इस बंदी से करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन की रिफाइनिंग क्षमता ऐसे समय बाजार से बाहर हुई है, जब वैश्विक डीजल सप्लाई पहले ही बेहद तंग थी । मरम्मत पूरी होने और संयंत्र को फिर शुरू करने का लक्ष्य फिलहाल लगभग 15 अगस्त रखा गया है, हालांकि यह समयसीमा अस्थायी है ।
जाज़ान कॉम्प्लेक्स में डीजल का उत्पादन अपेक्षाकृत अधिक है। इसलिए इसका बंद होना पेट्रोलियम उत्पादों की पूरी टोकरी पर समान असर डालने के बजाय खास तौर पर डीजल और अन्य मिडिल-डिस्टिलेट ईंधनों की उपलब्धता को प्रभावित करता है। बाजार विश्लेषणों में इसे डीजल कीमतों के लिए “अगले ईंधन झटके” का संकेत बताया गया है ।
30 जुलाई 2026 को Goldman Sachs ने अपने आकलन में कहा कि डीजल ईंधन बाजार सप्लाई संकट के “केंद्र में” है । बैंक के अनुसार वैश्विक रिफाइनरी गतिविधि जुलाई में महामारी के बाद इस मौसम के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। रूस और मध्य-पूर्व में युद्ध से जुड़ी रिफाइनरी बंदी, दूसरे क्षेत्रों में कमजोर उत्पादन और चीन में कम प्रोसेसिंग ने स्थिति को और बिगाड़ा ।
Goldman Sachs के प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
मध्य-पूर्व का संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में शिपिंग व्यवधानों ने कच्चे तेल की तुलना में रिफाइंड उत्पादों के बाजार को कहीं अधिक प्रभावित किया है । अंतरराष्ट्रीय रिफाइंड-प्रोडक्ट निर्यात में गिरावट ने डीजल की कमी को और गंभीर बनाया है ।
जाज़ान रिफाइनरी का बंद होना डीजल संकट की मूल वजह नहीं है। यह पहले से कम भंडार और घटती रिफाइनिंग क्षमता वाले बाजार पर पड़ा एक नया सप्लाई-साइड झटका है। हमले से पहले ही Goldman Sachs का अनुमान था कि 2026 के बाकी हिस्से में रिफाइंड-प्रोडक्ट मार्जिन 2013–2019 के औसत से दो से तीन गुना ऊंचे रह सकते हैं। डीजल मार्जिन युद्ध-पूर्व स्तरों से 19–26 डॉलर प्रति बैरल अधिक रहने का अनुमान था ।
समय भी महत्वपूर्ण है। जाज़ान की बंदी उत्तरी गोलार्ध में गर्मियों के ड्राइविंग और कृषि सीजन के उस दौर से टकराती है, जब ट्रकिंग और खेती के लिए डीजल की मांग मजबूत रहती है। ऐसे में 4 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता का हटना सप्लाई और मांग के बीच संतुलन को और बिगाड़ता है ।
यदि जाज़ान रिफाइनरी लगभग 15 अगस्त तक बंद रहती है, तो बाजार पर इसका असर सीमित अवधि का हो सकता है—लेकिन तंग सप्लाई की मौजूदा स्थिति में यह अवधि भी महत्वपूर्ण है। मरम्मत में देरी होने पर करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन की, मुख्य रूप से डीजल-समृद्ध, रिफाइनिंग क्षमता अतिरिक्त समय तक बाजार से बाहर रहेगी।
Goldman Sachs को 2026 के बाकी हिस्से में रिफाइंड ईंधन के ऊंचे मार्जिन बने रहने की उम्मीद है । इसके पीछे वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता की कमी, यूरोप में तेज गति से बंद हो रही रिफाइनरियां, चीन में घटता डीजल उत्पादन और भारी कच्चे तेल की सीमित सप्लाई जैसे दीर्घकालिक कारण हैं ।
इसलिए जाज़ान बंदी संकट को शून्य से पैदा नहीं करती, लेकिन सबसे संवेदनशील समय पर सप्लाई-डिमांड संतुलन को काफी कमजोर कर देती है। यही वजह है कि Goldman Sachs डीजल बाजार को पूरे तेल क्षेत्र के सबसे बड़े सप्लाई संकट का सामना करने वाला खंड मान रहा है ।