रक्षा मंत्री मायखाइलो फेदोरोव ने ज़ेलेंस्की के आदेश से पहले ही 2026 की पहली छमाही में 25,000 UGV का अनुबंध करने की योजना बताई थी। यह संख्या पूरे 2025 में खरीदे गए वाहनों से दोगुने से भी अधिक है । यूक्रेन का घोषित दीर्घकालिक लक्ष्य है कि अग्रिम मोर्चे की 100% रसद—जैसे गोला-बारूद, भोजन और अन्य आपूर्ति पहुंचाना—रोबोटिक प्रणालियों के जरिये की जाए ।
यूक्रेन के रक्षा-नवाचार मंच Brave1 में UGV विभाग के प्रमुख इहोर श्मिर्योव का अनुमान है कि देश 50,000 वाहनों के लक्ष्य से आगे निकल सकता है । 2026 के मध्य तक रखे गए ऑर्डर 22,000 यूनिट से अधिक हो चुके थे ।
यहां “रोबोटिक सेना” का अर्थ पूरी तरह स्वायत्त मशीनों से नहीं है। कई UGV दूर से संचालित होते हैं, जबकि कुछ में सीमित स्वचालन, सेंसर और नेविगेशन प्रणालियां होती हैं। घातक कार्रवाई से जुड़े फैसलों में मानव निगरानी अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है ।
2026 की पहली छमाही तक यूक्रेनी UGV ने 65,000 से अधिक मिशन पूरे किए। इस अवधि में हर महीने होने वाले मिशनों की संख्या दोगुने से ज्यादा बढ़ी । जून तक इन वाहनों के 50,000 से अधिक मिशन पूरे होने की जानकारी दी गई थी ।
इन मिशनों में शामिल हैं:
कुछ रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेनी सेना के लगभग 90% रसद अभियानों में अब भूमि-आधारित रोबोटों की भूमिका है । हवाई ड्रोन के साथ मिलकर UGV के इस्तेमाल ने 2026 की पहली छमाही में यूक्रेन को 600 वर्ग किलोमीटर तक क्षेत्र वापस लेने में मदद की—हालांकि अभियान की पूरी प्रभावशीलता और संचालन संबंधी विवरण सार्वजनिक नहीं हैं ।
यूक्रेन ने मानवरहित जमीनी वाहनों के संचालन के लिए दुनिया की पहली समर्पित UGV बटालियन तैनात की है । यह बदलाव दिखाता है कि रोबोट अब केवल प्रयोग या सीमित परीक्षण का हिस्सा नहीं रहे, बल्कि सैन्य इकाइयों की नियमित संरचना में शामिल किए जा रहे हैं।
यूक्रेन के 3rd Army Corps के अनुसार, मशीनगन से लैस एक दूर से नियंत्रित UGV ने लगातार रूसी हमलों के बीच एक महत्वपूर्ण चौराहे की रक्षा 45 दिनों तक की। कोर ने इसे यूक्रेन का पहला “पूरी तरह रोबोटिक रक्षात्मक अभियान” बताया । इस वाहन की नियमित रूप से मरम्मत और पुनः लोडिंग की जाती रही, इसलिए यह पूरी तरह स्वतंत्र रूप से संचालित अभियान नहीं था ।
पहले UGV मुख्य रूप से सामान ढोने और घायलों को निकालने के लिए बनाए जाते थे। अब कई प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण, रडार, मिसाइल और मोर्टार ले जा रहे हैं। कुछ को सीधे आक्रामक अभियानों और विस्फोटक हमलों के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है ।
यूक्रेनी सशस्त्र बलों के एक अध्ययन के अनुसार, UGV के इस्तेमाल से सैनिकों की हताहत संख्या में 30% कमी आई है ।
मांग पूरी करने के लिए यूक्रेन के घरेलू रक्षा उद्योग में तेज विस्तार हुआ है।
लेकिन तेज उत्पादन के साथ एक व्यावहारिक समस्या भी सामने आई है। यूक्रेनी ऑपरेटरों का कहना है कि उन्हें नए-नए मॉडल से ज्यादा मरम्मत केंद्र, स्पेयर पार्ट्स और सेवा सहायता की जरूरत है । 550 से अधिक प्रकार के वाहनों को लंबे समय तक सक्रिय रखना युद्धक्षेत्र में उन्हें पहुंचाने जितना ही महत्वपूर्ण हो सकता है।
ज़ेलेंस्की द्वारा 2025 में शुरू की गई “Build with Ukraine” पहल के तहत यूक्रेन ने विदेशी कंपनियों के साथ संयुक्त उत्पादन और तकनीकी साझेदारियां बढ़ाई हैं । इसका उद्देश्य युद्धक्षेत्र से मिली तकनीकी सीख को यूरोपीय औद्योगिक क्षमता के साथ जोड़ना है।
यही इस पूरी रणनीति का सबसे बड़ा सवाल है। 3rd Army Corps के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल आंद्री बिले्त्स्की का कहना है कि UGV को सक्रिय रूप से अपनाने वाली इकाइयां 2026 के अंत तक अग्रिम मोर्चे पर पैदल सैनिकों की जरूरत को 30% तक घटा सकती हैं। भविष्य में यह आंकड़ा 80% तक पहुंचने की संभावना जताई गई है ।
फिर भी विशेषज्ञ यह नहीं मानते कि रोबोट जल्द ही सैनिकों का पूर्ण विकल्प बन जाएंगे। West Point के Modern War Institute के विश्लेषकों के अनुसार, यूक्रेन एकल प्रयोगों से आगे बढ़कर नेटवर्क से जुड़े, समन्वित UGV सिस्टम तक पहुंच गया है। लेकिन जटिल भूभाग, कीचड़, संचार बाधित करने वाला इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और गोलीबारी के बीच स्वायत्त निर्णय लेना अब भी बड़ी चुनौतियां हैं ।
नजदीकी लड़ाई में पैदल सैनिकों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहती है। UGV किसी चौकी तक सामान पहुंचा सकते हैं, क्षेत्र पर गोलीबारी कर सकते हैं या जोखिम भरी निगरानी कर सकते हैं, लेकिन इमारतों, सुरंगों और बदलते भूभाग पर मानवीय निर्णय और प्रत्यक्ष नियंत्रण की जरूरत बनी रहती है ।
रूसी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और ड्रोन हमले भी यूक्रेनी UGV के लिए गंभीर खतरा हैं । मशीन को मोर्चे तक भेजना तभी उपयोगी है, जब उसका संचार, रखरखाव और नियंत्रण व्यवस्था भी सुरक्षित रहे।
यूक्रेन का प्रयोग सैन्य तकनीक के अगले दौर को प्रभावित कर सकता है।
पहला, NATO देश अब UGV को केवल भविष्य की अवधारणा नहीं, बल्कि वास्तविक युद्धक्षेत्र की क्षमता के रूप में देख रहे हैं। NATO कैटलॉगिंग और मानकीकरण से यूक्रेनी प्रणालियों को व्यापक रक्षा बाजार में जगह मिल सकती है ।
दूसरा, “Build with Ukraine” मॉडल युद्ध के दौरान विकसित तकनीक को अंतरराष्ट्रीय संयुक्त उत्पादन में बदल रहा है। इससे यूक्रेनी कंपनियों को पूंजी और औद्योगिक क्षमता मिलती है, जबकि विदेशी साझेदारों को वास्तविक युद्धक्षेत्र से मिली डिजाइन और संचालन संबंधी जानकारी तक पहुंच मिलती है ।
तीसरा, यूक्रेन की रणनीति उन सेनाओं के लिए महत्वपूर्ण बन सकती है जो भर्ती, जनसंख्या या मानव संसाधन की कमी से जूझ रही हैं। रसद, निकासी और कुछ रक्षात्मक काम मशीनों को सौंपकर सैनिकों को सीधे “किल ज़ोन” से दूर रखने की कोशिश की जा रही है ।
इसलिए यूक्रेन की 50,000-रोबोट योजना का अर्थ यह नहीं है कि युद्ध में इंसान गायब हो जाएंगे। इसका अधिक सटीक अर्थ है कि युद्धक्षेत्र में इंसान और मशीन के बीच काम का बंटवारा तेजी से बदल रहा है—और यूक्रेन इस बदलाव को बड़े पैमाने पर, वास्तविक युद्ध के बीच परख रहा है।