इसी दौरान ईंधन खरीद पर लगी वे सीमाएं भी अस्थायी रूप से हटा दी गईं, जो क्षेत्र में चल रहे ईंधन संकट के दौरान लागू थीं । अगले दिन पुतिन ने क्रास्नोयार्स्क का दौरा किया। लेकिन उनके जाने के बाद 4 अगस्त को कीमतें तेजी से पुराने स्तर पर लौट आईं—एआई-95 फिर 91 रूबल प्रति लीटर हो गया ।
स्थानीय अधिकारियों और KNP ने कीमतों में कमी को एक “प्रचारात्मक कार्यक्रम” और लॉजिस्टिक्स में “अस्थायी सुधार” का नतीजा बताया । कंपनी के अनुसार, अतिरिक्त ईंधन आपूर्ति आने से कीमत घटाना संभव हुआ। स्थानीय रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि कुछ पेट्रोलियम उत्पाद पड़ोसी क्षेत्रों से तत्काल लाए गए थे ।
फिर भी, कीमतों में गिरावट का समय और पुतिन के दौरे के तुरंत बाद उनका वापस बढ़ जाना इसे सामान्य बाजार-आधारित बदलाव से अलग बनाता है। घटनाक्रम ने रूस में उस व्यवस्था की आलोचना को जन्म दिया जिसमें नेतृत्व के दौरे के दौरान किसी क्षेत्र की परेशानियों को अस्थायी रूप से छिपाने के लिए कीमतें, कतारें और बिक्री सीमाएं बदली जाती हैं। इसी संदर्भ में इसे व्यंग्यात्मक रूप से “पोटेमकिन गैस प्राइस” कहा जा रहा है—ऐसी सजावटी तस्वीर, जो कैमरों के सामने सामान्य स्थिति दिखाए, जबकि जमीनी संकट बना रहे।
यह पहली ऐसी घटना नहीं थी। 24 जुलाई 2025 को पुतिन के इरकुत्स्क दौरे के दौरान स्थानीय क्रायस्नेफ्ट यानी बीआरके स्टेशनों पर ईंधन की कीमतें करीब 12–13 रूबल प्रति लीटर घट गई थीं । उस समय भी खरीद सीमाएं हटा दी गई थीं ।
दोनों घटनाओं में कुछ समानताएं दिखीं:
इस दोहराव के कारण क्रास्नोयार्स्क की घटना को केवल एक सामान्य छूट या कारोबारी प्रचार अभियान मानना कठिन हो जाता है।
क्रास्नोयार्स्क में एक दिन की सस्ती कीमतें रूस की व्यापक समस्या का केवल दिखाई देने वाला हिस्सा हैं। दुनिया के बड़े तेल उत्पादकों में शामिल रूस अपने ही घरेलू पेट्रोल पंपों को पर्याप्त ईंधन उपलब्ध कराने में कठिनाई झेल रहा है।
2025 के मध्य से यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों ने रूस की कई तेल रिफाइनरियों के संचालन को प्रभावित किया। अगस्त 2025 तक रूस की निष्क्रिय रिफाइनिंग क्षमता रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी । बाद में 6 जुलाई 2026 को ओम्स्क रिफाइनरी पर हमला हुआ—यह उन प्रमुख संयंत्रों में आखिरी था, जिसे पहले बड़े हमलों का सामना नहीं करना पड़ा था ।
रॉयटर्स के आकलन के अनुसार, अगस्त से अक्टूबर 2025 के दौरान ड्रोन हमलों और निर्धारित रखरखाव के संयुक्त प्रभाव से रूस की रिफाइनिंग क्षमता में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई ।
जून 2026 तक रूस की तेल रिफाइनिंग मात्रा साल-दर-साल लगभग 25 प्रतिशत गिरकर 3.91 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गई। यह दो दशकों से अधिक समय का सबसे निचला स्तर बताया गया । पेट्रोल उत्पादन मौसमी मांग के केवल करीब 65 प्रतिशत तक रह गया । इसके बाद मॉस्को ने पेट्रोल, जेट ईंधन और डीजल के निर्यात पर रोक लगा दी ।
मध्य-2026 तक रूस के 83 में से 56 क्षेत्रों में ईंधन खरीद पर किसी न किसी तरह की पाबंदी दर्ज की गई। इनमें 18 क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन ने सभी पेट्रोल पंपों पर बाध्यकारी सीमाएं लागू की थीं । आम तौर पर एक वाहन को करीब 30 लीटर तक ईंधन देने और कनस्तरों में बिक्री रोकने जैसे नियम लगाए गए।
मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे बड़े शहर भी इससे अछूते नहीं रहे। तातनेफ्ट के स्टेशनों पर पेट्रोल की सीमा 20 लीटर प्रति वाहन तक रखी गई, जबकि गजप्रोमनेफ्ट के स्टेशनों पर 30–50 लीटर तक की सीमाएं लागू हुईं । कुछ क्षेत्रों में नंबर प्लेट के आखिरी या शुरुआती अंक के आधार पर अलग-अलग दिनों में पेट्रोल देने का प्रस्ताव भी सामने आया ।
क्रास्नोयार्स्क में कीमतों का यह उतार-चढ़ाव बताता है कि किसी वीआईपी दौरे के लिए ईंधन संकट की तस्वीर को कुछ घंटों या एक दिन के लिए बदला जा सकता है, लेकिन रिफाइनरियों की क्षतिग्रस्त क्षमता, घटते उत्पादन और कमजोर आपूर्ति व्यवस्था की समस्या इससे हल नहीं होती।
एक प्रमुख तेल उत्पादक देश का अपने ही नागरिकों के लिए पेट्रोल उपलब्ध कराने में संघर्ष और फिर राष्ट्रपति के दौरे के दौरान अस्थायी रूप से सस्ती कीमतें दिखाना—रूस के गहराते ईंधन संकट का यही सबसे प्रतीकात्मक दृश्य बन गया है।