उसका बच्चा मौत के समय केवल दो सप्ताह का था । इस घटना को ऑस्ट्रेलियाई गैर-लाभकारी संस्था जिओग्राफ मरीन रिसर्च ने ड्रोन कैमरे से रिकॉर्ड किया। यह संस्था पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तटवर्ती इलाकों में डॉल्फिन समूहों की निगरानी और संरक्षण पर काम करती है ।
शोधकर्ताओं ने बताया कि इस बच्चे से पहले भी फ्रैगल की चार संतानें मर चुकी थीं। यानी यह उसकी पांचवीं संतान थी जिसे उसने खोया—और हाल के समय में यह उसका दूसरा नुकसान था । बच्चे की मौत से पहले उसमें तेज सांस लेने की दर देखी गई थी, जिससे उसके बचने की संभावना कम लग रही थी ।
फुटेज में फ्रैगल बार-बार बच्चे को पानी की सतह के पास उठाती और आगे ले जाती दिखाई दी। यह व्यवहार देखने वालों के लिए भावनात्मक रूप से बेहद प्रभावशाली था, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए इससे भी अधिक महत्वपूर्ण था कि वह अकेली नहीं थी।
फ्रैगल का पूरा 14 सदस्यीय समूह छह दिनों तक उसके आसपास तैरता रहा और कई बार उसके साथ-साथ चलता दिखाई दिया । शोधकर्ताओं ने इसे मजबूत सामाजिक संबंधों और मृत्यु के प्रति समूह की सामूहिक प्रतिक्रिया का संकेत बताया ।
सीटेशियन—यानी डॉल्फिन, व्हेल और ऑर्का जैसे समुद्री स्तनधारियों—में मृत साथी के पास बने रहना पहले भी दर्ज किया गया है। कई मामलों में अन्य डॉल्फिन या व्हेल मृत बच्चे को संभाल रही मां के साथ चलती हैं । फ्रैगल का मामला इसलिए खास है क्योंकि इसमें मां का लंबे समय तक बच्चे को साथ रखना और पूरे समूह का उसके करीब रहना, दोनों एक साथ साफ दिखाई देते हैं।
डॉल्फिन और कुछ अन्य सीटेशियन प्रजातियों में मृत बच्चों को कई दिनों, कभी-कभी हफ्तों तक उठाकर या धकेलकर ले जाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। वैज्ञानिक इस तरह के व्यवहार को एपिमेलेटिक व्यवहार कहते हैं। सरल शब्दों में, यह किसी मृत साथी के प्रति देखभाल या संरक्षण जैसा व्यवहार है ।
2018 के एक व्यापक अध्ययन ने 1970 से 2016 के बीच दर्ज 78 घटनाओं का विश्लेषण किया। इन घटनाओं में 88 ज्ञात सीटेशियन प्रजातियों में से कम-से-कम 20 प्रजातियां शामिल थीं । अध्ययन में डॉल्फिन परिवार—डेल्फिनिडी—के मामलों की संख्या सबसे अधिक थी; कुल रिकॉर्ड का 92.3 प्रतिशत इसी परिवार से संबंधित था ।
एक अन्य 2018 विश्लेषण में पाया गया कि लंबे समय तक मातृ देखभाल पाने वाले सीटेशियन मृत बच्चों के साथ कई तरह की गतिविधियां करते हैं—जैसे शव को उठाना, घुमाना, मुंह से पकड़ना, उसके साथ गोता लगाना या उसे सतह पर बनाए रखना ।
यह पैटर्न संकेत देता है कि ऐसा व्यवहार केवल किसी स्वचालित प्रवृत्ति का परिणाम नहीं हो सकता। मां और बच्चे के बीच मजबूत संबंध तथा लंबे समय का मातृ निवेश भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक अभी यह निश्चित रूप से नहीं कह सकते कि डॉल्फिन का अनुभव मनुष्यों के शोक जैसा ही होता है।
फ्रैगल के साथ उसके पूरे समूह का बने रहना इस संभावना की ओर इशारा करता है कि मृत्यु से जुड़ी प्रतिक्रिया केवल मां तक सीमित नहीं होती। सीटेशियन अत्यंत सामाजिक जीव हैं और उनके समूह में दूसरे सदस्य मृत या कमजोर साथी के पास बने रह सकते हैं ।
इससे यह सवाल उठता है कि क्या समूह के अन्य सदस्य भी नुकसान को किसी रूप में समझते या महसूस करते हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड इस दिशा में संकेत जरूर देते हैं, लेकिन उनके भावनात्मक अनुभव को मनुष्यों की भाषा में पूरी तरह परिभाषित करना अभी संभव नहीं है।
कुछ शोधकर्ता सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि मां डॉल्फिन मृत बच्चे को इसलिए पकड़े रह सकती है क्योंकि उसकी प्रवृत्ति उसे बच्चे को छोड़ने नहीं देती—जरूरी नहीं कि वह मनुष्यों जैसा भावनात्मक शोक महसूस कर रही हो ।
दूसरी ओर, व्यवहार की लंबी अवधि, बच्चे को बार-बार सतह पर बनाए रखने की कोशिश, फ्रैगल के पिछले नुकसान और उसके समूह की समन्वित मौजूदगी को देखते हुए कई विशेषज्ञ इसे शोक या कम-से-कम शोक-जैसी प्रतिक्रिया मानते हैं ।
इसलिए वैज्ञानिक भाषा में “डॉल्फिन दुखी थी” कहने के बजाय यह कहना अधिक सटीक है कि फ्रैगल ने मृत बच्चे के प्रति लंबे समय तक ध्यान, शारीरिक संपर्क और देखभाल जैसा व्यवहार दिखाया। यही व्यवहार मनुष्यों में शोक से मिलते-जुलते कुछ लक्षणों को सामने लाता है।
सीटेशियन में मृत्यु के बाद के व्यवहार के रिकॉर्ड दशकों से मौजूद हैं। इनमें मां-बच्चे की जोड़ियां सबसे आम हैं, लेकिन वयस्क डॉल्फिनों और व्हेलों को मृत वयस्क साथियों के पास भी बने रहते देखा गया है ।
फ्रैगल का मामला उच्च गुणवत्ता वाले ड्रोन फुटेज के कारण विशेष महत्व रखता है। इसमें एक ही घटना के दौरान मातृ लगाव, मृत बच्चे को लंबे समय तक संभालना और समूह की सामूहिक मौजूदगी दर्ज हुई। इससे यह वैज्ञानिक आधार मजबूत होता है कि कुछ सीटेशियन नुकसान के बाद ऐसी अवस्थाओं से गुजर सकते हैं जिन्हें मनुष्यों के संदर्भ में शोक-जैसा कहा जा सकता है।
ऐसा ही एक चर्चित उदाहरण ऑर्का ताहलेक्वाह का है, जिसने 2018 में ब्रिटिश कोलंबिया के पास अपने मृत बच्चे को दो सप्ताह से अधिक समय तक और 1,000 मील से ज्यादा दूरी तक साथ लेकर तैरा था । फ्रैगल की कहानी उसी बड़े सवाल को फिर सामने लाती है: समुद्र की गहराइयों में रहने वाले ये सामाजिक जीव अपने प्रियजनों की मौत को किस तरह समझते हैं—और उस नुकसान के साथ कैसे जीते हैं।