लेकिन घोषणा के 72 घंटे के भीतर ही यह योजना विरोध के तूफान में घिर गई। 31 जुलाई को इन्फैंटिनो ने इसे वापस ले लिया। इस तेज़ी से हुई वापसी ने FIFA में उनके कार्यकाल का अब तक का सबसे गंभीर संकट खड़ा कर दिया और 2027 के पुनर्निर्वाचन की उनकी संभावनाओं को भी झटका दिया ।
FFE का उद्देश्य FIFA के मीडिया अधिकार, प्रायोजन, टिकटिंग, हॉस्पिटैलिटी और लाइसेंसिंग जैसे बड़े व्यावसायिक कामों को एक अलग इकाई में समेटना था। यह मॉडल कुछ हद तक फॉर्मूला वन की व्यावसायिक संरचना से प्रेरित था ।
निवेशकों के समूह का नेतृत्व जोशुआ कुशनर की Thrive Eternal करने वाली थी। कुशनर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति प्रशासन के वरिष्ठ सलाहकार रहे जेरेड कुशनर के भाई हैं । FIFA का कहना था कि निजी निवेश से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल दुनिया भर में फुटबॉल विकास कार्यक्रमों के लिए किया जाएगा। संगठन ने यह भी कहा था कि खेल से जुड़े नियामकीय, प्रशासनिक और प्रतियोगिता संबंधी अंतिम अधिकार FIFA के पास ही रहेंगे ।
हालांकि, इस योजना को FIFA की 211 सदस्यीय राष्ट्रीय फुटबॉल संस्थाओं से मंजूरी मिलनी थी, लेकिन मामला मतदान तक पहुंचने से पहले ही ठंडे बस्ते में चला गया ।
यूरोपीय फुटबॉल की नियंत्रक संस्था UEFA ने योजना को यह कहते हुए खारिज किया कि यह FIFA की “बेचने की चीज़ नहीं” है। UEFA ने इसे “घटिया, बंद कमरे में तैयार किया गया सौदा” बताया और धमकी दी कि अगर योजना आगे बढ़ी तो उसके 55 सदस्य देश FIFA प्रतियोगिताओं का बहिष्कार करेंगे ।
यह प्रतिक्रिया इसलिए भी अहम थी क्योंकि UEFA के सदस्य देशों में फुटबॉल की कई सबसे प्रभावशाली राष्ट्रीय टीमें और लीग शामिल हैं। बहिष्कार की धमकी से FIFA प्रतियोगिताओं की विश्वसनीयता और व्यावसायिक मूल्य दोनों पर तत्काल सवाल उठने लगे।
FIFA के छह महाद्वीपीय महासंघों में से तीन—UEFA, उत्तर एवं मध्य अमेरिका तथा कैरेबियाई क्षेत्र का CONCACAF और एशिया का AFC—ने योजना का औपचारिक विरोध किया ।
CONCACAF ने इसे “गंभीर शासन संबंधी विफलता” बताया और FIFA के नेतृत्व तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा की मांग की ।
विरोध केवल बाहरी संगठनों तक सीमित नहीं रहा। इन्फैंटिनो के वरिष्ठ सलाहकार कार्लोस कॉर्डेइरो ने योजना को लेकर इस्तीफा दे दिया। FIFA के मुख्य परिचालन अधिकारी केविन लामोर ने FFE को “एक व्यक्ति की परियोजना” बताया। इससे संकेत मिला कि योजना को संगठन के भीतर पर्याप्त रूप से साझा या चर्चा नहीं किया गया था ।
आलोचकों का तर्क था कि वर्ल्ड कप और FIFA की अन्य प्रतियोगिताओं से जुड़े व्यावसायिक अधिकार वैश्विक फुटबॉल की सबसे मूल्यवान संपत्तियों में हैं। इनमें निजी इक्विटी निवेशकों को हिस्सेदारी देना खेल के प्रशासनिक अधिकारों के अपारदर्शी और अनुचित निजीकरण जैसा हो सकता है ।
विशेष रूप से कुशनर परिवार से जुड़े निवेशक की भूमिका ने राजनीतिक और हितों के टकराव से जुड़े सवालों को और हवा दी। ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम और ला लीगा अध्यक्ष जेवियर तेबास ने इन्फैंटिनो से इस्तीफा देने की मांग की ।
