इस बहस को समझने के लिए 30 जुलाई को प्रकाशित एक SCMP opinion लेख में सामने आई Hwaseong की कहानी अहम है। Hwaseong दक्षिण कोरिया के प्रमुख सेमीकंडक्टर केंद्रों में से एक है। लेख में एक गुमनाम इंजीनियर को आधी रात के बाद स्क्रीन पर उभरते defect pattern को देखते हुए बताया गया है। अगर वह समस्या उसी समय पकड़ ली जाए, तो वेफर उत्पादन का एक सप्ताह बच सकता है।
इंजीनियर समाधान के बेहद करीब है, लेकिन उसे काम छोड़कर घर जाना पड़ता है—क्योंकि कानून इसकी मांग करता है ।
यहीं AI युग का नया सवाल सामने आता है: जब सही औजारों से एक इंजीनियर वह समस्या हल कर सकता है, जिसमें पहले पूरी टीम को एक महीना लग जाता था, तो केवल यह पूछना कि उसने कितने घंटे काम किया, उसके वास्तविक योगदान को कितना मापता है?
सरकार और सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी अब होनाम जैसे ‘मेगा स्पेशल ज़ोन’ में श्रम नियमों को अधिक लचीला बनाने पर विचार कर रहे हैं। प्रस्तावों में सेमीकंडक्टर R&D कर्मचारियों के लिए 52 घंटे की सीमा से छूट और तथाकथित ‘white-collar exemption’ शामिल है ।
इस मॉडल के तहत ऊंची आय वाले प्रबंधकों और R&D विशेषज्ञों को कुछ कार्य-घंटे, अवकाश और overtime नियमों से बाहर रखने की संभावना पर चर्चा हो रही है। एक प्रस्ताव में शीर्ष 3 प्रतिशत आय वर्ग के कर्मचारियों को शामिल करने की बात है; उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस सीमा का संबंध लगभग 140 मिलियन वॉन या उससे अधिक वार्षिक वेतन से जोड़ा गया है ।
विचार केवल काम के घंटे तक सीमित नहीं है। अस्थायी और dispatched workers पर लगी पाबंदियों में ढील तथा पूरे विशेष क्षेत्र में flexible labor schemes लागू करने के विकल्प भी समीक्षा में हैं ।
विपक्षी People Power Party के सांसद कोह डोंग-जिन ने 31 जुलाई को ऐसा विधेयक पेश किया, जिसमें देशभर के सेमीकंडक्टर R&D कर्मचारियों को 52 घंटे की सीमा से बाहर रखने का प्रस्ताव है। कोह पहले Samsung Electronics के chief executive रह चुके हैं ।
इससे बहस का दायरा केवल होनाम क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। यदि छूट सिर्फ एक क्षेत्र या विशेष ज़ोन को दी जाती है, तो दूसरे उद्योगों और क्षेत्रों के साथ ‘reverse discrimination’ का सवाल उठ सकता है । दूसरी ओर, उद्योग जगत का कहना है कि केवल क्षेत्रीय छूट से भी उसका असर आधा रह जाएगा।
सेमीकंडक्टर उद्योग का तर्क दो स्तरों पर है:
हालांकि, AI का यह अर्थ अपने-आप में यह नहीं है कि कर्मचारियों को लगातार लंबे समय तक काम करना चाहिए। असली सवाल यह है कि क्या कंपनियां अधिक लचीलेपन का इस्तेमाल सीमित, स्वैच्छिक और उच्च-कौशल वाले काम के लिए करेंगी—या इससे लंबे काम के घंटे सामान्य बना दिए जाएंगे।
श्रमिक संगठन और नागरिक समूह इस प्रस्ताव को ‘शोषणकारी’ बता रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार रणनीतिक उद्योगों की प्रतिस्पर्धा को कर्मचारियों के स्वास्थ्य, आराम और कानूनी सुरक्षा से ऊपर रख रही है । कुछ समूहों ने मेगा-ज़ोन को ‘labor laboratory’ यानी श्रम नियमों की प्रयोगशाला बनाने की आलोचना की है ।
दक्षिण कोरिया में 52 घंटे का नियम लंबे समय तक काम करने की संस्कृति को सीमित करने और कर्मचारियों के स्वास्थ्य व जीवन-गुणवत्ता की रक्षा के लिए लागू किया गया था। इसलिए इसमें छूट की मांग केवल तकनीकी प्रतिस्पर्धा का मुद्दा नहीं, बल्कि श्रम-सुरक्षा की दिशा पर भी फैसला है ।
दक्षिण कोरिया का सामने खड़ा विकल्प सीधा नहीं है। यदि नियम पूरी तरह कठोर रहते हैं, तो कंपनियों को डर है कि महत्वपूर्ण R&D क्षणों में वे वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों से पीछे रह सकती हैं। यदि छूट बहुत व्यापक होती है, तो ‘स्वैच्छिक’ अतिरिक्त काम धीरे-धीरे नौकरी की अनिवार्य शर्त बन सकता है।
AI ने इंजीनियरिंग के मूल्य को अधिक असमान बना दिया है: कुछ घंटे सामान्य हो सकते हैं, जबकि किसी एक क्षण की सही पहचान करोड़ों डॉलर के उत्पादन और समय को प्रभावित कर सकती है। इसलिए बहस अब सिर्फ यह नहीं है कि कर्मचारी सप्ताह में कितने घंटे काम करे। सवाल यह भी है कि उस एक निर्णायक घंटे की कीमत कौन तय करेगा—कंपनी, कानून या स्वयं कर्मचारी?
दक्षिण कोरिया AI चिप दौड़ में 800 ट्रिलियन वॉन का दांव लगा रहा है। अब उसे यह तय करना है कि इस दौड़ की गति बढ़ाने के लिए 52 घंटे के नियम में कितनी छूट दी जाए, और श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए कौन-सी सीमाएं बरकरार रखी जाएं।