ईरानी सेना ने राज्य मीडिया के जरिए शुक्रवार (31 जुलाई) को ही घोषणा कर दी थी कि उसने कुवैत के अहमद अल-जाबिर एयर बेस पर स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया है । ईरान का कहना है कि यह हमला पिछले दिनों अमेरिका द्वारा किए गए हमलों का जवाब था और इसे 'ऑपरेशन साएघे' के 17वें चरण के हिस्से के रूप में अंजाम दिया गया । ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने अली अल-सलेम एयर बेस और कैंप अल-अदैरी (जहां एक अमेरिकी गोला-बारूद डिपो है) को भी निशाना बनाया । इसके अलावा, ईरान ने बहरीन में भी अमेरिकी ठिकानों पर हमले की बात कही ।
इस विशेष हमले की लहर में किसी भी अमेरिकी सैन्य हताहत या बड़े नुकसान की पुष्टि अमेरिका ने नहीं की है। एक अनाम अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने स्वीकार किया कि ईरान ने कई प्रोजेक्टाइल दागे, जिनमें से अधिकांश कुवैत की ओर थे, लेकिन इसका अमेरिकी ठिकानों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा । हालांकि, पिछले हमलों में (जुलाई 2026 के मध्य में), रॉयटर्स के अनुसार, दो अमेरिकी सैनिक एक ईरानी हमले में मारे गए थे, जिसने कुवैत के एक बिजली और डीसैलिनेशन प्लांट को भी निशाना बनाया था । अमेरिका ने कहा कि उसने उस अवधि में ईरानी निगरानी स्थलों, भूमिगत हथियार भंडारण और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया ।
यह शनिवार का ड्रोन हमला एक लंबी और खतरनाक श्रृंखला का नवीनतम चरण है:
होर्मुज जलडमरूमध्य: इस संकट का सबसे बड़ा आर्थिक प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है। 16 जुलाई को केवल 7 जहाजों ने इस मार्ग को पार किया, जो 17 जुलाई को घटकर सिर्फ 3 रह गया । अधिकांश जहाजों ने यात्रा रोक दी या वापस लौट गए । यह जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल गुजरता था, अब प्रभावी रूप से ईरान के नियंत्रण में है ।
ओमान: ओमान ने जलडमरूमध्य के संयुक्त प्रबंधन का प्रस्ताव रखा, लेकिन ईरान ने इसे अस्वीकार कर अपना प्रस्ताव रखा । ओमान इस क्षेत्र में कूटनीतिक प्रयासों का केंद्र बना हुआ है, लेकिन वह भी शिपिंग ठप होने से सीधे प्रभावित हुआ है ।
जॉर्डन और मिस्र: ईरान ने जुलाई के अंत में जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमलों का दावा किया । मिस्र लाल सागर के पास शिपिंग मार्गों पर बढ़ते जोखिम से प्रभावित हुआ है ।
सऊदी अरब: सीधे युद्ध में शामिल न होने के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य के ठप होने से सऊदी तेल निर्यात को गंभीर खतरा है और वह इस संघर्ष के छींटे से प्रभावित हो सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय चिंता: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने नागरिक बुनियादी ढांचे, जैसे कि कुवैत के डीसैलिनेशन प्लांट पर हमलों पर चिंता व्यक्त की है । तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में व्यवधान से दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं ।