इस शुरुआती चरण में शोधकर्ता मुख्य रूप से तीन बातें देखेंगे:
mRNA-1469 मॉडर्ना की उसी mRNA तकनीक पर आधारित है, जिसका इस्तेमाल कंपनी ने अपनी कोविड-19 वैक्सीन में किया था। यह कार्यक्रम कंपनी के पहले के फिलोवायरस शोध पर भी आगे बढ़ता है । हालांकि फेज़ 1 अध्ययन का उद्देश्य अभी वैक्सीन की प्रभावशीलता साबित करना नहीं, बल्कि शुरुआती सुरक्षा और प्रतिरक्षा संबंधी आंकड़े जुटाना है।
बुंडिबुग्यो वायरस से जुड़ा प्रकोप पहली बार 14 मई 2026 को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआर कांगो) के इतुरी प्रांत में सामने आया । डीआर कांगो और युगांडा ने 15 मई को प्रकोप घोषित किया। इसके दो दिन बाद, 17 मई को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति यानी Public Health Emergency of International Concern (PHEIC) घोषित किया ।
WHO के अनुसार, 30 जुलाई 2026 तक डीआर कांगो में 3,605 पुष्ट मामले और 1,587 मौतें दर्ज की गई थीं। इस आधार पर कच्ची केस-फैटेलिटी दर लगभग 44% थी । युगांडा और पड़ोसी देशों में भी मामले सामने आए हैं ।
WHO ने बताया कि जुलाई के अंतिम पूरे रिपोर्टिंग सप्ताह में 567 मामले और 296 मौतें दर्ज हुईं—अब तक किसी एक सप्ताह में सबसे अधिक साप्ताहिक आंकड़े । प्रकोप कई स्वास्थ्य क्षेत्रों और प्रांतों तक फैल चुका है, जिससे टीका विकसित करने और उपलब्ध कराने की दौड़ और महत्वपूर्ण हो गई है।
2014–2016 का पश्चिम अफ्रीका इबोला प्रकोप, जो ज़ैरे इबोलावायरस के कारण हुआ था, कहीं अधिक बड़ा था। उसमें लगभग 28,600 मामले और 11,300 मौतें हुई थीं। मौजूदा बुंडिबुग्यो प्रकोप उससे काफी छोटा है, लेकिन रिकॉर्ड पर यह दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप बन चुका है ।
इस बार चुनौती केवल संक्रमण की रफ्तार नहीं है। पहले से लाइसेंस प्राप्त इबोला वैक्सीन और उपचार मुख्य रूप से ज़ैरे इबोलावायरस को लक्ष्य करते हैं, बुंडिबुग्यो वायरस को नहीं। इसलिए BDBV के खिलाफ अभी कोई स्वीकृत वैक्सीन या अन्य स्वीकृत प्रतिरोधी उपाय उपलब्ध नहीं है ।
Coalition for Epidemic Preparedness Innovations (CEPI)—महामारी की तैयारी के लिए काम करने वाला वैश्विक संगठन—ने मॉडर्ना के mRNA-1469 कार्यक्रम के लिए 5 करोड़ डॉलर तक देने की प्रतिबद्धता जताई है ।
यह धनराशि इन गतिविधियों में इस्तेमाल की जा सकती है:
मॉडर्ना का कार्यक्रम CEPI की लगभग 6 करोड़ डॉलर की व्यापक फंडिंग योजना का हिस्सा है। इस पोर्टफोलियो में मॉडर्ना के अलावा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और IAVI के वैक्सीन उम्मीदवार भी शामिल हैं ।
मॉडर्ना ने कहा है कि वैक्सीन को मंजूरी मिलने पर वह कम और मध्यम आय वाले देशों के लिए कम-लागत वाली एक्सेस प्राइसिंग पर कम से कम 5 लाख डोज़ उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता रखती है। कंपनी ने प्रकोप की प्रतिक्रिया के दौरान डीआर कांगो और अन्य प्रभावित देशों को डोज़ देने की बात भी कही है ।
यह वादा अभी वैक्सीन की मंजूरी या बड़े पैमाने पर उपलब्धता की गारंटी नहीं है, क्योंकि mRNA-1469 अभी शुरुआती क्लिनिकल चरण में है।
इस क्षेत्र में मॉडर्ना अकेली कंपनी नहीं है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप ने ChAdOx1 BDBV उम्मीदवार का BD-Ebov नामक फेज़ 1 ट्रायल 13 जुलाई 2026 को शुरू किया था ।
24 जुलाई को पहले स्वयंसेवक को डोज़ दी गई, जिससे यह बुंडिबुग्यो इबोलावायरस के खिलाफ दुनिया का पहला मानव वैक्सीन परीक्षण बन गया । ऑक्सफोर्ड का अध्ययन ब्रिटेन में हो रहा है और इसमें 18 से 55 वर्ष की आयु के 50 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया जा रहा है ।
ChAdOx1 वही वायरल-वेक्टर प्लेटफॉर्म है जिसका इस्तेमाल ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोविड-19 वैक्सीन में किया गया था। इसके विपरीत, मॉडर्ना का उम्मीदवार लिपिड नैनोपार्टिकल के जरिए mRNA तकनीक का इस्तेमाल करता है ।
| विशेषता | मॉडर्ना: mRNA-1469 | ऑक्सफोर्ड: ChAdOx1 BDBV |
|---|---|---|
| ट्रायल | mRNA-1469 का फेज़ 1 अध्ययन | BD-Ebov ट्रायल |
| स्थान | कनाडा के 3 केंद्र | ऑक्सफोर्ड, ब्रिटेन |
| तकनीक | mRNA और लिपिड नैनोपार्टिकल | ChAdOx1 चिंपैंज़ी एडेनोवायरस वेक्टर |
| पहली डोज़ | 4 अगस्त 2026 | 24 जुलाई 2026 |
| ट्रायल की घोषणा | 4 अगस्त 2026 | 13 जुलाई 2026 |
| योजनाबद्ध प्रतिभागी | लगभग 80 वयस्क | 50 वयस्क |
| CEPI सहायता | 5 करोड़ डॉलर तक | CEPI की लगभग 6 करोड़ डॉलर की कुल योजना का हिस्सा |
| निर्माण साझेदार | मॉडर्ना की आंतरिक व्यवस्था | सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया |
| अगला चरण | सुरक्षा और प्रतिरक्षा आंकड़े; परिणाम अच्छे रहे तो बड़े ट्रायल | 2026 के बाद के हिस्से में युगांडा के प्रकोप क्षेत्र में परीक्षण की योजना |
दोनों उम्मीदवार अभी शुरुआती सुरक्षा और इम्युनोजेनिसिटी अध्ययनों में हैं। ऑक्सफोर्ड ने 2026 में युगांडा के प्रकोप-प्रभावित क्षेत्रों में वैक्सीन का परीक्षण करने की योजना बताई है। मॉडर्ना का उम्मीदवार भी शुरुआती आंकड़े अनुकूल रहने पर तेज़ी से आगे के चरणों में जा सकता है ।
इस तरह, मौजूदा दौड़ केवल यह तय करने की नहीं है कि कौन-सी तकनीक बेहतर है। असली लक्ष्य है—बुंडिबुग्यो वायरस के लिए सुरक्षित और प्रभावी विकल्प तैयार करना, उसका पर्याप्त उत्पादन करना और उसे उन देशों तक पहुंचाना जहां प्रकोप का सबसे बड़ा असर पड़ रहा है।