इन हमलों में इस्कंदर-एम, उत्तर कोरिया निर्मित KN-23, जिरकॉन और एस-300/एस-400 प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया। इनमें से कुछ प्रणालियों को जमीन पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया गया .
18–19 जुलाई की रात अकेले यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार रूस ने 42 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें 10 जिरकॉन, 25 इस्कंदर-एम/KN-23 और सात एस-300/एस-400 मिसाइलें शामिल थीं .
29–30 जुलाई की रात रूस ने 284 शहीद/गेरेबेरा ड्रोन के साथ क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइलों की एक बड़ी संयुक्त लहर भेजी। यह युद्ध की एक रात में ड्रोन हमलों की सबसे बड़ी लहर थी .
पैट्रियट एक अमेरिकी लंबी दूरी की एयर-डिफेंस प्रणाली है। इसकी PAC-2 और PAC-3 इंटरसेप्टर मिसाइलें उन बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने वाली यूक्रेन की सबसे प्रभावी प्रणालियों में हैं, जिन्हें अन्य एयर-डिफेंस हथियारों से रोकना बेहद कठिन होता है।
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार PAC-3 इंटरसेप्टर का भंडार जून के अंत तक बेहद कम हो चुका था और 1 जुलाई तक प्रभावी रूप से खत्म हो गया . इसके तुरंत बाद हुए 1–2 जुलाई और 5–6 जुलाई के बड़े हमलों में यूक्रेन एक भी बैलिस्टिक मिसाइल नहीं रोक सका। केवल इन दो हमलों में दागी गई 53 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 49 अपने लक्ष्यों तक पहुंचीं—रूस के लिए 92% से अधिक की सफलता दर .
6 जुलाई के हमले में कीव की ओर दागी गई 23 इस्कंदर-एम मिसाइलों और छह जिरकॉन/ओनिक्स मिसाइलों में से कोई भी इंटरसेप्ट नहीं की जा सकी .
पूरे जुलाई के आंकड़ों के अनुसार यूक्रेन ने 126 बैलिस्टिक मिसाइलों में से केवल लगभग 36 को रोका। यानी रोकथाम दर करीब 29% रही और हर चार में से लगभग तीन मिसाइलें सुरक्षा कवच को पार कर गईं . महीने के अंत तक बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता “लगभग खत्म” हो गई थी .
यह कमजोरी सभी हवाई लक्ष्यों के खिलाफ नहीं थी। यूक्रेन ने ड्रोन के खिलाफ लगभग 90% और क्रूज़ मिसाइलों के खिलाफ करीब 69–89% तक रोकथाम दर बनाए रखी, क्योंकि ये लक्ष्य बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में अपेक्षाकृत आसान होते हैं .
बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों का सबसे गंभीर असर शहरों और आम नागरिकों पर पड़ा:
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2026 की पहली छमाही में यूक्रेन में नागरिक हताहतों की संख्या 2025 की समान अवधि की तुलना में 37% बढ़ी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निगरानी मिशन ने कहा कि लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन “फ्रंट लाइन से दूर घनी आबादी वाले शहरी इलाकों” को प्रभावित कर रहे हैं .
पैट्रियट इंटरसेप्टर की कमी के बीच यूक्रेन ने घरेलू उत्पादन की अनुमति हासिल करने की कोशिश तेज की। 8 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका यूक्रेन को पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें बनाने का लाइसेंस देगा .
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने 9 जुलाई को कहा कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक स्तर पर सहमति बन गई है . हालांकि, इसका तत्काल असर नहीं पड़ना था। विशेषज्ञों का अनुमान था कि समझौता कायम रहने पर भी घरेलू उत्पादन शुरू होने में कम से कम एक साल लग सकता है .
31 जुलाई को स्थिति बदल गई। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइलें बनाने की अनुमति देने पर सहमति नहीं दी है और इस तकनीक को साझा करने में “बहुत सावधान” रहना होगा . इस बयान ने यूक्रेन की सबसे जरूरी एयर-डिफेंस जरूरतों में से एक पर नई अनिश्चितता पैदा कर दी।
जुलाई भर रूस ने हमलों की रफ्तार बनाए रखी और उस खाई का फायदा उठाया, जो बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर की कमी से यूक्रेन की सुरक्षा में बनी थी . रूसी हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों को प्राथमिकता देना इस रणनीति का अहम हिस्सा रहा, क्योंकि यूक्रेन के पास उन्हें रोकने के लिए सीमित विकल्प बचे थे।
दूसरी ओर, यूक्रेन ने रूस के पीछे स्थित सैन्य और लॉजिस्टिक ठिकानों के खिलाफ अपनी लंबी दूरी की ड्रोन मुहिम जारी रखी। यूक्रेनी मोबाइल फायर ग्रुप और लड़ाकू विमानों ने शहीद ड्रोन से निपटने की रणनीति भी बदली। 30 जुलाई को ड्रोन के खिलाफ यूक्रेन ने 93% रोकथाम दर दर्ज की .
फिर भी मूल असंतुलन बना रहा: रूस की मिसाइल और ड्रोन उत्पादन क्षमता, यूक्रेन तथा उसके सहयोगियों की इंटरसेप्टर मिसाइलों की आपूर्ति से आगे निकलती रही . जुलाई के हमलों ने दिखाया कि यूक्रेन की हवाई सुरक्षा केवल प्रणालियों की संख्या पर नहीं, बल्कि उन्हें लगातार चलाने के लिए जरूरी इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता पर निर्भर है।