इसलिए वैकल्पिक तर्क यह है कि चीन केवल विकासशील देशों के तैयार माल बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहा, बल्कि कई मामलों में उनकी उत्पादन-क्षमता के लिए जरूरी इनपुट और मशीनरी भी उपलब्ध करा रहा है।
व्यापार आंकड़ों के अनुसार:
अन्य संस्थानों के विश्लेषण भी इसी दिशा की ओर इशारा करते हैं। McKinsey Global Institute के अनुसार, चीन ने अधिक विनिर्माण इनपुट और पूंजीगत वस्तुएं भेजीं, जबकि तैयार उत्पादों का निर्यात घटा । अमेरिकी फेडरल रिजर्व के विश्लेषण में भी चीन के निर्यात विस्तार का केंद्र वैश्विक मूल्य-श्रृंखलाओं का ऊपरी हिस्सा और उच्च-तकनीकी क्षेत्र बताए गए हैं ।
IMF के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र को चीन के निर्यात में 60% से अधिक हिस्सा मध्यवर्ती वस्तुओं का है। इससे पता चलता है कि चीन इस क्षेत्र में केवल तैयार माल का विक्रेता नहीं, बल्कि क्षेत्रीय उत्पादन-श्रृंखलाओं का प्रमुख आपूर्तिकर्ता भी है ।
इस वैकल्पिक दृष्टिकोण के पीछे तीन प्रमुख रास्ते हैं।
विकासशील देश चीन से कंपोनेंट और पुर्जे आयात करके अपने कारखानों में उनकी असेंबली या आगे की प्रोसेसिंग कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में स्थानीय श्रम, सेवाएं और अन्य घरेलू सामग्री जुड़ती हैं। कई देश इन उत्पादों को आगे तीसरे बाजारों में निर्यात भी कर सकते हैं।
विश्व बैंक के एक अध्ययन के अनुसार, चीनी मध्यवर्ती वस्तुओं के आयात से किसी देश के उद्योग का संपर्क एक इकाई बढ़ने पर औद्योगिक रोजगार में 19.7% की वृद्धि देखी गई। इसके विपरीत, तैयार वस्तुओं के आयात का रोजगार पर कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं मिला ।
इथियोपिया में चीन से होने वाले कुल आयात का 78.5% हिस्सा मध्यवर्ती वस्तुओं का है। अध्ययन में पाया गया कि चीनी मध्यवर्ती आयातों के संपर्क में एक इकाई की वृद्धि से वहां औद्योगिक रोजगार में 9% की बढ़ोतरी हुई ।
किसी विकासशील देश के लिए औद्योगिकीकरण की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक महंगी मशीनरी और उत्पादन उपकरण हो सकते हैं। चीन से अपेक्षाकृत कम लागत वाली मशीनरी, कारखाना उपकरण और अन्य पूंजीगत वस्तुएं मिलने पर नए उद्योग लगाना या मौजूदा कारखानों का विस्तार करना आसान हो सकता है।
2021 से 2024 के बीच चीन के पूंजीगत वस्तुओं के निर्यात में 32% की वृद्धि हुई, जबकि उपभोक्ता वस्तुओं का निर्यात लगभग स्थिर रहा । USITC के अनुसार, 2017 तक मध्यवर्ती वस्तुएं चीन के माल निर्यात की सबसे बड़ी श्रेणी बन चुकी थीं और उनकी हिस्सेदारी 43.3% थी। चीन अब जटिल मध्यवर्ती उत्पादों के दुनिया के सबसे बड़े स्रोतों में शामिल है ।
आज किसी उत्पाद का निर्माण अक्सर एक ही देश में पूरा नहीं होता। कंपोनेंट एक देश में बनते हैं, असेंबली दूसरे देश में होती है और अंतिम उत्पाद किसी तीसरे बाजार में बेचा जाता है। ऐसी वैश्विक मूल्य-श्रृंखलाओं में शामिल होने के लिए विकासशील देशों को भरोसेमंद और सस्ते मध्यवर्ती इनपुट की जरूरत होती है।
USITC ने क्षेत्रीय उत्पादन-नेटवर्क में चीन की बढ़ती भूमिका और जटिल मध्यवर्ती उत्पादों के प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उसके महत्व को रेखांकित किया है । विश्व बैंक के अनुसार, चीन अब अपने आसपास के कम-मजदूरी वाले देशों को अपेक्षाकृत अधिक मध्यवर्ती वस्तुएं निर्यात करता है, जिससे इन देशों को वैश्विक मूल्य-श्रृंखलाओं में शामिल होने में मदद मिल सकती है ।
IMF ने भी बताया है कि 2017 के आसपास एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मध्यवर्ती वस्तुओं का आपसी व्यापार तेज हुआ। यह वृद्धि क्षेत्र के चीन से बढ़ते व्यापारिक जुड़ाव से प्रेरित थी ।
चीन के निर्यात को विकासशील देशों के औद्योगिक विकास के लिए सहायक मानना एक महत्वपूर्ण पहलू है, पर यह पूरी तस्वीर नहीं है।
अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग के अनुसार, चीन जैसे-जैसे अधिक कंपोनेंट अपने देश में बनाने लगा है, उसने मलेशिया और थाईलैंड जैसे उभरते देशों से निर्मित वस्तुओं का आयात कम किया है। इससे इन देशों के लिए चीन को आपूर्ति करने के अवसर घटे हैं । 2019 से 2024 के बीच चीन का कुल विनिर्माण व्यापार अधिशेष 870 अरब डॉलर बढ़ा ।
Rhodium Group ने भी चेतावनी दी है कि चीनी इनपुट का निर्यात अल्पावधि में विकासशील देशों को लाभ दे सकता है, लेकिन मध्यवर्ती वस्तुओं में चीन की बढ़ती बाजार-शक्ति नई निर्भरताएं और कमजोरियां पैदा कर सकती है । यदि किसी देश की फैक्ट्रियां एक ही आपूर्तिकर्ता या एक ही बाजार पर अत्यधिक निर्भर हो जाएं, तो उसकी औद्योगिक स्वायत्तता सीमित हो सकती है।
चीन के निर्यात में मध्यवर्ती वस्तुओं की हिस्सेदारी का 42% से 46% तक बढ़ना और उपभोक्ता वस्तुओं की हिस्सेदारी का 36% से 33% तक घटना वास्तविक और कई स्रोतों से समर्थित बदलाव है । यह इस तर्क को बल देता है कि चीन का निर्यात तंत्र अब केवल सस्ते तैयार माल से विकासशील देशों के बाजारों में बाढ़ नहीं ला रहा, बल्कि कई देशों के उद्योगों के लिए कंपोनेंट, मशीनरी और उत्पादन-संबंधी इनपुट भी उपलब्ध करा रहा है।
इसका सबसे मजबूत प्रमाण एशिया-प्रशांत क्षेत्र और चीन-केंद्रित आपूर्ति-श्रृंखलाओं से जुड़े देशों में मिलता है। फिर भी इसे सार्वभौमिक रूप से लाभकारी स्थिति नहीं कहा जा सकता। कुछ विकासशील देशों को चीनी इनपुट से अपने उद्योग बढ़ाने में मदद मिली है, जबकि कुछ अन्य देशों के कंपोनेंट निर्माताओं ने चीन के ऊपरी मूल्य-श्रृंखला की ओर बढ़ने के कारण बाजार हिस्सेदारी गंवाई है। असली तस्वीर इसलिए ‘चीन विकासशील देशों को कुचल रहा है’ और ‘चीन सबको औद्योगिक लाभ दे रहा है’—इन दोनों सरल निष्कर्षों के बीच है।