होर्मुज जलडमरूमध्य (फारस की खाड़ी): ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़राइल का हवाई युद्ध 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुआ। ईरान ने 4 मार्च को जलडमरूमध्य को "बंद" घोषित करके जवाबी कार्रवाई की, ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलों और छोटी हमलावर नावों से वाणिज्यिक जहाजों, तेल टैंकरों और नौसैनिक ठिकानों पर हमला किया । इस महत्वपूर्ण मार्ग से टैंकरों का आवागमन, जो सामान्य रूप से दुनिया के लगभग 20% तेल का परिवहन करता है, लगभग ठप हो गया है ।
खाड़ी देशों का बुनियादी ढांचा: ईरान ने अपनी सीमाओं से बाहर हमले तेज करते हुए सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कतर और कुवैत में रिफाइनरियों, तेल टर्मिनलों और गैस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है । रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र की 30-40% रिफाइनिंग क्षमता क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुकी है ।
रूस-यूक्रेन मोर्चा: यूक्रेन रूसी तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं पर हमलों की "अटूट गति" बनाए हुए है। अकेले जुलाई 2026 में, रूस की बड़ी रिफाइनरियों, तेल टैंकरों और पाइपलाइन बुनियादी ढांचे पर कम से कम 30 बार हमले हुए, जिससे रूसी आपूर्ति को लेकर वैश्विक अनिश्चितता और गहरी हो गई है ।
अमेरिका-ईरान के बीच सीधी झड़पें: होर्मुज जलडमरूमध्य पर लड़ाई जुलाई के मध्य तक जारी रही, जिसमें अमेरिका ने ईरानी कमांड सेंटरों और वायु रक्षा ठिकानों पर हमला किया, जबकि ईरान ने समुद्री यातायात को धमकी देना जारी रखा ।
यह संकट सिर्फ कच्चे तेल की आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तेजी से रिफाइंड ईंधन (पेट्रोल, डीज़ल) का संकट बनता जा रहा है।
आपूर्ति के आंकड़े बेहद गंभीर हैं, जैसा कि नीचे दी गई तालिका में संक्षेप में दिखाया गया है।
| मीट्रिक | अनुमान | स्रोत |
|---|---|---|
| वैश्विक आपूर्ति में गिरावट (मार्च 2026 में चरम) | ~8 मिलियन बैरल प्रतिदिन (वैश्विक मांग का 8%) | IEA |
| पूरे 2026 में अपेक्षित उत्पादन में गिरावट | ~3.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन | IEA |
| खाड़ी उत्पादकों की कुल आपूर्ति हानि | संचयी रूप से 1 बिलियन बैरल से अधिक | IEA |
| स्थायी क्षमता हानि (ANZ अनुमान) | 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक | विश्लेषक |
| होर्मुज बंद होने से समुद्री तेल प्रवाह में कटौती | ~15% की कमी | यूरोपीय आयोग |
| होर्मुज बंद होने से LNG प्रवाह में कटौती | ~20% की कमी | यूरोपीय आयोग |
| वैश्विक बाजार को हुआ कुल नुकसान (अगस्त 2026, अरामको अनुमान) | कुल 2.6 बिलियन बैरल | अरामको |
एशिया इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है, क्योंकि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आने वाले मध्य पूर्वी कच्चे तेल के आयात पर भारी निर्भर है ।
यह ऊर्जा झटका वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर रहा है और मंदी की आशंका को बढ़ा रहा है।
यह आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति संकट है, जो व्यवधान की मात्रा के लिहाज से सबसे गंभीर है। मध्य पूर्व युद्ध ने अकेले अपने चरम पर लगभग 8 मिलियन बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति को समाप्त कर दिया, और रूसी रिफाइनरियों के खिलाफ यूक्रेन के अभियान ने आपूर्ति विनाश का एक दूसरा आयाम जोड़ दिया है। एशिया आर्थिक क्षति का सबसे बड़ा बोझ उठा रहा है, और अगर संघर्ष 2027 तक जारी रहता है, तो आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए मंदी का जोखिम वास्तविक है। बड़े पैमाने पर आपूर्ति के नुकसान के साथ मामूली मूल्य वृद्धि की असामान्य गतिशीलता पारंपरिक मंदी के संकेत को जटिल बनाती है, लेकिन यह मात्रा की कमी खुद पहले से ही एशिया और यूरोप में औद्योगिक गतिविधि पर भारी पड़ रही है।