस्टेड ऑपरेटिंग प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 11% अधिक और विश्लेषकों के अनुमान (28.74 बिलियन क्राउन) से काफी बेहतर रहा । कंपनी ने वर्ष 2026 के लिए अपने बिक्री और मुनाफे के अनुमान (आउटलुक) को भी बढ़ा दिया । वेगोवी पिल के अमेरिका में 50 लाख से अधिक प्रिस्क्रिप्शन जारी हो चुके हैं । इसके बावजूद, रॉयटर्स के मुताबिक, शेयर में सिर्फ मामूली बढ़त देखने को मिली क्योंकि निवेशक वेगोवी पिल की अकेली बिक्री वृद्धि से खास प्रभावित नहीं हुए ।
स्विट्जरलैंड की जेनेरिक दवा कंपनी सैंडोज़ ने भी शानदार प्रदर्शन किया। H1 2026 में उसकी शुद्ध बिक्री (नेट सेल्स) 5.8 बिलियन डॉलर रही, जो स्थिर विनिमय दरों पर 5% अधिक है। खास बात यह रही कि उसके बायोसिमिलर कारोबार (जो मूल दवाओं के सस्ते विकल्प होते हैं) में दूसरी तिमाही में 22% का उछाल आया और यह कंपनी की कुल आय का रिकॉर्ड 33% हो गया । कोर डाइल्यूटेड EPS 17% बढ़कर 1.71 डॉलर और कोर EBITDA मार्जिन 90 बेसिस पॉइंट (0.9%) सुधरकर 20.9% हो गया । इस दमदार प्रदर्शन से शेयर में एक दिन में 8% की तेजी आई और कारोबार के दौरान यह 23% तक चढ़ गया। कंपनी के प्रबंधन ने बायोसिमिलर के लिए इस समय को 'गोल्डन डिकेड' (सुनहरा दशक) बताया ।
जर्मनी की ऊर्जा कंपनी सीमेंस एनर्जी ने भी अपने इतिहास का सबसे शानदार तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया। Q3 में ऑर्डर 19% बढ़कर 17.9 बिलियन यूरो, राजस्व (रेवेन्यू) 19% बढ़कर 11.4 बिलियन यूरो और विशेष मदों से पहले मुनाफा तीन गुना बढ़कर 1.6 बिलियन यूरो (14.2% मार्जिन) हो गया । साथ ही, इसकी मुश्किल में फंसी पवन ऊर्जा इकाई सीमेंस गेम्सा ने कई वर्षों बाद लाभ कमाया । हालांकि, इतने शानदार नतीजों के बाद भी शेयर में मामूली गिरावट आई, क्योंकि निवेशकों ने कंपनी के निकट भविष्य के लिए नरम रुख पर ध्यान दिया ।
इस पूरे दौरान अमेरिकी शेयर बाजार (जैसे डॉव जोन्स) ने भी नए रिकॉर्ड बनाए, जिससे दुनिया भर के निवेशकों का जोखिम उठाने का उत्साह (रिस्क एपीटाइट) बढ़ा । इसका सीधा फायदा यूरोपीय बाजारों को भी मिला। वहीं, बॉन्ड यील्ड गिर रही थी, जो इस बात का संकेत था कि निवेशकों को ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है और महंगाई का डर कम हो रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीति और कंपनियों के शानदार नतीजों- इन तीनों ने मिलकर 'रिस्क-ऑन' का ऐसा माहौल बनाया, जिसने यूरोपीय और अमेरिकी दोनों शेयर बाजारों को ऊपर पहुंचाया और बॉन्ड यील्ड को नीचे ला दिया।