उनका निशाना खास तौर पर Nvidia की वह रणनीति थी जिसमें बड़े चिप पैकेज, अधिक कंप्यूट डाई और HBM के जरिए AI प्रदर्शन बढ़ाया जाता है। लियाओ का तर्क है कि अधिक ट्रांजिस्टर और मेमोरी जोड़कर पैमाना बढ़ाने की इस प्रक्रिया की एक अनिवार्य सीमा है ।
Moore’s Law को आम तौर पर एकीकृत सर्किट में ट्रांजिस्टर की संख्या बढ़ने की प्रवृत्ति के रूप में समझा जाता है। लियाओ के मुताबिक, इसका आर्थिक पक्ष—यानी हर नए प्रोसेस नोड के साथ प्रति ट्रांजिस्टर लागत में कमी—16nm और 7nm नोड के आसपास कमजोर पड़ गया ।
अब छोटे नोड से प्रदर्शन और ऊर्जा दक्षता में सुधार मिल सकता है, लेकिन ये लाभ भी पहले की तुलना में घटते जा रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि केवल नैनोमीटर संख्या घटाने की दौड़ से चिप उद्योग को पहले जैसी लागत और प्रदर्शन बढ़त मिलना मुश्किल हो रहा है।
मई 2026 में हुआवेई ने Moore’s Law के एक वैकल्पिक दृष्टिकोण के रूप में Tau Scaling Law पेश किया ।
इसका केंद्र ट्रांजिस्टर का आकार नहीं, बल्कि τ (टाउ)—सिग्नल को एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचने में लगने वाला समय है। इस दृष्टिकोण में लक्ष्य डेटा की आवाजाही और सिग्नल देरी को घटाना है, ताकि पूरे कंप्यूटिंग सिस्टम की गति बेहतर हो सके ।
सरल शब्दों में, हुआवेई का दावा है कि चिप को केवल अधिक छोटा और घना बनाने के बजाय उसके भीतर तथा अलग-अलग कंप्यूटिंग हिस्सों के बीच संचार को अधिक तेज बनाकर भी प्रदर्शन बढ़ाया जा सकता है।
LogicFolding Tau Scaling Law को हार्डवेयर में लागू करने की प्रस्तावित तकनीक है। इसमें लॉजिक, एनालॉग और मेमोरी सर्किट को अधिक कसकर व्यवस्थित करने तथा कुछ सर्किट परतों को ऊर्ध्वाधर ढंग से स्टैक करने का प्रयास किया जाता है ।
हुआवेई का दावा है कि इस डिजाइन से मौजूदा और अपेक्षाकृत सुलभ लिथोग्राफी नोड पर भी ट्रांजिस्टर घनत्व में 53.5% तक बढ़ोतरी हासिल की जा सकती है । इसका रणनीतिक महत्व इसलिए है क्योंकि कंपनी को अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अत्याधुनिक EUV लिथोग्राफी मशीनों और कुछ प्रमुख वैश्विक चिप निर्माण आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंच नहीं है।
कंपनी ने 2031 तक इस डिजाइन पद्धति के जरिए ‘1.4nm-क्लास’ चिप क्षमता हासिल करने का लक्ष्य सार्वजनिक रूप से बताया है । यहां ‘क्लास’ शब्द यह संकेत देता है कि दावा वास्तुशिल्प और प्रभावी घनत्व से जुड़ा है; इसे सीधे तौर पर किसी नई निर्माण प्रक्रिया के वास्तविक 1.4nm नोड के बराबर नहीं समझना चाहिए।
लियाओ ने यह स्वीकार किया कि हुआवेई एकल चिप या एकल कार्ड के कच्चे प्रदर्शन में Nvidia से सीधी टक्कर नहीं ले सकती। इसके बजाय कंपनी सिस्टम-स्तरीय प्रदर्शन पर जोर दे रही है—अपने पूरे सॉफ्टवेयर स्टैक, जिसमें CANN और MindSpore शामिल हैं, तथा बड़े कंप्यूटिंग क्लस्टरों की नेटवर्किंग क्षमता के साथ ।
इस रणनीति का उद्देश्य एकल चिप की कमियों को सॉफ्टवेयर, एल्गोरिदम, इंटरकनेक्ट और कई चिपों वाले सिस्टम के संयुक्त प्रदर्शन से संतुलित करना है। लियाओ के विचार में भविष्य की प्रतिस्पर्धा केवल चिप के नैनोमीटर या एक कार्ड की स्पेसिफिकेशन पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि सामग्री, निर्माण, सॉफ्टवेयर, एल्गोरिदम और एप्लिकेशन के पूरे इकोसिस्टम पर होगी।
Tau Scaling Law और LogicFolding को अमेरिकी निर्यात प्रतिबंधों के बीच हुआवेई और चीन के लिए एक वैकल्पिक तकनीकी रास्ते के रूप में प्रस्तुत किया गया है । EUV मशीनों और अग्रणी फाउंड्री सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण हुआवेई के लिए डिजाइन के जरिए अधिक प्रदर्शन और घनत्व हासिल करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
लियाओ का इंटरव्यू तकनीकी तर्क के साथ-साथ चीन के घरेलू सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए मनोबल बढ़ाने वाला संदेश भी था। इसका केंद्रीय विचार यह है कि पश्चिमी कंपनियों की बढ़त मुख्यतः ट्रांजिस्टर स्केलिंग पर टिकी है, जबकि प्रतिबंधों से घिरा हुआेई वास्तुशिल्प और सिस्टम नवाचार के जरिए अलग रास्ता अपना सकता है ।
अभी नहीं। Reuters और अन्य रिपोर्टों ने रेखांकित किया है कि यह दृष्टिकोण नया जरूर है, लेकिन बड़े पैमाने पर इसका प्रदर्शन अभी प्रमाणित नहीं हुआ है । LogicFolding वास्तविक दुनिया में Nvidia की अगली पीढ़ी की चिप वास्तुकलाओं के बराबर प्रदर्शन, ऊर्जा दक्षता, विश्वसनीयता और उत्पादन क्षमता दे पाएगा या नहीं—यह खुला सवाल है।
इसलिए फिलहाल इसे Nvidia की सिद्ध बढ़त को तुरंत पलट देने वाली तकनीकी सफलता के बजाय, प्रतिबंधों और घटते प्रोसेस-स्केलिंग लाभ के बीच हुआवेई का महत्वाकांक्षी डिजाइन-आधारित विकल्प कहना अधिक उचित है।