क्रीमिया के समानांतर यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के बश्कोर्तोस्तान गणराज्य में, उफा शहर के आसपास, तेल रिफाइनरी ढांचे को निशाना बनाया। हमलों के बाद कई जगह आग लगने की खबरें सामने आईं ।
वोल्गा-यूराल क्षेत्र में स्थित बश्कोर्तोस्तान पर हमला यह दिखाता है कि यूक्रेन लंबी दूरी तक ड्रोन पहुंचाने और रूस के गहरे इलाकों में ऊर्जा संबंधी ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता विकसित कर रहा है।
यह कार्रवाई कोई अकेली घटना नहीं थी। 2026 की शुरुआत से यूक्रेन ने रूस की ऊर्जा और ईंधन व्यवस्था पर लगातार हमले बढ़ाए हैं। फाइनेंशियल टाइम्स और पोलिश रक्षा सलाहकार संस्था रोचान कंसल्टिंग के विश्लेषण के अनुसार, जनवरी से जुलाई 2026 की शुरुआत तक रूसी तेल रिफाइनरियों और रणनीतिक ऊर्जा ठिकानों पर कम-से-कम 194 बार हमले हुए । जून के अंत तक रूस की आठ प्रमुख रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि हुई थी ।
7-8 जुलाई की एक रात में रूस ने कई क्षेत्रों में 415 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराने का दावा किया । इससे पहले 26 जून को रूस के तास समाचार एजेंसी ने एक ऐसे हमले को पिछले एक साल का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया था, जिसमें रूसी रक्षा मंत्रालय ने 12 क्षेत्रों में 660 ड्रोन रोकने का दावा किया ।
कुछ अनुमानों के अनुसार, केवल मार्च 2026 में यूक्रेन ने रूस से अधिक लंबी दूरी के ड्रोन हमले किए। उस महीने 7,000 से अधिक प्रणालियों के इस्तेमाल का अनुमान लगाया गया, जिनमें कुछ ड्रोन रूसी क्षेत्र के भीतर 1,500 किलोमीटर तक पहुंचे ।
अभियान के शुरुआती चरण में यूक्रेनी ड्रोन रिफाइनरियों और ईंधन भंडारण क्षेत्रों में आग लगाने पर केंद्रित थे। लेकिन जुलाई के अंत तक रणनीति अधिक सटीक हो गई। अब निशाना ऐसे औद्योगिक हिस्से हैं जिन्हें बदलना या जल्दी दुरुस्त करना कठिन होता है—जैसे डिस्टिलेशन कॉलम, कंप्रेसर और कैटेलिटिक क्रैकिंग यूनिट ।
इस बदलाव का उद्देश्य केवल तत्काल आग लगाना नहीं, बल्कि रिफाइनरियों को लंबे समय तक बंद रखना और रूस की मरम्मत लागत बढ़ाना है। इस रणनीति की रिपोर्ट फाइनेंशियल टाइम्स ने 30 जुलाई को दी थी ।
लगातार हमलों का असर रूस की घरेलू ईंधन आपूर्ति पर पड़ा है। जुलाई 2026 तक रूस के अधिकांश क्षेत्रों में ईंधन संबंधी प्रतिबंध लागू थे, जिनसे अनुमानित 5 करोड़ लोग—यानी देश की करीब 35% आबादी—प्रभावित हुई । 90% से अधिक रूसी क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की किसी न किसी तरह की राशनिंग या कमी की सूचना दी गई ।
रूस दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है, फिर भी क्रेमलिन ने कई ईंधन निर्यातों पर रोक लगाई । रूसी कब्जे वाले क्रीमिया में आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के बाद स्थानीय रूसी-नियुक्त अधिकारियों ने आम नागरिकों के लिए पेट्रोल की बिक्री तक रोक दी ।
इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के आकलन के अनुसार, इन हमलों से रूस के तेल और गैस राजस्व पर भी दबाव पड़ा है। संस्था ने कहा कि बढ़ते हमले रूस में आपूर्ति की कमी को और गंभीर कर सकते हैं, खासकर ऐसे समय में जब मांग बढ़ रही है ।
जून और जुलाई 2026 में मॉस्को पर बड़े ड्रोन हमलों के दौरान राजधानी के प्रमुख हवाई अड्डों पर अस्थायी बंदी या संचालन संबंधी पाबंदियां लगानी पड़ीं। वायु रक्षा अभियानों के चलते नागरिक विमानों की सुरक्षा प्रभावित होने का खतरा पैदा हुआ ।
इन हमलों का मनोवैज्ञानिक असर भी महत्वपूर्ण है। युद्ध शुरू होने के शुरुआती वर्षों में रूस के बड़े हिस्से के लोग संघर्ष से अपेक्षाकृत दूर महसूस करते थे, लेकिन अब राजधानी और अन्य प्रमुख शहरों के आसपास आग, विस्फोट और हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं ।
क्रीमिया यूक्रेन की लंबी दूरी की हमलावर रणनीति का लगातार प्रमुख लक्ष्य है। यूक्रेनी बलों ने इस प्रायद्वीप की ऊर्जा व्यवस्था, रेलवे पुलों, नौसैनिक ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाया है। इसका उद्देश्य क्रीमिया को रूस से जोड़ने वाली सैन्य और आपूर्ति लाइनों पर दबाव डालना तथा प्रायद्वीप की रक्षा करने की मॉस्को की क्षमता को चुनौती देना है ।
केर्च पुल और अन्य लॉजिस्टिक मार्गों पर हमलों ने रूसी सैन्य आपूर्ति को बार-बार बाधित किया है । जुलाई 2026 के अंत तक क्रीमिया में यूक्रेनी हमलों के कारण कई कस्बों में बिजली कटौती, ईंधन बिक्री पर रोक और काला सागर तथा आज़ोव सागर में रूसी ब्लैक सी फ्लीट की सुरक्षित गतिविधियों पर असर की खबरें सामने आईं ।
इस लिहाज से 1 अगस्त का अभियान केवल ड्रोन की संख्या या एक रात में हुए विस्फोटों की कहानी नहीं है। यह यूक्रेन की उस व्यापक रणनीति का संकेत है जिसमें रूस की ऊर्जा आय, सैन्य लॉजिस्टिक्स, नौसैनिक क्षमता और घरेलू आपूर्ति व्यवस्था—सभी पर एक साथ दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।