अग्रिम मोर्चे की इकाइयों में संरचनात्मक सुधार: बैठक में अग्रिम पंक्ति की सैन्य इकाइयों के संगठन और तैनाती में बदलाव को मंजूरी दी गई, ताकि वे रूसी हमलों की बढ़ती तीव्रता और बड़े पैमाने से बेहतर ढंग से निपट सकें ।
सहयोगी देशों से बैलिस्टिक मिसाइल-रोधी इंटरसेप्टर की तत्काल मांग: ज़ेलेंस्की ने Patriot और अन्य बैलिस्टिक मिसाइल-रोधी प्रणालियां जल्द उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि रूसी मिसाइल खतरे से सुरक्षा लोगों की जान बचाने की सबसे अहम प्राथमिकता है ।
हवाई रक्षा आपूर्ति में देरी पर नाराजगी: उन्होंने सहयोगी देशों से मिली ‘अपर्याप्त या देर से’ हुई आपूर्ति को हमले में हुई मौतों से जोड़ा। यह संदेश साफ था कि यूक्रेन अपनी घरेलू क्षमता से हवाई सुरक्षा की कमी को अकेले पूरा नहीं कर सकता ।
इस हमले में ड्रोनों के साथ मिसाइलों की संख्या भी असामान्य रूप से अधिक थी। Critical Threats Project के आकलन के अनुसार, रूस का उद्देश्य यूक्रेन के पास मौजूद बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर की कमी का फायदा उठाना था ।
यूक्रेन कई Shahed जैसे ड्रोनों को अपेक्षाकृत कम महंगे साधनों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और अन्य हवाई रक्षा प्रणालियों से रोक सकता है। लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए Patriot जैसी महंगी और सीमित संख्या वाली प्रणालियों की जरूरत होती है। यही वह क्षेत्र है जहां यूक्रेन की सबसे बड़ी क्षमता-खाई दिखाई देती है।
‘असममित उपायों’ पर ज़ोर इस बात का संकेत है कि यूक्रेन केवल पश्चिमी प्रणालियों की अतिरिक्त खेप का इंतजार नहीं करना चाहता। सहयोगी देशों से मदद की मांग जारी रहेगी, लेकिन उसके साथ-साथ कीव ऐसे घरेलू तकनीकी समाधान विकसित करने की कोशिश कर रहा है जो उपलब्ध संसाधनों से रूसी मिसाइल हमलों का असर कम कर सकें ।
यह बदलाव किसी वैचारिक पसंद से अधिक युद्ध की मजबूरी है: इंटरसेप्टर सीमित हैं, हमले बड़े हो रहे हैं और नई विदेशी प्रणालियां तुरंत उपलब्ध नहीं हो सकतीं।
एक ही हमले में 358 हथियारों का इस्तेमाल रूस की उस क्षमता को दिखाता है जिसके जरिए वह बड़ी संख्या में मिसाइलों और ड्रोनों को एक साथ भेजकर यूक्रेन की रक्षा-व्यवस्था पर दबाव डाल सकता है। यूक्रेन की ड्रोन-रोधक क्षमता कई बार प्रभावी रहती है, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ उसकी रोकथाम क्षमता काफी सीमित है।
जब तक इंटरसेप्टर की कमी दूर नहीं होती, रूस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और आबादी वाले इलाकों पर लगातार नुकसान पहुंचाने की स्थिति में बना रहेगा।
ज़ेलेंस्की ने हमले के तुरंत बाद NATO सहयोगियों पर दबाव बढ़ाया। उनका संदेश था कि यूक्रेन कई अन्य क्षेत्रों में खुद कार्रवाई कर सकता है, लेकिन हवाई रक्षा के मामले में उसे सहयोगी देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और समय पर आपूर्ति की जरूरत है ।
‘अपर्याप्त या देर से’ मिली सहायता का बार-बार उल्लेख यूक्रेन की तत्काल युद्ध जरूरतों और पश्चिमी देशों की आपूर्ति की गति के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है।
हमले वाले दिन ही असममित तकनीकी उपायों और सैन्य इकाइयों के पुनर्गठन को मंजूरी देना बताता है कि यूक्रेन ऐसे परिदृश्य की तैयारी कर रहा है जिसमें सहयोगी देशों से बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर की आपूर्ति सीमित बनी रह सकती है ।
इसलिए कीव की मौजूदा रणनीति दो मोर्चों पर चल रही है: एक ओर Patriot जैसी प्रणालियों के लिए पश्चिमी देशों पर दबाव, और दूसरी ओर अपनी तकनीक, सैन्य ढांचे और जवाबी क्षमताओं को तेजी से विकसित करना।