जॉर्डन ने भी ड्रोन हमलों की सूचना दी। क्षेत्रीय आकलनों में इन हमलों के लिए ईरान-समर्थित इराकी गुटों को जिम्मेदार बताया गया है । इन घटनाओं के बाद दोनों देशों ने बगदाद से अपनी जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ हमलों के लिए न होने देने को कहा।
रॉयटर्स की 30 जुलाई की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब और उसके क्षेत्रीय साझेदारों के आकलन में सामने आया कि यमन के ईरान-संबद्ध हूतियों ने इराकी क्षेत्र से सऊदी अरब पर हमले किए और इनमें ईरान-समर्थित इराकी सशस्त्र गुटों के साथ सीधा समन्वय था ।
रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों की इराक में तकनीकी सलाहकार टीमों की मौजूदगी है। ये सलाहकार स्थानीय गुटों को मिसाइल, खासकर क्रूज मिसाइल, दागने में मदद कर सकते हैं । विश्लेषकों के अनुसार, हूतियों और इराकी गुटों के संबंध पहले राजनीतिक और मीडिया समर्थन तक सीमित थे, लेकिन अब यह सहयोग सैन्य, रसद और खुफिया गतिविधियों तक फैलता परिचालन साझेदारी बन गया है ।
हालांकि, इन दावों का आधार मुख्य रूप से सऊदी और क्षेत्रीय साझेदारों के आकलन तथा अधिकारियों की जानकारी है। इसलिए इन्हें संबंधित पक्षों के आरोपों और आकलनों के रूप में देखना जरूरी है।
रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ समुद्र के रास्ते और संभवतः मध्य यमन में जमीनी अभियान की तैयारी कर रहा है। इसका एक उद्देश्य लाल सागर के दक्षिणी मार्ग से होने वाले तेल निर्यात पर हूती दबाव को कम करना बताया गया है ।
20 जुलाई को हूतियों ने लाल सागर में सऊदी अरब पर नौसैनिक नाकाबंदी लगाने की घोषणा की थी। हूती नेतृत्व ने बाद में सऊदी अरब के खिलाफ “पूर्ण escalation” यानी संघर्ष को पूरी तरह बढ़ाने की धमकी दी ।
30 जुलाई को रियाद ने “Multinational Maritime Defense Alliance” की योजना की घोषणा की। इसका लक्ष्य लाल सागर, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और अदन की खाड़ी में अंतरराष्ट्रीय नौवहन तथा ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा करना है । बाब-अल-मंदेब लाल सागर का दक्षिणी प्रवेशद्वार है और वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा परिवहन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।
सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस पहल पर 43 देशों और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा हुई। सऊदी अरब ने गठबंधन का संस्थापक और नेतृत्वकर्ता देश बनने तथा मुख्यालय की मेजबानी करने का प्रस्ताव रखा । अलग-अलग रिपोर्टों में आमंत्रित देशों की संख्या करीब 43 से 50 बताई गई है ।
14 देशों ने पहल के समर्थन वाले संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए, जिनमें तुर्की, पाकिस्तान, मिस्र, जॉर्डन, सूडान और जिबूती शामिल हैं । यह गठबंधन हूती हमलों के जवाब में सऊदी प्रतिक्रिया को केवल द्विपक्षीय सैन्य कार्रवाई से आगे ले जाकर बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचे में बदलने का प्रयास है।
28 और 29 जुलाई को अमेरिकी सेंट्रल कमांड तथा सऊदी सेना ने पूर्वी इराक में ईरान-समर्थित सशस्त्र गुटों के लॉजिस्टिक्स और हथियार ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए । अमेरिकी पक्ष ने कहा कि पिछले 72 घंटों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के निर्देश पर 30 से अधिक ड्रोन हमले हुए थे और कार्रवाई उसी के जवाब में की गई ।
इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF)—विभिन्न इराकी मिलिशिया गुटों का छत्र संगठन—के अनुसार, सात प्रांतों में हुए हमलों में कम से कम 20 सदस्य मारे गए और 32 घायल हुए । PMF को इराकी कानून के तहत देश की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है और वह प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है । यही वजह है कि इस कार्रवाई ने इराक की संप्रभुता और केंद्रीय सरकार के अधिकार को लेकर विवाद और गहरा कर दिया।
इराकी प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने आपात राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई। बगदाद ने अमेरिका और सऊदी अरब के हमलों को इराक की संप्रभुता तथा उसकी भूमि की पवित्रता का “खुला उल्लंघन” बताया । इराकी सशस्त्र गुटों ने भी इसे “खतरनाक वृद्धि” करार दिया ।
इराकी सरकार एक ओर अपनी जमीन से पड़ोसी देशों पर होने वाले हमलों को रोकने के दबाव में है, वहीं दूसरी ओर उसे ईरान-संबद्ध शक्तिशाली मिलिशिया गुटों और बाहरी सैन्य कार्रवाई के बीच संतुलन साधना पड़ रहा है। इस स्थिति से बगदाद के अरब पड़ोसियों के साथ संबंधों पर भी असर पड़ने की चिंता जताई गई है ।
29 जुलाई को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की बात कही। इनमें मुवाफ्फक सालती एयर बेस और अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय शामिल बताया गया। IRGC ने इसे इराक में अमेरिका-सऊदी हमलों का जवाब बताया । अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने क्षेत्र में अपने बलों पर हुए हमले को रोक लिया ।
इस जवाबी कार्रवाई ने जॉर्डन को भी संघर्ष के सीधे प्रभाव वाले देशों की सूची में ला दिया और संकेत दिया कि इराक में हुई कार्रवाई का असर केवल इराक, सऊदी अरब और यमन तक सीमित नहीं रह सकता।
क्षेत्रीय अधिकारियों और विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि घटनाक्रम एक बड़े और कम-नियंत्रित युद्ध में बदल सकता है। सऊदी अरब को अब तीन दिशाओं से खतरे का सामना करना पड़ रहा है—ईरान, इराकी मिलिशिया और यमन के हूती ।
हूतियों और इराकी गुटों के बीच बढ़ता परिचालन समन्वय, इराक का मिसाइल और ड्रोन नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण समन्वय क्षेत्र बनना तथा IRGC की कथित निगरानी ने तनाव को और जटिल कर दिया है । दूसरी ओर, इराक में अमेरिकी-सऊदी हमलों ने ईरान-संबद्ध गुटों को जवाबी कार्रवाई और हथियारबंद भूमिका बनाए रखने का नया आधार दिया है ।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित पक्ष सीमित जवाबी कार्रवाइयों तक रुकेंगे या लाल सागर, इराक, जॉर्डन और सऊदी तेल प्रतिष्ठानों से जुड़े कई मोर्चे एक-दूसरे को और भड़काएंगे। समुद्री गठबंधन और संभावित सऊदी अभियान की घोषणा बताती है कि रियाद अब केवल हमले रोकने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को अपने पक्ष में बदलने की तैयारी भी कर रहा है।