FIFA का कहना था कि इस सौदे से मिलने वाली पूंजी का इस्तेमाल सदस्य संघों के जरिए फुटबॉल विकास के लिए किया जाएगा। हालांकि, प्रस्ताव को तैयार करने और सामने लाने की प्रक्रिया में व्यापक सलाह-मशविरा नहीं हुआ, जिससे सदस्य संघों और महाद्वीपीय परिसंघों में नाराजगी बढ़ गई ।
योजना की जानकारी सार्वजनिक होते ही विरोध तेजी से फैल गया।
48 घंटों के भीतर FIFA के 211 सदस्य देशों में से कम से कम 96 इस योजना को खुले तौर पर अस्वीकार कर चुके थे ।
प्रेस में लीक हुए Infantino के पत्र ने विवाद को और गहरा कर दिया। पत्र के अनुसार, 211 सदस्य संघों को 19 सितंबर 2026 तक FFE को मंजूरी देने पर अपनी स्थिति बतानी थी—यानी घोषणा के केवल 53 दिन बाद तक ।
पत्र में फंडिंग के दो विकल्प बताए गए थे:
UEFA और अन्य परिसंघों ने इस व्यवस्था को दबाव बनाने वाली रणनीति बताया। उनका कहना था कि इतने बड़े संगठनात्मक और वित्तीय बदलाव पर पर्याप्त चर्चा के बिना इतनी कम समयसीमा तय की गई। UEFA ने 40 मिलियन डॉलर की पेशकश को 'सीमा पार करने' जैसा कदम बताया ।
AFC President Sheikh Salman ने भी कहा कि सदस्य संघों को इस प्रस्ताव की जानकारी अचानक मिली और उन्हें फैसले के लिए मनमानी समयसीमा दी गई ।
योजना को सबसे बड़ा झटका FIFA के अंदर से लगा। 31 जुलाई को Infantino के वरिष्ठ सलाहकार Carlos Cordeiro ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। Cordeiro Goldman Sachs के पूर्व बैंकर और U.S. Soccer Federation के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं ।
उन्होंने अपने बयान में कहा:
"मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं: इस प्रस्ताव में मेरी कोई भूमिका नहीं थी और मैं इसका पूरी तरह विरोध करता हूं। यह FIFA के सदस्य संघों के लिए खराब सौदा है, फुटबॉल के लिए खराब सौदा है और इस खेल के दीर्घकालिक भविष्य के लिए भी खराब सौदा है।"
इसके कुछ ही घंटे बाद FIFA के Chief Operating Officer Kevin Lamour ने भी प्रस्ताव की सार्वजनिक आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्हें और FIFA के कर्मचारियों को योजना के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी और इसे 'एक व्यक्ति का प्रोजेक्ट' बताया—जिसे Infantino की ओर सीधा इशारा माना गया ।
इससे यह धारणा और मजबूत हुई कि योजना FIFA की सामान्य संस्थागत प्रक्रिया के बजाय Infantino के इर्द-गिर्द सीमित स्तर पर तैयार की गई थी।
विवाद के बीच FIFA ने कहा कि उसकी नियोजित सलाह-मशविरा प्रक्रिया 'गलत मीडिया रिपोर्टों' से बाधित हुई है। संगठन ने यह भी कहा कि वह सदस्य संघों को तथ्यों के आधार पर मतदान का अवसर देने के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा ।
लेकिन UEFA, CONCACAF और AFC के विरोध, बहिष्कार की धमकियों तथा FIFA के अंदरूनी अधिकारियों की आलोचना ने इस बचाव को कमजोर कर दिया।
31 जुलाई 2026 की शाम, लगातार चार दिनों तक चले विरोध के बाद Infantino ने FFE योजना पूरी तरह वापस ले ली। उन्होंने कहा:
"सभी विचारों को ध्यान से सुनने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि इस परियोजना ने ऐसे मतभेद पैदा कर दिए हैं जो—समर्थन के किसी भी स्तर के बावजूद—मूल उद्देश्य के हित में नहीं हैं।"
Infantino ने यह भी स्वीकार किया कि प्रस्ताव ने 'काफी उथल-पुथल' पैदा की है । इसके साथ ही World Cup और FIFA की अन्य प्रतियोगिताओं में निजी हिस्सेदारी लाने की तत्काल योजना समाप्त हो गई।
FFE योजना की विफलता ने Infantino की राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया है । उनके इस्तीफे की मांग ब्रिटेन के Prime Minister Andy Burnham और La Liga के President Javier Tebas की ओर से भी सामने आई । उनकी आगामी पुनर्निर्वाचन मुहिम, जिसे पहले लगभग औपचारिकता माना जा रहा था, अब पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण दिख रही है।
फिलहाल World Cup का स्वामित्व FIFA के सदस्य संघों के पास ही रहेगा। फुटबॉल विकास के लिए संगठन को निजी इक्विटी से मिलने वाली एकमुश्त पूंजी के बजाय अपने पारंपरिक वित्तीय ढांचे और मौजूदा 4 अरब डॉलर के रिजर्व पर निर्भर रहना होगा।
इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है: क्या FIFA जैसी वैश्विक खेल संस्था अपने सबसे महत्वपूर्ण वाणिज्यिक अधिकारों से जुड़े फैसले सीमित स्तर पर और इतनी तेज गति से ले सकती है? चार दिनों में योजना का अंत बताता है कि फुटबॉल की राजनीति में वित्तीय प्रस्ताव जितना बड़ा हो, पारदर्शिता और सदस्य संघों की सहमति उतनी ही निर्णायक होती है।