31 जुलाई 2026 को सामने आई Eurasia Group की समीक्षा के अनुसार, ईरान युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध और सुपर अल नीनो के एक साथ असर से गेहूं, मक्का और चावल जैसी खाद्य जिंसों की कीमतें 2027 की गर्मियों तक 10% से 18% बढ़ सकती हैं।
यह अनुमान हर फसल के लिए अलग-अलग कीमत का लक्ष्य नहीं है, बल्कि खाद्य जिंसों की एक व्यापक टोकरी के लिए दिया गया दायरा है। इसका आधार यह है कि कई आपूर्ति-संबंधी झटके एक ही समय पर पड़ने से उनका संयुक्त प्रभाव अलग-अलग झटकों के साधारण जोड़ से भी बड़ा हो सकता है।
24 जुलाई 2026 को JPMorgan के अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी कि सुपर अल नीनो और मध्य-पूर्व संघर्ष से जुड़ी ऊंची ऊर्जा कीमतें 2027 में वैश्विक हेडलाइन महंगाई में लगभग 0.3 प्रतिशत अंक जोड़ सकती हैं। उभरते बाजारों पर इसका असर सबसे अधिक पड़ने की आशंका जताई गई है।
JPMorgan के आकलन के मुख्य बिंदु:
| जिंस | प्रमुख अनुमान या जोखिम |
|---|---|
| गेहूं | USDA WASDE और ERS के अनुसार 2026/27 में अमेरिका का सीजन-औसत किसान मूल्य 3 साल के उच्च स्तर $6.00–$6.50 प्रति बुशल तक पहुंच सकता है। अत्यधिक सूखा पड़ने पर ऑस्ट्रेलिया का गेहूं उत्पादन साल-दर-साल 20% से 60% घट सकता है। यूरोपीय आयोग के JRC ने ड्यूरम गेहूं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का जोखिम बताया है। |
| मक्का | USDA का अनुमान है कि सीजन-औसत किसान मूल्य बढ़कर $4.20 प्रति बुशल हो सकता है। ब्राजील की मक्का फसल मौसम संबंधी जोखिमों के प्रति ‘काफी exposed’ है और इसमें करीब 10% साल-दर-साल गिरावट का अनुमान है। JRC ने वैश्विक मक्का कीमतों में हल्की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। |
| चावल | विश्व बैंक के अनुसार, अल नीनो आने पर प्रभावित क्षेत्रों में चावल उत्पादन 20% से 50% तक घट सकता है। दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्से सबसे अधिक जोखिम में हैं। 2026 के मध्य तक चावल की कीमतें महीने-दर-महीने करीब 9% ऊपर चल रही थीं। हालांकि, वैश्विक भंडार रिकॉर्ड के करीब होने से शुरुआती झटके को कुछ हद तक संभाला जा सकता है। |
| कुल खाद्य महंगाई | IMF ने 2026 में खाद्य कीमतों में 6.0% वृद्धि का अनुमान लगाया है। विश्व बैंक का आधारभूत अनुमान 2026 में वैश्विक खाद्य जिंस मूल्य सूचकांक में 2.5% वृद्धि का है, लेकिन जोखिम स्पष्ट रूप से ऊपर की ओर हैं। अल नीनो से जुड़ी व्यापक कीमत वृद्धि के अनुमान प्रमुख खाद्य फसलों में क्षेत्र और घटना की तीव्रता के आधार पर 10% से 50% तक हैं। |
अल नीनो का प्रभाव दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग हो सकता है। Allianz Research के अनुसार, एशिया में पैदा होने वाली जिंसों पर व्यवधान का जोखिम अधिक है। दक्षिण-पूर्व एशिया, भारत और पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में सूखे तथा कृषि व्यवधान की आशंका है। इसके विपरीत, ब्राजील और अर्जेंटीना सहित लैटिन अमेरिका के बड़े हिस्सों में बेहतर खेती की परिस्थितियां अनाज और तिलहन उत्पादन बढ़ा सकती हैं, जिससे कुछ बाजारों में अतिरिक्त आपूर्ति बन सकती है।
JRC के आकलन में भी फसल के अनुसार असर अलग-अलग दिखता है। ड्यूरम गेहूं की कीमतों में तेज वृद्धि का जोखिम है, जबकि मक्का की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है। दूसरी ओर, सोयाबीन और हार्ड रेड विंटर गेहूं की वैश्विक कीमतें कुछ अल नीनो परिदृश्यों में घट भी सकती हैं। चावल में पहले हल्की गिरावट और बाद में बढ़ोतरी का जटिल पैटर्न बन सकता है।
इस पूरे परिदृश्य में सबसे बड़ा सवाल उपलब्ध भंडार का है। चावल, सोयाबीन, मक्का और गेहूं के वैश्विक भंडार सर्वकालिक ऊंचे स्तरों के करीब हैं। यह अतिरिक्त आपूर्ति अल नीनो से होने वाले शुरुआती उत्पादन नुकसान को कुछ समय तक संतुलित कर सकती है।
लेकिन यह सुरक्षा-कवच स्थायी नहीं है। खाद्य संकट के दौरान सरकारें अक्सर घरेलू उपलब्धता बचाने के लिए निर्यात प्रतिबंध लगा देती हैं। यदि कई बड़े निर्यातक ऐसा करते हैं, तो वैश्विक बाजार में पर्याप्त भंडार मौजूद होने के बावजूद आयात पर निर्भर देशों के लिए कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
युद्धों का असर केवल अनाज की आवाजाही तक सीमित नहीं है। ऊर्जा और गैस महंगी होने से नाइट्रोजन उर्वरकों की लागत बढ़ती है। 2026 की शुरुआत में यूरिया की कीमत महीने-दर-महीने 46% उछल गई थी। इससे किसानों की लागत बढ़ती है और 2026/27 के बुवाई फैसलों पर असर पड़ सकता है—यानी मौसम के झटके के साथ आपूर्ति पर तीसरा दबाव भी जुड़ जाता है।
विश्व बैंक का आधारभूत अनुमान यह मानकर चलता है कि मध्य-पूर्व में आपूर्ति संबंधी व्यवधान 2026 के मध्य या तीसरी तिमाही तक कम हो जाएंगे। यदि ऐसा नहीं होता और शिपिंग, तेल, गैस तथा उर्वरक बाजार लंबे समय तक बाधित रहते हैं, तो खाद्य कीमतों का अनुमान काफी खराब हो सकता है।
उपलब्ध आंकड़े तत्काल वैश्विक खाद्य कमी की निश्चित भविष्यवाणी नहीं करते। ऐतिहासिक रूप से ऊंचे भंडार, कुछ क्षेत्रों में बेहतर फसल और अपेक्षाकृत मजबूत अनाज उत्पादन बाजार को शुरुआती झटके से बचा सकते हैं। FAO ने भी 2026/27 के अनाज उत्पादन को ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तरों पर रहने का अनुमान लगाया है, भले ही यह रिकॉर्ड स्तर से कुछ कम हो।
फिर भी युद्ध, महंगा ईंधन और उर्वरक, संभावित निर्यात प्रतिबंध तथा शक्तिशाली अल नीनो एक-दूसरे के असर को बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि 2027 की गर्मियों तक गेहूं, मक्का और चावल में 10% से 18% की व्यापक बढ़ोतरी का Eurasia Group अनुमान, तथा वैश्विक महंगाई में लगभग 0.3 प्रतिशत अंक के JPMorgan अनुमान को केवल मौसम का पूर्वानुमान नहीं, बल्कि आपूर्ति शृंखला के संयुक्त जोखिम के रूप में देखना चाहिए।