घरेलू मांग में गहरा संकट: उपभोक्ता खर्च में सुस्ती, रियल एस्टेट क्षेत्र में मंदी और व्यावसायिक विश्वास में कमी के कारण घरेलू मांग कमजोर बनी हुई है । राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) के सांख्यिकीविद् हुओ लिहुई ने इस गिरावट का श्रेय 'कमजोर मांग' को दिया
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बढ़ती उत्पादन लागत: मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे कारखानों पर लागत का दबाव बढ़ा है ।
सेवा क्षेत्र में भी कमजोरी: गैर-विनिर्माण पीएमआई (जिसमें सेवाएं और निर्माण शामिल हैं) में भी गिरावट आई है, जो दर्शाता है कि आर्थिक मंदी सिर्फ कारखानों तक सीमित नहीं है ।
30 जुलाई को पीएमआई डेटा जारी होने से एक दिन पहले पोलित ब्यूरो की बैठक हुई, जिसमें आर्थिक सुस्ती को स्वीकार किया गया, लेकिन किसी बड़े प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा नहीं की गई ।
केवल 'वृद्धिशील नीतियां': पोलित ब्यूरो ने राजकोषीय खर्च में तेजी लाने और 'वृद्धिशील नीतियों' को अपनाने का वादा किया, लेकिन बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन से साफ इनकार कर दिया ।
बड़े खर्च का कोई इरादा नहीं: वॉल स्ट्रीट जर्नल और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बड़े प्रोत्साहन के लिए कोई उत्सुकता नहीं दिखाई, क्योंकि उनका मानना है कि अर्थव्यवस्था कम वार्षिक वृद्धि लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम है ।
रोजगार और राजकोषीय सहायता पर ध्यान: घोषणा में रोजगार बढ़ाने और राजकोषीय सहायता पर जोर दिया गया, लेकिन कोई ठोस नया खर्च आवंटित नहीं किया गया ।
पीएमआई में संकुचन एक संरचनात्मक दुविधा को उजागर करता है: दूसरी तिमाही में विकास का मुख्य इंजन रहे निर्यात की रफ्तार धीमी हो रही है, जबकि घरेलू खपत इतनी मजबूत नहीं है कि इस कमी की भरपाई कर सके । पोलित ब्यूरो का सावधान रुख संकेत देता है कि बीजिंग अधिक कर्ज लेकर विकास को गति देने के बजाय धीमी वृद्धि को स्वीकार करना पसंद करेगा
। विश्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि 2026 में चीन की जीडीपी वृद्धि दर घरेलू मांग में कमजोरी के चलते 4.4% तक सीमित रह सकती है
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