अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में वैश्विक रिफाइनरी रन लगभग 7.8 करोड़ बैरल प्रतिदिन रहा, जो वैश्विक मांग के लिए जरूरी स्तर से काफी कम है ।
अमेरिका में भी रिफाइनिंग क्षमता लगातार घट रही है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 को अमेरिका की चालू डिस्टिलेशन क्षमता 1.82 करोड़ बैरल प्रतिदिन थी—एक साल पहले की तुलना में 2.5 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक, यानी करीब 1%, कम । EIA की वार्षिक रिपोर्ट में 130 चालू रिफाइनरियां दर्ज की गईं, जो 2025 से दो कम हैं। ल्योंडेलबेसल ने ह्यूस्टन रिफाइनरी में काम बंद किया, जबकि फिलिप्स 66 ने लॉस एंजिलिस रिफाइनरी का संचालन समाप्त किया ।
पश्चिमी तेल कंपनियों ने भी लंबे समय में अपनी रिफाइनिंग इकाइयां कम की हैं। Reuters Open Interest की गणना के अनुसार BP, Chevron, Exxon, Shell और TotalEnergies की संयुक्त रिफाइनिंग मात्रा 2005 के 1.64 करोड़ बैरल प्रतिदिन से घटकर 2025 में 1.04 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गई—करीब 37% की गिरावट । इसका मतलब है कि बाजार के पास अचानक आए झटकों को संभालने के लिए अतिरिक्त क्षमता लगभग नहीं बची है।
ExxonMobil के CEO डैरेन वुड्स ने कहा कि मांग के मुकाबले उपलब्ध वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता का स्तर उन्हें अपने अनुभव में सबसे कम नजर आ रहा है। उनके शब्दों में, इतनी आपूर्ति बाहर होने के बाद उपलब्ध क्षमता उस स्तर से काफी नीचे है जो उन्होंने पहले कभी देखा है ।
वुड्स के अनुसार कच्चे तेल और तैयार ईंधन की कीमतों के बीच अंतर अब अधिक स्थायी होता जा रहा है और यह चुनौती “कुछ समय तक बनी रहेगी” । Exxon ने दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड डीजल उत्पादन किया, फिर भी कंपनी ने चेताया कि वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता का करीब 10% हिस्सा प्रभावी रूप से बंद है ।
Exxon के CFO नील हैनसन ने स्थिति को सीधे शब्दों में बताया: “ऊर्जा व्यवस्था में सबसे बड़ी बाधा रिफाइनिंग है” ।
Chevron के CEO माइक वर्थ ने तीसरी तिमाही और संभवतः उसके बाद भी तैयार ईंधन की कीमतों पर “ऊपर की ओर दबाव” बने रहने की चेतावनी दी । उन्होंने कहा कि डीजल और हीटिंग ऑयल जैसे डिस्टिलेट ईंधनों की मांग लंबे समय में कम होने की संभावना नहीं है।
Chevron की अमेरिकी रिफाइनरियां रिकॉर्ड स्तर पर, यानी 10 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक, चलीं। इसके बावजूद कंपनी का कहना है कि ऊर्जा बाजार में जारी तनाव के बीच ईंधन के ऊंचे मार्जिन बने रह सकते हैं । वर्थ ने कहा कि बाजार के “बफर” और “शॉक एब्जॉर्बर” लगातार खत्म हो रहे हैं, इसलिए असंतुलन को संभालने की क्षमता पहले की तुलना में काफी घट गई है ।
Shell ने भी कहा कि कच्चे तेल की कीमत चाहे जिस दिशा में जाए, पंप पर ईंधन की कीमतें ऊंची रह सकती हैं । CEO वाएल सावन ने CERAWeek सम्मेलन में चेताया कि जेट फ्यूल की घटती आपूर्ति का असर आगे चलकर डीजल और फिर पेट्रोल पर पड़ सकता है: “जेट फ्यूल पहले ही प्रभावित हो रहा है। उसके बाद डीजल और फिर पेट्रोल की बारी आएगी” ।
दूसरी तिमाही में Shell ने अपनी रिफाइनरियां आधिकारिक क्षमता के 102% तक चलाईं । कंपनी ने कीमतों के संकेतों के जवाब में जेट फ्यूल उत्पादन करीब 20% बढ़ाया, लेकिन इसका दबाव डीजल और पेट्रोल के उत्पादन पर पड़ सकता है । रिफाइनरियां पहले से ही अधिकतम स्तर पर चल रही हैं, इसलिए किसी नई रुकावट को संभालने की गुंजाइश बहुत कम बचती है।
Diamondback Energy मुख्य रूप से अमेरिकी शेल तेल उत्पादक कंपनी है। कंपनी को 2025 की चौथी तिमाही में अपने कच्चे तेल के लिए औसतन 58 डॉलर प्रति बैरल मिले, जो पिछली तिमाही के 64.60 डॉलर से कम था । यह गिरावट अधिक आपूर्ति की आशंकाओं से जुड़ी थी।
यह आंकड़ा मौजूदा संकट की एक अहम बात दिखाता है: कच्चा तेल कुछ परिस्थितियों में सस्ता हो सकता है, लेकिन अगर उसे उपयोगी ईंधन में बदलने की पर्याप्त रिफाइनिंग क्षमता नहीं है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिर भी ऊंची रह सकती हैं। यानी समस्या तेल के कुएं पर नहीं, रिफाइनरी के द्वार पर है।
