नासा के न्यू होराइजन्स मिशन के 2015 के फ्लाईबाई डेटा के नए विश्लेषण से प्लूटो की सतह पर तरल नाइट्रोजन के मौजूद होने का पहला प्रत्यक्ष प्रमाण मिला है [1]। एलन स्टर्न की टीम के शोध के अनुसार, स्पुतनिक प्लैनिशिया के उत्तरी किनारे पर दिखने वाली काली धारियाँ तरल नाइट्रोजन के सतह तक पहुँचने और फिर जमने के संकेत हैं [5]। ए...

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नासा के न्यू होराइजन्स (New Horizons) मिशन ने अपने 2015 के ऐतिहासिक फ्लाईबाई के आंकड़ों के नए विश्लेषण से प्लूटो की सतह पर तरल नाइट्रोजन (Liquid Nitrogen) के मौजूद होने का पहला प्रत्यक्ष प्रमाण खोजा है । यह खोज बताती है कि प्लूटो का 'दिल' कहा जाने वाला स्पुतनिक प्लैनिशिया (Sputnik Planitia) आज भी भूगर्भीय रूप से सक्रिय है और यहाँ नाइट्रोजन ठोस बर्फ से सीधे तरल में बदलकर सतह तक आता है
। इसके साथ ही, एक अलग अध्ययन ने पुष्टि की है कि प्लूटो का वायुमंडल सिकुड़ना शुरू हो गया है, जो इस बौने ग्रह (Dwarf Planet) पर बदलते मौसमी चक्र का संकेत है
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न्यू होराइजन्स द्वारा 2015 में ली गई तस्वीरों के नए विश्लेषण में पाया गया है कि स्पुतनिक प्लैनिशिया के उत्तरी किनारे पर मौजूद दरारों से होकर तरल नाइट्रोजन प्लूटो की सतह पर आ रहा है । यह पहली बार है जब वैज्ञानिकों को इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण मिले हैं कि प्लूटो पर सिर्फ ठोस नाइट्रोजन बर्फ ही नहीं, बल्कि हाल के भूगर्भीय समय में तरल नाइट्रोजन भी मौजूद रहा है
। ये दरारें नलिकाओं की तरह काम करती हैं, जिनके माध्यम से गहरी नाइट्रोजन बर्फ की चादर का पिघला हुआ आधार (Basal Melt) ऊपर की ओर बढ़ता है और सतह पर आकर जमने से पहले छोटे-छोटे गड्ढों में जमा हो जाता है
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एलन स्टर्न (S. Alan Stern) और उनकी टीम ने 25 जून 2026 को arXiv पर प्रकाशित एक शोध पत्र में स्पुतनिक प्लैनिशिया के उत्तरी भाग में दिखने वाली काली धारियों (Dark Streaks) का विश्लेषण किया । उनके निष्कर्ष बताते हैं कि:
सीधे शब्दों में कहें तो, ये काली धारियाँ सिर्फ संवहन की सीमाएँ नहीं हैं, बल्कि प्लूटो के अंदरूनी हिस्से में मौजूद तरल नाइट्रोजन प्रणाली की सतही अभिव्यक्ति हैं जो ग्लेशियर को सक्रिय रूप से पोषित कर रही है ।
एक अलग और महत्वपूर्ण खोज में, अमांडा सिकाफूज (Amanda Sickafoose) के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया कि प्लूटो का वायुमंडल सिकुड़ना शुरू हो गया है । 2017 और 2023 के बीच 10 तारकीय ग्रहणों (Stellar Occultations) का विश्लेषण करने के बाद उन्होंने पाया कि:
यह 1988 में प्लूटो के वायुमंडल की खोज के बाद से पहली मापी गई गिरावट है । यह लंबे समय से की गई भविष्यवाणी की पुष्टि करता है कि जैसे-जैसे प्लूटो अपनी 248-वर्षीय कक्षा में सूर्य से दूर जा रहा है, उसका वायुमंडल जम कर सतह पर गिर रहा है
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ये दोनों खोजें प्लूटो की एक नई तस्वीर पेश करती हैं। एक तरफ, आंतरिक ताप (Internal Heat) के कारण सतह पर तरल नाइट्रोजन बह रहा है, जो इसे भूगर्भीय रूप से सक्रिय बनाता है, वहीं दूसरी ओर, सूर्य से दूरी के कारण इसका वायुमंडल सिकुड़ रहा है।
यह बताता है कि प्लूटो कोई मृत बर्फीला अवशेष नहीं है, बल्कि एक संक्रमणकालीन संसार (Transitioning World) है । संभवतः, वायुमंडल से जमने वाली नाइट्रोजन सतह पर जमा होकर बर्फ की चादर को रिचार्ज करती है, जो फिर पिघलकर फिर से सतह पर आती है। यह एक क्रायोजेनिक अस्थिर चक्र (Cryogenic Volatile Cycle) है जो प्लूटो के आंतरिक भाग, सतह और वायुमंडल को आपस में जोड़ता है
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नासा के न्यू होराइजन्स मिशन के 2015 के फ्लाईबाई डेटा के नए विश्लेषण से प्लूटो की सतह पर तरल नाइट्रोजन के मौजूद होने का पहला प्रत्यक्ष प्रमाण मिला है [1]।
नासा के न्यू होराइजन्स मिशन के 2015 के फ्लाईबाई डेटा के नए विश्लेषण से प्लूटो की सतह पर तरल नाइट्रोजन के मौजूद होने का पहला प्रत्यक्ष प्रमाण मिला है [1]। एलन स्टर्न की टीम के शोध के अनुसार, स्पुतनिक प्लैनिशिया के उत्तरी किनारे पर दिखने वाली काली धारियाँ तरल नाइट्रोजन के सतह तक पहुँचने और फिर जमने के संकेत हैं [5]।
एक अन्य अध्ययन में पाया गया है कि प्लूटो का वायुमंडलीय दबाव 2021 के बाद से 16% तक गिर गया है, जो सूर्य से दूर जाने के कारण वायुमंडल के सिकुड़ने की भविष्यवाणी की पुष्टि करता है [9]।