सौर ऊर्जा के विस्तार की समय-सीमा लगातार छोटी होती गई है। दुनिया को पहली 1 TW स्थापित सौर क्षमता तक पहुंचने में दो दशक से अधिक समय लगा। दूसरी टेरावाट क्षमता जोड़ने में करीब तीन वर्ष लगे, जबकि तीसरी टेरावाट क्षमता दो वर्ष से भी कम समय में जुड़ गई । कुल वैश्विक सौर क्षमता केवल चार वर्षों में तीन गुना हुई ।
2025 में 664 GW नई सौर क्षमता स्थापित हुई—2024 से 69 GW और 2023 से 212 GW अधिक। हालांकि, साल-दर-साल वृद्धि दर अब धीमी पड़ रही है: पहले यह 85% थी, जो 2024 में 32% और 2025 में 12% रह गई । कुछ विश्लेषक 3 TW का आंकड़ा अप्रैल 2026 में पार होने का अनुमान लगाते हैं, लेकिन सटीक समय को लेकर आकलनों में अंतर है ।
IEA Photovoltaic Power Systems Programme के अनुसार, 2025 के अंत तक वैश्विक संचयी सौर क्षमता लगभग 2,974 GW थी और उस वर्ष करीब 698 GW नई क्षमता जुड़ी थी । अलग-अलग रिपोर्टों में 664 GW और 698 GW का अंतर इस्तेमाल किए गए आंकड़ा-स्रोत और मापने की पद्धति से जुड़ा है। वैश्विक बिजली उत्पादन में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी अब लगभग 9% है ।
चीन दुनिया के बाकी सभी देशों की संयुक्त क्षमता से अधिक पवन और सौर ऊर्जा क्षमता बना रहा है । देश में बड़े पैमाने के सौर प्रोजेक्टों की पाइपलाइन अकेले 664 GW तक पहुंच चुकी है । लेकिन बिजली का ग्रिड इस रफ्तार से कदम नहीं मिला पा रहा।
चीन के उत्तर और पश्चिम में स्थित दूरदराज के नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों से पूर्वी तट के औद्योगिक और आबादी वाले क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए पर्याप्त ट्रांसमिशन क्षमता नहीं है । नतीजा यह है कि जो बिजली बनाई जा सकती थी, उसका एक हिस्सा ग्रिड में जगह न मिलने के कारण जानबूझकर घटाना या रोकना पड़ता है। इस प्रक्रिया को कर्टेलमेंट कहा जाता है।
Qinghai, Xinjiang और Gansu जैसे संसाधन-संपन्न प्रांतों में सौर कर्टेलमेंट दर 10% से 17% तक पहुंच गई है। इसकी वजह ग्रिड में भीड़ और बिजली बाजार में सीमित लचीलापन है । 2026 की शुरुआत में राष्ट्रीय स्तर पर सौर कर्टेलमेंट 9.2% और पवन ऊर्जा कर्टेलमेंट 8.5% तक बढ़ गया ।
अब यह समस्या नए प्रोजेक्टों की रफ्तार पर भी असर डाल रही है। चीन में मार्च 2026 में सौर प्रतिष्ठानों में साल-दर-साल 56% और अप्रैल में 79% की गिरावट दर्ज की गई । देश का सौर बाजार 2019 के बाद पहली वार्षिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है ।
ग्रिड ऑपरेटरों ने 2026 की पहली तिमाही में ही ¥167.5 अरब (लगभग 24.5 अरब डॉलर) का निवेश किया, फिर भी कठोर बिजली-बाजार नियम और कोयले से जुड़े ट्रांसमिशन इंतजाम बाधा बने हुए हैं । उपलब्ध विश्लेषणों के अनुसार, बर्बाद हो रही नवीकरणीय बिजली का मुख्य कारण उत्पादन क्षमता की कमी नहीं, बल्कि कोयला बिजली संयंत्रों और ग्रिड का लचीले ढंग से प्रबंधन न हो पाना है ।
इसका जलवायु पर उलटा असर भी दिख रहा है। Carbon Brief के विश्लेषण के अनुसार, 2026 की शुरुआत में चीन का CO₂ उत्सर्जन 2% बढ़ा, जिसका एक कारण यह था कि बर्बाद हुई पवन और सौर बिजली की भरपाई के लिए कोयला बिजली का इस्तेमाल जारी रखना पड़ा । अल्ट्रा-हाई-वोल्टेज लाइनों से गुजरने वाली बिजली में पवन और सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 20% है, जबकि कोयले से बनी बिजली की हिस्सेदारी 42% है ।
चीन में बड़े सौर प्रोजेक्टों की रफ्तार पर दबाव है, लेकिन पाकिस्तान, फिलीपींस और नाइजीरिया जैसे देशों में घरों और कारोबारों की छतों पर लगे सोलर पैनल बाजार को नया आकार दे रहे हैं।
पाकिस्तान: देश में सौर ऊर्जा अपनाने की रफ्तार को “अभूतपूर्व” बताया गया है। यहां सौर बिजली उत्पादन वैश्विक औसत से तीन गुना से अधिक हो गया । कई प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में दिन के समय रूफटॉप सोलर से बनने वाली बिजली ग्रिड की मांग से अधिक होने का अनुमान जताया गया था ।
पाकिस्तान कुछ समय के लिए चीन से सौर पैनलों का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना, हालांकि बाद में फिलीपींस ने उसकी जगह ले ली । 2026 की शुरुआत तक पाकिस्तान ने तेल और गैस के उन आयातों में 12 अरब डॉलर से अधिक की बचत की, जिनकी जरूरत घरेलू ऊर्जा मांग पूरी करने के लिए पड़ सकती थी ।
फिलीपींस: बिजली की बढ़ती कीमतों और बार-बार होने वाली बिजली कटौती ने यहां रूफटॉप सोलर को तेजी से लोकप्रिय बनाया है। 2026 में फिलीपींस दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ता सौर बाजार रहा । रूफटॉप सोलर क्षमता 2025 की शुरुआत के 721 MW से बढ़कर 2026 की शुरुआत में करीब 1,300 MW हो गई ।
घरेलू सोलर सिस्टम की लागत वसूलने की अवधि घटकर लगभग तीन वर्ष रह गई। वाणिज्यिक सिस्टम के लिए यह 2.3 वर्ष और औद्योगिक सिस्टम के लिए 3.1 वर्ष थी । चीन ने मार्च और अप्रैल 2026 में ही फिलीपींस को 3,000 MW से अधिक सौर पैनल निर्यात किए । मई 2026 तक के तीन महीनों में पैनल आयात 407 मिलियन डॉलर पहुंच गया, जो 145% की वृद्धि है ।
नाइजीरिया और अफ्रीका: नाइजीरिया में भी रूफटॉप सोलर प्रतिष्ठानों में असाधारण बढ़ोतरी हुई है। क्यूबा और लेबनान जैसे छोटे बाजारों में भी तेज़ी देखी गई । अफ्रीका में 2025 के दौरान सौर क्षमता में 54% की सालाना वृद्धि दर्ज हुई—यह महाद्वीप की अब तक की सबसे तेज़ वृद्धि थी। दक्षिण अफ्रीका ने 1.6 GW और नाइजीरिया ने 803 MW नई क्षमता जोड़ी ।
कम से कम 1 GW सौर क्षमता वाले देशों की संख्या 2020 के 42 से बढ़कर 74 तक पहुंच गई है । इससे संकेत मिलता है कि सौर ऊर्जा का विस्तार अब केवल कुछ बड़े देशों या सरकारी यूटिलिटी प्रोजेक्टों तक सीमित नहीं रहा।
सौर ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी ने एक नई समस्या पैदा की है—“मिडडे ग्लट”, यानी दोपहर में जरूरत से ज्यादा बिजली और शाम के समय अपेक्षाकृत कम उपलब्धता। धूप के चरम समय पर सौर उत्पादन तेजी से बढ़ता है, लेकिन मांग हमेशा उसी समय इतनी अधिक नहीं होती।
चीन में 150 से अधिक क्षेत्रों को “रेड जोन” घोषित किया गया है, जहां स्थानीय ग्रिड अतिरिक्त फोटोवोल्टिक बिजली को समायोजित नहीं कर सकता । ऐसी स्थिति में बिजली की कीमतें शून्य या नकारात्मक तक जा सकती हैं, सौर संयंत्रों का उत्पादन घटाना पड़ सकता है और नई क्षमता से मिलने वाला आर्थिक लाभ कम हो सकता है।
बैटरी स्टोरेज इस समस्या का सीधा समाधान दे सकता है। दोपहर की अतिरिक्त सौर बिजली को बैटरियों में जमा करके शाम की पीक मांग के समय इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे:
चीन के डीकार्बोनाइजेशन मार्ग पर PNAS के एक अध्ययन ने अतिरिक्त उत्पादन को समाहित करने के लिए टेरावाट-स्तर के ऊर्जा भंडारण की जरूरत बताई है । अध्ययन के अनुसार, प्रमुख बिजली-खपत केंद्रों के 100 किलोमीटर के दायरे में सौर और पवन क्षमता का बड़ा हिस्सा विकसित करना तथा अंतर-प्रांतीय अल्ट्रा-हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन को मौजूदा स्तर से दो से तीन गुना बढ़ाना भी जरूरी होगा ।
SolarPower Europe के Global Solar Market Outlook 2026-2030 के मुताबिक, सौर उद्योग अब केवल तेजी से पैनल लगाने के चरण में नहीं है। ऊंची सौर हिस्सेदारी के साथ कर्टेलमेंट, स्टोरेज की मांग, ग्रिड की सीमाएं और बिजली बाजार के बदलते नियम अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं ।
SolarPower Europe के मध्यम परिदृश्य में 2026 में वैश्विक सौर प्रतिष्ठानों में 8% की अस्थायी गिरावट का अनुमान है। इसके तहत नई क्षमता करीब 612 GW रह सकती है, जिसके बाद 2027 में वृद्धि फिर शुरू होने की उम्मीद है । यह दो दशक से अधिक समय में सौर बाजार की पहली संभावित वार्षिक गिरावट होगी। इसका प्रमुख कारण चीन के सौर बाजार का पुनर्गठन बताया गया है ।
इसका अर्थ यह नहीं है कि सौर ऊर्जा का विस्तार रुक गया है। बल्कि उद्योग एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। अब सवाल यह नहीं है कि दुनिया कितने सोलर पैनल बना और लगा सकती है। असली सवाल है: क्या बिजली की लाइनें, बाजार के नियम और बैटरी स्टोरेज उस क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर सकते हैं?
Global Energy Monitor के शब्दों में, चीन में पवन और सौर ऊर्जा का विस्तार “इंस्टॉलेशन रेस” से निकलकर “सिस्टम इंटीग्रेशन टेस्ट” में बदल गया है । 3 TW का मुकाम सौर युग की ताकत का प्रमाण है—लेकिन अगली छलांग इस बात पर निर्भर करेगी कि दुनिया इस बिजली को सही समय और सही जगह तक कितनी कुशलता से पहुंचा पाती है।