31 जुलाई को FIFA ने घोषणा की कि FFE परियोजना आगे नहीं बढ़ेगी। इन्फैंटिनो ने कहा कि सभी पक्षों की राय सुनने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि योजना ने ऐसे मतभेद पैदा कर दिए हैं, जो समर्थन के किसी भी स्तर के बावजूद FIFA के उद्देश्यों के अनुरूप नहीं रह गए हैं ।
यह फैसला योजना की औपचारिक मंजूरी से पहले ही लिया गया। यानी विरोध इतना व्यापक था कि FIFA को सदस्य संस्थाओं के अंतिम मतदान का इंतजार भी नहीं करना पड़ा ।
योजना वापस लेने के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ। UEFA ने कहा कि उसे इन्फैंटिनो और FIFA के मौजूदा नेतृत्व पर “भरोसा नहीं रहा”। संगठन ने यह भी कहा कि उनके भविष्य को लेकर “कोई भी विकल्प खुला” रहना चाहिए । UEFA इस बात पर कानूनी कार्रवाई पर भी विचार कर रहा है कि FFE प्रस्ताव को किस तरह आगे बढ़ाया गया ।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री और स्पेनिश लीग अध्यक्ष समेत कई प्रमुख हस्तियों ने इन्फैंटिनो के इस्तीफे की मांग की है । FIFA के भीतर उनके विरोधियों के भी उन्हें पद छोड़ने के लिए दबाव बढ़ाने की उम्मीद है ।
इन्फैंटिनो से 2027 के वसंत में होने वाली FIFA कांग्रेस में पुनर्निर्वाचन की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन FFE प्रकरण ने उनकी विश्वसनीयता और राजनीतिक पकड़ को गंभीर नुकसान पहुंचाया है । विश्लेषकों और रिपोर्टों में उनके प्रभाव के इतनी तेजी से कमजोर पड़ने को “असाधारण” बताया गया है ।
CONCACAF समेत कई संस्थाएं अब केवल FFE योजना की समीक्षा नहीं, बल्कि FIFA के नेतृत्व और निर्णय लेने की पूरी प्रक्रिया की व्यापक जांच चाहती हैं । विवाद का मुख्य सवाल यह है कि क्या FIFA जैसे वैश्विक खेल संगठन में इतने बड़े व्यावसायिक फैसले सीमित लोगों के बीच, तेज़ी से और कम पारदर्शिता के साथ लिए जा सकते हैं।
इस पूरे मामले ने इन्फैंटिनो के फैसले और संभावित हितों के टकराव पर भी सवाल खड़े किए हैं। Sunday Times को एक सूत्र ने बताया कि इस सौदे से इन्फैंटिनो व्यक्तिगत रूप से “दसियों लाख” कमा सकते थे । यह दावा सार्वजनिक बहस में उनके निजी हितों को लेकर संदेह बढ़ाने वाला साबित हुआ है, हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में इसे सूत्र का आरोप बताया गया है।
अगस्त 2026 की शुरुआत तक इन्फैंटिनो FIFA अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं, लेकिन उनकी स्थिति पहले की तुलना में बेहद कमजोर मानी जा रही है । UEFA और अन्य प्रमुख फुटबॉल संस्थाएं उनके अधिकार सीमित करने या उन्हें पद से हटाने के विकल्पों पर विचार कर रही हैं।
FFE योजना का रद्द होना केवल एक निवेश प्रस्ताव की विफलता नहीं है। इसने यह भी दिखाया है कि FIFA अध्यक्ष की शक्ति की सीमाएं हैं—खासकर तब, जब यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका के प्रभावशाली फुटबॉल निकाय एक साथ विरोध में खड़े हो जाएं। अब इन्फैंटिनो के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई व्यावसायिक योजना बनाना नहीं, बल्कि FIFA के भीतर भरोसा दोबारा कायम करना है।