लेकिन इस घोषणा के तुरंत बाद जमीन पर तस्वीर बदल गई। इजरायल ने गाजा के कई हिस्सों में लगातार हवाई हमले किए और 1 अगस्त को कम-से-कम 18 फिलिस्तीनी मारे गए । इजरायल के ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने साफ कहा कि ट्रंप की घोषणा के बावजूद हमले रोकने का “कोई समझौता नहीं” हुआ है ।
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि हमास के निरस्त्रीकरण और उसकी सुरंगों के नष्ट होने तक इजरायली सैनिक गाजा में बने रहेंगे। उनके अनुसार, इजरायल के नियंत्रण वाला क्षेत्र अब गाजा के 60% से 70% तक फैल गया है । इजरायली सेना का कहना है कि हमलों का निशाना हमास के सदस्य थे। वहीं, फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने चिकित्सा आपूर्ति के गोदामों और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी ।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ के गाजा मामलों के दूत निकोलाय म्लादेनोव 2 अगस्त को शांति योजना के दूसरे चरण को लागू करने पर बातचीत के लिए इजरायल पहुंचे । उन्होंने 3 अगस्त को नेतन्याहू से मुलाकात की। बोर्ड के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच बातचीत “रचनात्मक और विस्तृत” रही और म्लादेनोव ने गाजा में हमले रोकने की अपील की ।
इसके अगले दिन मिस्र, कतर और तुर्किये—तीनों मध्यस्थ देशों—ने इजरायल के ताजा हमलों की “कड़ी निंदा” की। उन्होंने कहा कि ये हमले शांति योजना को लागू करने के लिए तैयार किए गए रोडमैप को कमजोर कर रहे हैं । मध्यस्थों ने विशेष रूप से स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा ढांचे को निशाना बनाए जाने को अंतरराष्ट्रीय कानून का “खुला उल्लंघन” बताया ।
हालांकि, मध्यस्थों को इजरायल के आगामी चुनाव से पहले किसी निर्णायक सफलता की संभावना कम दिख रही है । कुछ विश्लेषकों ने हिंसा रोकने में विफल रहने के कारण ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को “विफल संस्था” तक कहा है ।
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 2 अगस्त 2026 तक 7 अक्टूबर 2023 से जारी संघर्ष में 73,356 फिलिस्तीनी मारे जा चुके थे और 1,74,185 लोग घायल हुए थे । अक्टूबर 2025 में युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद भी कम-से-कम 1,230 फिलिस्तीनी मारे गए हैं ।
4 अगस्त के एक अपडेट में मृतकों की संख्या बढ़कर 73,377 बताई गई । ब्रिटेन सरकार के जून 2026 के देश-विशेष बुलेटिन ने भी 70,000 से अधिक फिलिस्तीनी मौतों की पुष्टि की थी। रिपोर्ट के अनुसार, गाजा की अधिकांश आबादी विस्थापित है और लोग गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं ।
फरवरी 2026 में द लांसेट में प्रकाशित एक सहकर्मी-समीक्षित अध्ययन ने अनुमान लगाया कि संघर्ष के शुरुआती 16 महीनों में ही 75,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इससे संकेत मिलता है कि स्थानीय आधिकारिक आंकड़ा वास्तविक नुकसान से कम हो सकता है ।
इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय चुनाव होंगे। यह 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव होगा । चुनाव की तारीख हमलों की बरसी के बेहद करीब है, इसलिए इसका राजनीतिक असर भी संवेदनशील माना जा रहा है ।
नेतन्याहू को 7 अक्टूबर 2023 की सुरक्षा विफलताओं को लेकर मतदाताओं के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। उनकी सत्ता में वापसी की संभावनाएं “लगातार कमजोर” बताई जा रही हैं । चुनाव से पहले उनकी गठबंधन सरकार संसद के अंतिम दिनों में विवादित कानूनों को तेजी से आगे बढ़ा रही है, जिन्हें राजनीतिक समर्थन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है ।
गाजा के अलावा नेतन्याहू पर ईरान के साथ अधूरे युद्ध, हमास और हिजबुल्लाह को निर्णायक रूप से हराने में विफलता तथा अमेरिका के साथ बिगड़ते संबंधों का दबाव भी है। ईरान शांति समझौते को लेकर ट्रंप ने नेतन्याहू पर सार्वजनिक रूप से “अवज्ञा” का आरोप लगाया है ।
विपक्षी दलों ने अब तक नेतन्याहू के साथ गठबंधन सरकार बनाने से इनकार किया है। उनका कहना है कि युद्ध से निपटने के तरीके और सुरक्षा विफलताओं के लिए नेतन्याहू को जिम्मेदारी लेनी चाहिए । ऐसे में 27 अक्टूबर का चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक दौर पर जनमत-संग्रह भी बनता जा रहा है।