गांव वालों ने बताया कि इसकी आवाज 'गड़गड़ाहट से भी तेज' थी । स्थानीय निवासी जॉन मुकुनू ने कहा, "लोग सोच रहे थे कि यह दुनिया का अंत है" । केन्या अंतरिक्ष एजेंसी (KSA) ने शुरू में इसे 'एक पृथक घटना' (isolated incident) बताया, लेकिन टाइम्स की जांच बताती है कि यह बिल्कुल भी कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि एक बढ़ती हुई समस्या का हिस्सा है ।
जांच में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि गिरने वाला मलबा किसी तय रास्ते पर नहीं चलता। वायुमंडलीय स्थितियां, सैटेलाइट की दिशा और कई अन्य बदलते कारकों की वजह से यह बताना बेहद मुश्किल होता है कि मलबे का एक टुकड़ा कहां गिरेगा। कई बार तो गिरने के कुछ ही मिनट पहले पता चलता है । ऐसे में चेतावनियां अक्सर बहुत अस्पष्ट या फिर बहुत देर से आती हैं, जिनका जमीन पर रहने वाले लोगों के लिए कोई व्यावहारिक मतलब नहीं रह जाता ।