ईरान युद्ध और रूस यूक्रेन संघर्ष ने वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 9% (5 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक) बंद कर दिया है, जो दशकों का सबसे बड़ा संकट है [6][11]। युद्ध क्षेत्रों के बाहर की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चल रही हैं, लेकिन सिस्टम में कोई अतिरिक्त बफर नहीं बचा है [13]। एक्सॉनमोबिल, शेवरॉन और शेल ने दूसरी तिम...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is the nature and impact of the current global refining crisis, as warned by Saudi Aramco and other major oil companies, including the. Article summary: The global refining industry is in the grip of its worst crisis in decades — a supply-driven crunch caused not by lack of crude, but by war knocking nearly 9% of the world's refining capacity offline. Refineries outside . Topic tags: general, government, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
वैश्विक रिफाइनिंग उद्योग दशकों के सबसे बुरे संकट से गुज़र रहा है — यह संकट कच्चे तेल की कमी से नहीं, बल्कि युद्धों के कारण दुनिया की लगभग 9% रिफाइनिंग क्षमता के ठप होने से उपजा है। संघर्ष क्षेत्रों के बाहर की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से दौड़ रही हैं और सिस्टम में कोई अतिरिक्त क्षमता नहीं बची है । एक्सॉनमोबिल और शेवरॉन जैसी कंपनियों को रिकॉर्ड मुनाफा हो रहा है, जिसके चलते कई सरकारी जांचें शुरू हो गई हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह मुनाफा युद्ध और कमी पर आधारित एक 'नाजुक सुनहरा दौर' है, जो संरचनात्मक सुधारों से नहीं आया है
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संघर्ष क्षेत्रों के बाहर रिकॉर्ड उपयोग: सऊदी अरामको ने अगस्त 2026 में चेतावनी दी थी कि सक्रिय युद्ध क्षेत्रों के बाहर की रिफाइनरियां अपनी अधिकतम क्षमता पर चल रही हैं, और ईंधन की ऊंची कीमतों से बचाने के लिए सिस्टम में कोई बफर (शॉक एब्जॉर्बर) नहीं बचा है । इस संकट ने इन प्लांट्स को उनकी पूर्ण परिचालन सीमा पर धकेल दिया है, जिससे पूरा सिस्टम बेहद नाजुक हो गया है।
~5 मिलियन बैरल प्रतिदिन क्षमता खत्म: ईरान युद्ध (जिसने 28 फरवरी, 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया) और जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष ने मिलकर दुनिया की 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) से अधिक रिफाइनिंग क्षमता को खत्म कर दिया है । एनर्जी ट्रेडर विटोल ने पुष्टि की कि मिडिल ईस्ट गल्फ़ की लगभग 3 मिलियन bpd क्षमता ऑफलाइन हो गई, जबकि यूक्रेनी हमलों और अन्य व्यवधानों के कारण रूसी रिफाइनरियों की एक और 2 मिलियन bpd क्षमता चली गई
। मई 2026 तक, वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 9% निष्क्रिय था
। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने रिपोर्ट दी कि Q2 2026 में वैश्विक रिफाइनरी संचालन औसतन केवल 78 मिलियन bpd रहा — जो सामान्य से लगभग 5 मिलियन bpd कम है
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तेल कंपनियों के लिए रिकॉर्ड डाउनस्ट्रीम मुनाफा: आपूर्ति की कमी ने असाधारण कमाई पैदा की है:
नाजुक संभावनाएं: रॉयटर्स ने अपने विश्लेषण का शीर्षक रखा, "ईरान युद्ध तेल रिफाइनिंग के लिए सुनहरे युग की शुरुआत करता है, लेकिन यह टिकेगा नहीं" । ये रिकॉर्ड मार्जिन युद्धकालीन आपूर्ति विनाश का सीधा परिणाम हैं: होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना, मध्य पूर्वी रिफाइनरियों पर सीधे हमले, और रूसी प्रसंस्करण संयंत्रों पर यूक्रेनी ड्रोन हमले
। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) का अनुमान है कि युद्ध-पूर्व उत्पादन और व्यापार पैटर्न को बहाल होने में 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक का समय लग सकता है
। IEA ने चेतावनी दी थी कि अकेले इस संघर्ष के कारण 2026 में वैश्विक तेल उत्पादन में 3.9 मिलियन bpd की गिरावट आएगी
। विश्लेषकों का मानना है कि ये मुनाफे अस्थायी हैं और उद्योग के संरचनात्मक स्वास्थ्य को नहीं दर्शाते।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और जांच: ईंधन की कीमतों में उछाल ने आक्रामक राजनीतिक प्रतिक्रिया शुरू कर दी है:
अरामको की संरचनात्मक चेतावनी: तत्काल युद्ध-जनित नुकसान के अलावा, सऊदी अरामको के उपाध्यक्ष मुसाब अल मुल्ला ने जून 2026 में चेतावनी दी थी कि रिफाइनिंग क्षेत्र में वर्षों से निवेश की कमी है। वर्तमान संघर्षों से पहले ही 2020 और 2023 के बीच नई परियोजनाओं की कमी के कारण लगभग 3 मिलियन bpd क्षमता खत्म हो चुकी थी । अल मुल्ला ने कहा, "अब हमें एहसास हुआ है कि उन रिफाइनरियों का होना वर्तमान संकट के प्रभावों को काफी कम कर सकता था"
। इस संरचनात्मक घाटे का मतलब है कि जब शांति वापस आएगी, तब भी सिस्टम के पास कोई बफर नहीं होगा।
रिफाइनिंग संकट का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। आपूर्ति बाधाओं के कारण रिफाइनरियों को हल्के कच्चे तेल का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसके चलते अप्रैल 2026 में अकेले एशिया में डीजल और जेट ईंधन उत्पादन में कम से कम 1 मिलियन bpd की गिरावट आने की उम्मीद थी । प्रमुख उपभोग क्षेत्रों में गैसोलीन का भंडार बहु-वर्षीय निचले स्तर पर है
। कच्चे तेल के उत्पादन में आंशिक सुधार के बावजूद, रिफाइनिंग बाधा कम नहीं हुई है क्योंकि प्लांट स्वयं क्षतिग्रस्त हैं, बंद हैं, या अपने सामान्य कच्चे तेल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। EIA को उम्मीद है कि सामान्य व्यापार पैटर्न को बहाल होने में 2027 की शुरुआत तक का समय लग सकता है, जिसका अर्थ है कि ऊंची ईंधन कीमतें लंबे समय तक बनी रह सकती हैं
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ईरान युद्ध और रूस यूक्रेन संघर्ष ने वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 9% (5 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक) बंद कर दिया है, जो दशकों का सबसे बड़ा संकट है [6][11]।
ईरान युद्ध और रूस यूक्रेन संघर्ष ने वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 9% (5 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक) बंद कर दिया है, जो दशकों का सबसे बड़ा संकट है [6][11]। युद्ध क्षेत्रों के बाहर की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चल रही हैं, लेकिन सिस्टम में कोई अतिरिक्त बफर नहीं बचा है [13]।
एक्सॉनमोबिल, शेवरॉन और शेल ने दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया, जिसकी वजह युद्ध के कारण उत्पन्न आपूर्ति की कमी है [32][33][34]।