इस घटना को खास बनाने वाली बात सिर्फ इसकी अनुमानित तीव्रता नहीं है, बल्कि यह +1.4°C के वैश्विक तापमान वृद्धि की पृष्ठभूमि में विकसित हो रहा है । इसका मतलब है कि अल नीनो से जुड़ी गर्मी और चरम मौसम पैटर्न पहले से गर्म दुनिया पर और अधिक दबाव डालेंगे। अमेरिकी NOAA ने 2026 के अंत तक इसके 'बहुत मजबूत' या 'सुपर' अल नीनो में बदलने की 81% संभावना और 2027 की शुरुआत तक इन स्थितियों के बने रहने की 97% संभावना व्यक्त की है ।
अर्थशास्त्रियों ने एक गंभीर वैश्विक खाद्य मूल्य झटके की चेतावनी दी है जो 2028 तक जारी रह सकता है । सबसे अधिक प्रभावित होने वाली वस्तुओं में चावल, चीनी, कॉफी, कोको और पाम ऑयल शामिल हैं, ये सभी अल नीनो के शुष्क-क्षेत्र प्रभावों के प्रति संवेदनशील हैं । गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि इस अल नीनो की तीव्रता वैश्विक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 15.8% की वृद्धि कर सकती है ।
यूरोपीय आयोग (GIEWS) की अपडेट रिपोर्ट के अनुसार, उप-सहारा अफ्रीका, सुदूर पूर्व एशिया और मध्य अमेरिका में सूखे से और दक्षिण अमेरिका में बाढ़ से कृषि उत्पादन को गंभीर खतरा है । EU के संयुक्त अनुसंधान केंद्र (JRC) ने 2026-27 के अल नीनो के खाद्य प्रणाली जोखिमों का एक विशेष पूर्व-विश्लेषण प्रकाशित किया है । एफएओ ने उन क्षेत्रों का मानचित्रण किया है जहां अल नीनो से संबंधित सूखा फसलों को सबसे अधिक प्रभावित कर सकता है; जोखिम साहेल, दक्षिणी अफ्रीका, दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया और मध्य अमेरिका में सबसे अधिक है ।
उप-सहारा अफ्रीका, सुदूर पूर्व एशिया और मध्य अमेरिका के कुछ हिस्सों में शुष्क परिस्थितियां, जबकि दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में औसत से अधिक वर्षा का अनुमान है । लैटिन अमेरिका में, मध्य अमेरिका में सूखा और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में बाढ़ का खतरा है , जो मुख्य फसलों के उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। ACAPS के अनुसार, एशिया और प्रशांत (सूखा), कैरेबियन (सूखा), और मध्य/दक्षिण अमेरिका (मिश्रित सूखा/गीला) में वर्षा में विसंगतियां देखने को मिल सकती हैं ।
लैटिन अमेरिका में, अल नीनो मध्य अमेरिका के शुष्क गलियारे (ड्राई करिडोर) में सूखे की स्थिति पैदा कर सकता है, जिससे अधिक परिवार संकट में आ सकते हैं । FAO ने चेतावनी दी है कि ईंधन, उर्वरक और भोजन की ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतें स्थिति को और खराब कर सकती हैं ।
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने एक विशेष नीति पत्र प्रकाशित कर चेतावनी दी है कि 2026-2027 का अल नीनो लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के लिए एक बड़ा श्रम बाजार संकट बन सकता है, जो मौसम पर निर्भर क्षेत्रों में काम और आय को बाधित करेगा । ILO ने चेतावनी दी है कि लाखों नौकरियां खतरे में हैं, जिनमें सबसे अधिक असुरक्षित अनौपचारिक और निम्न-आय वाले श्रमिक होंगे ।
कृषि, मत्स्य पालन, ऊर्जा, परिवहन, रसद और पर्यटन ऐसे क्षेत्र हैं जहां बदलते वर्षा पैटर्न से नौकरियां, आय और काम करने की स्थिति सीधे प्रभावित होंगी । चूंकि ये उद्योग लाखों श्रमिकों को रोजगार देते हैं, इसलिए व्यवधान केवल चरम मौसम से सीधे प्रभावित क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहेगा । ILO का कहना है कि अल नीनो के श्रम बाजार प्रभाव तय नहीं हैं, बल्कि तैयारी के उपायों की मजबूती पर निर्भर करेंगे ।
विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने चेतावनी दी है कि अल नीनो वैश्विक बाजारों के लिए एक प्रणालीगत झटका है, जहां शिपिंग उद्योग के विश्लेषकों ने 2027 तक एशियाई कोयले की मांग और कृषि व्यापार प्रवाह में संभावित व्यवधानों की आशंका जताई है । WEF ने कहा कि अल नीनो को सिर्फ एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि एक बड़ा जोखिम माना जाना चाहिए, क्योंकि यह पहले से ही कमजोर खाद्य प्रणालियों, नाजुक सार्वजनिक वित्त, तनावग्रस्त ऊर्जा बाजारों और बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे ग्रह पर प्रहार करेगा ।
यूरोपीय आयोग (GIEWS) की अपडेट रिपोर्ट अल नीनो जोखिमों को मध्य पूर्व संघर्ष से चल रहे शिपिंग व्यवधानों से जोड़ती है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव और बढ़ जाएगा । एलियांज ने कहा है कि व्यापार प्रवाह में व्यवधान एक साथ कई वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करेगा , और पनामा नहर, जो पिछले सूखे से पहले ही दबाव में है, को बदलते वर्षा पैटर्न के कारण नए सिरे से दबाव का सामना करना पड़ेगा। कैरेबियन क्षेत्र में मध्य पूर्व संकट और अल नीनो का संयुक्त प्रभाव खाद्य सुरक्षा के लिए एक विशेष खतरा पैदा करता है, क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही खाद्य आयात पर बहुत अधिक निर्भर है और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है ।