प्रमुख क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल का भंडार कई वर्षों के निचले स्तर के करीब है । सामान्य परिस्थितियों में कम भंडार की भरपाई अतिरिक्त रिफाइनरी उत्पादन से की जा सकती है, लेकिन इस समय रिफाइनरियां लगभग पूरी क्षमता पर चल रही हैं।
अमेरिकी रिफाइनरियों ने दूसरी तिमाही में अपनी चालू क्षमता का करीब 95% से 97% इस्तेमाल किया। Shell 102% तक पहुंच गई, जिससे उत्पादन बढ़ाने की अतिरिक्त गुंजाइश लगभग नहीं बची । जुलाई के अंत में EIA के अनुसार अमेरिकी रिफाइनरियां अपनी चालू क्षमता के करीब 97% पर संचालित हो रही थीं ।
Sparta Commodities के विश्लेषक नील क्रॉस्बी ने स्थिति का सार बताते हुए कहा, “दुनिया में इतना रिफाइनिंग क्षमता ही नहीं बची है कि इस पूरी स्थिति को संभाला जा सके” ।
31 जुलाई की ECB ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, लगभग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे रिफाइनिंग मार्जिन ने यूरो क्षेत्र में ईंधन की कीमतों में हालिया वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
ईरान युद्ध से पहले डीजल की खुदरा कीमत में रिफाइनिंग मार्जिन का हिस्सा करीब 0.10 यूरो प्रति लीटर था। जुलाई के पहले तीन हफ्तों में यह बढ़कर 0.35 यूरो प्रति लीटर हो गया। पेट्रोल के मामले में यह हिस्सा फरवरी के 0.04 यूरो से बढ़कर जुलाई में 0.23 यूरो प्रति लीटर पहुंच गया । ECB ने चेताया कि अगस्त में इन मार्जिन में और वृद्धि हो सकती है, जिसके बाद ही कुछ गिरावट आने की संभावना है ।
TD Economics की अप्रैल 2026 की “Dollars & Sense” रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के अंत से पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रमशः 38% और 43% बढ़ चुकी थीं । एक अन्य विश्लेषण में TD ने डीजल की कीमतों में 30% वृद्धि और जेट फ्यूल की कमी का उल्लेख किया, जिसका असर उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों पर पड़ रहा है ।
TD का अनुमान है कि कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़े झटके के कारण 2026 में अमेरिकी CPI महंगाई औसतन 3.6% और कनाडा में 2.7% रह सकती है । उसका आधारभूत अनुमान दूसरी तिमाही में कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 96 डॉलर प्रति बैरल और साल के अंत तक लगभग 80 डॉलर तक गिरने का था, लेकिन यह अनुमान तनाव कम होने की धारणा पर आधारित है—जो अभी तक पूरी तरह साकार नहीं हुई है ।
डीजल की स्थिति विशेष रूप से तंग है, क्योंकि मिडिल डिस्टिलेट यानी डीजल जैसे ईंधन बनाने वाली रिफाइनरियां युद्ध से हुए नुकसान और क्षमता बंद होने से सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। यूरोप में डीजल रिफाइनिंग मार्जिन जुलाई में 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया ।
यूरोपीय लो-सल्फर गैसऑयल फ्यूचर्स का कच्चे तेल पर प्रीमियम—जो डीजल बनाने से रिफाइनर को मिलने वाले मार्जिन का संकेत देता है—बढ़कर 74.66 डॉलर प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया ।
इससे कच्चे तेल और तैयार ईंधन की कीमतों के बीच पारंपरिक संबंध टूटता दिख रहा है। Exxon और Chevron दोनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कच्चे तेल की कीमत गिरने पर भी पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल उसी अनुपात में सस्ते नहीं होंगे, क्योंकि अड़चन तेल निकालने के शुरुआती चरण में नहीं बल्कि उसे रिफाइन करने की कड़ी में है ।
नई रिफाइनरी बनाने में वर्षों लगते हैं। मौजूदा संयंत्र लगभग अधिकतम दरों पर चल रहे हैं और युद्ध से जुड़ी बंदी के जल्द खत्म होने की कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं है। Exxon के डैरेन वुड्स ने कहा कि उद्योग को इस स्थिति से बाहर निकलने में “कुछ समय लगेगा” ।
इसलिए अगले कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने पर भी पंप पर पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की कीमतें उसी गति से नीचे आएंगी, यह जरूरी नहीं। मौजूदा संरचनात्मक कमी कम-से-कम कई तिमाहियों तक रिफाइनिंग मार्जिन और ईंधन की कीमतों को ऊंचा रख सकती है ।