यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की लगभग 45% रिफाइनिंग क्षमता को निष्क्रिय कर दिया है, जिससे सोवियत संघ के पतन के बाद का सबसे गंभीर ईंधन संकट उत्पन्न हो गया है [7][40]। रूस का अपना कच्चा तेल तो प्रचुर मात्रा में है, लेकिन उसे परिष्कृत (रिफाइन) करने वाले संयंत्रों पर हमलों ने उसे पेट्रोल और डीज़ल के लिए दूसरे देशों पर निर...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What caused Russia, a major oil producer, to begin importing gasoline from Morocco and negotiating crude refining in Kazakhstan, and how do. Article summary: Russia, despite being the world's third-largest oil producer, is experiencing its worst fuel crisis since the collapse of the Soviet Union because Ukrainian long-range drone strikes have systematically destroyed or disab. Topic tags: general, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts wi
रूस, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक होने के बावजूद, सोवियत संघ के पतन के बाद से अपने सबसे बुरे ईंधन संकट से गुजर रहा है। इसकी वजह है यूक्रेन के लंबी दूरी के ड्रोन हमले, जिन्होंने देश की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता (तेल को पेट्रोल-डीज़ल में बदलने की क्षमता) के एक बड़े हिस्से को व्यवस्थित रूप से नष्ट कर दिया है। रूस की तेल निर्यात-केंद्रित रणनीति उसे इस खोई हुई क्षमता को अपने ही कच्चे तेल उत्पादन से बदलने का कोई त्वरित विकल्प नहीं देती ।
यहां कारणों की पूरी श्रृंखला (चेन) को समझिए:
1. दशकों बाद पहली बार विदेश से पेट्रोल का आयात। आमतौर पर रूस परिष्कृत उत्पादों का निर्यात करता है, आयात नहीं। जून 2026 में, उसने कजाकिस्तान से लगभग 50,000 टन AI-92 पेट्रोल खरीदने की बातचीत शुरू की । जुलाई 2026 में, उसे मोरक्को से 30,000 मीट्रिक टन AI-92 पेट्रोल का अपना पहला समुद्री माल प्राप्त हुआ (लुकोइल द्वारा आपूर्ति, मरमंस्क में उतारा गया)
। मोरक्को, भारत और कजाकिस्तान के बाद, संकट के दौरान रूस को पेट्रोल की आपूर्ति करने वाला तीसरा देश बन गया
।
2. कजाकिस्तान में कच्चा तेल रिफाइन करने की बातचीत। कजाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय ने पुष्टि की कि वह रूसी कच्चे तेल को कजाख रिफाइनरियों में संसाधित करने के लिए बातचीत कर रहा है, जिसमें तैयार उत्पादों का एक हिस्सा रूस वापस भेज दिया जाएगा । कजाकिस्तान की कोंडेन्सैट रिफाइनरी पहले से ही मौजूदा व्यवस्था के तहत कुछ रूसी कच्चे तेल को संसाधित कर रही है
।
3. ईंधन निर्यात प्रतिबंध को 2027 की शुरुआत तक बढ़ाना। रूस ने शुरू में 8-31 जुलाई तक डीज़ल निर्यात पर और 1 मार्च 2026 से पेट्रोल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। 30 जुलाई 2026 को, सरकार ने किसी भी उपलब्ध आपूर्ति को देश के अंदर रखने के लिए पेट्रोल और डीज़ल दोनों के निर्यात पर प्रतिबंध को 31 जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया ।
रूस का तेल उद्योग बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात करने और अपेक्षाकृत छोटे हिस्से को घरेलू स्तर पर संसाधित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यूक्रेनी हमलों ने रिफाइनिंग के अंतिम छोर को असमान रूप से प्रभावित किया है, इसलिए रूस एक प्रमुख कच्चा तेल उत्पादक होने के बावजूद अपने ही नागरिकों के लिए अपने तेल को पेट्रोल और डीज़ल में विश्वसनीय रूप से नहीं बदल पाने की बेतुकी स्थिति में है। निर्यात प्रतिबंध, मोरक्को और कजाकिस्तान से आयात, और कजाकिस्तान के साथ कच्चा तेल रिफाइन करने की बातचीत सभी अस्थायी उपाय हैं जो इस संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हैं, जिसका कोई त्वरित संरचनात्मक समाधान नहीं है ।
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यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की लगभग 45% रिफाइनिंग क्षमता को निष्क्रिय कर दिया है, जिससे सोवियत संघ के पतन के बाद का सबसे गंभीर ईंधन संकट उत्पन्न हो गया है [7][40]।
यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की लगभग 45% रिफाइनिंग क्षमता को निष्क्रिय कर दिया है, जिससे सोवियत संघ के पतन के बाद का सबसे गंभीर ईंधन संकट उत्पन्न हो गया है [7][40]। रूस का अपना कच्चा तेल तो प्रचुर मात्रा में है, लेकिन उसे परिष्कृत (रिफाइन) करने वाले संयंत्रों पर हमलों ने उसे पेट्रोल और डीज़ल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर कर दिया है [1][24]।
संकट से उबरने के लिए रूस ने तीन अभूतपूर्व कदम उठाए हैं: मोरक्को से 30,000 टन AI 92 पेट्रोल का समुद्री आयात, कजाकिस्तान में अपने कच्चे तेल को रिफाइन करवाने की बातचीत, और जनवरी 2027 तक ईंधन निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध [1]...