इस तकनीक को Sagnac phonon interferometry कहा जाता है। इसमें ध्वनि तरंगों—या फोनॉन—के घूमते हुए सुपरफ्लुइड से गुजरने का अध्ययन किया जाता है। इसे सरल रूप में ऐसे समझ सकते हैं: जैसे किसी गुजरती हुई एंबुलेंस के सायरन की आवाज़ डॉप्लर प्रभाव के कारण बदलती सुनाई देती है, वैसे ही सुपरफ्लुइड का घूर्णन ध्वनि तरंगों के फेज़ को बदलता है। इस बदलाव से तंत्र के कोणीय संवेग के बारे में जानकारी मिलती है , ।
इस उपलब्धि से क्वांटम पदार्थ के अध्ययन के लिए एक नई खिड़की खुलती है। जिन तंत्रों को पारंपरिक उपकरणों से देखना कठिन होता है, उनमें ध्वनि एक शक्तिशाली जाँच उपकरण बन सकती है ।
Communications Physics में 31 जुलाई 2026 को प्रकाशित दूसरे अध्ययन का नेतृत्व किंडाई विश्वविद्यालय के सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी इप्पेई दानशिता और चुओ विश्वविद्यालय के दाइची कागामिहारा ने किया। उन्होंने Infleqtion द्वारा उपलब्ध कराए गए Oqtant नामक क्लाउड-आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए BEC प्रयोग संचालित किया और सामूहिक उत्तेजनाओं पर असामान्य टनलिंग के प्रभाव का दूरस्थ रूप से अध्ययन किया , । Oqtant से प्राप्त किसी अकादमिक शोध का यह पहला सहकर्मी-समीक्षित वैज्ञानिक परिणाम है ।
सामान्य क्वांटम टनलिंग में कण की ऊर्जा घटने पर अवरोध को पार करने की संभावना भी कम होती जाती है। लेकिन BEC में असामान्य टनलिंग इसका उलटा व्यवहार दिखाती है। कम ऊर्जा वाली ध्वनि तरंगें, जिन्हें सामूहिक उत्तेजनाएँ कहा जाता है, ऊँचे अवरोधों के बावजूद लगभग पूरी तरह पार हो सकती हैं। शून्य ऊर्जा के करीब उनकी संचरण संभावना एक के करीब पहुँच जाती है ।
प्रयोग में मिले परिणाम सैद्धांतिक भविष्यवाणियों से मेल खाते हैं। इससे इस विरोधाभासी प्रभाव की पहली प्रायोगिक पुष्टि हुई ।
इस खोज का महत्व BEC तक सीमित नहीं है। असामान्य टनलिंग का अनुमान चुंबक जैसे पदार्थों में भी लगाया गया है। इसलिए यह पुष्टि संघनित पदार्थ भौतिकी के लिए भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है ।
दूसरा प्रयोग यह भी दिखाता है कि अत्याधुनिक क्वांटम शोध धीरे-धीरे अधिक सुलभ हो सकता है। पारंपरिक अल्ट्राकोल्ड-एटम प्रयोगशाला बनाने और चलाने के लिए वर्षों का विशेष प्रशिक्षण, महंगे उपकरण और विशेषज्ञ ढाँचा चाहिए। इस वजह से सैद्धांतिक भौतिकविदों के लिए अपने विचारों की प्रायोगिक जाँच करना अक्सर कठिन होता है ।
Oqtant जैसे क्लाउड-आधारित प्लेटफॉर्म ने शोधकर्ताओं को इंटरनेट के जरिए प्रयोग डिजाइन करने और BEC उपकरण संचालित करने की सुविधा दी। उन्हें अपनी अलग प्रयोगशाला बनाने या जटिल उपकरण खुद चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ी , ।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह व्यवस्था सैद्धांतिक भौतिकविदों की प्रयोगात्मक क्षमताओं को काफी बढ़ा सकती है और अन्य अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं को भी क्लाउड पर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रेरक साबित हो सकती है । यह रुझान क्लाउड-आधारित क्वांटम कंप्यूटिंग सेवाओं जैसा है, जहाँ दूर बैठे उपयोगकर्ता अत्यंत जटिल हार्डवेयर तक पहुँच बना सकते हैं।
दोनों प्रयोग स्वतंत्र हैं, लेकिन उनमें एक साझा विचार दिखाई देता है: क्वांटम द्रवों को समझने के लिए नए माध्यमों का इस्तेमाल। पहले प्रयोग ने ध्वनि को सूक्ष्म क्वांटम संरचना की जाँच का माध्यम बनाया; दूसरे ने प्रयोगशाला के भौतिक स्थान की सीमा को क्लाउड तक विस्तारित कर दिया।
इन उपलब्धियों से सुपरफ्लुइडिटी और क्वांटम टनलिंग की समझ तो आगे बढ़ती ही है, साथ ही यह भी संकेत मिलता है कि भविष्य का अत्याधुनिक भौतिकी शोध अधिक खुला, दूरस्थ और सहयोगात्मक हो सकता है।