कांगो के कोबाल्ट निर्यात में छिपा यूरेनियम: वैश्विक परमाणु निगरानी में बड़ा छेद
प्रिंसटन और यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन–मैडिसन के शोधकर्ताओं के अनुसार, 2000–2024 के बीच डीआर कांगो से कोबाल्ट हाइड्रॉक्साइड की खेपों में 2,000–5,000 मीट्रिक टन प्राकृतिक यूरेनियम निर्यात हुआ। [2][3] शोध में अनुमान है कि यह मात्रा लगभग 600–1,500 परमाणु हथियारों के लिए विखंडनीय पदार्थ तैयार करने या एक सामान्य हल्के पा...
प्रकाशितकर्ताDeepSeek-V4-Flash से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
प्रिंसटन और यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन–मैडिसन के शोधकर्ताओं के अनुसार, 2000–2024 के बीच डीआर कांगो से कोबाल्ट हाइड्रॉक्साइड की खेपों में 2,000–5,000 मीट्रिक टन प्राकृतिक यूरेनियम निर्यात हुआ। [2][3]
शोध में अनुमान है कि यह मात्रा लगभग 600–1,500 परमाणु हथियारों के लिए विखंडनीय पदार्थ तैयार करने या एक सामान्य हल्के पानी वाले परमाणु रिएक्टर को 10–25 वर्षों तक ईंधन देने के बराबर हो सकती है। [2][3]
अनुमानित 1,000–4,000 मीट्रिक टन यूरेनियम खनन अपशिष्ट यानी टेलिंग्स में रह गया, जिससे श्रमिकों और आसपास के समुदायों के लिए पर्यावरणीय तथा स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। [2][5][9]
What did a University of Wisconsin–Madison and Princeton University study published in Nature Communications reveal about undeclared uraniumA visual representation of the cobalt supply chain from the DRC, illustrating how undeclared uranium may travel undetected.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did a University of Wisconsin–Madison and Princeton University study published in Nature Communications reveal about undeclared uranium. Article summary: Now I have comprehensive information from the primary university sources. Let me compile the answer.. Topic tags: general, government, education, news, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clickbait thumbnails, icons, and tiny thumbnail layouts. Make it useful as an illustrative visu
openai.com
30 जुलाई 2026 को Nature Communications में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने वैश्विक परमाणु लेखांकन व्यवस्था की एक बड़ी खामी सामने रखी है। शोध के अनुसार, पिछले ढाई दशकों में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो (डीआर कांगो) से बड़ी मात्रा में अघोषित यूरेनियम उसके तेजी से बढ़ते कोबाल्ट कारोबार के रास्ते बाहर गया। इसकी अधिकांश खेपें अंतरराष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा निगरानी से बची रहीं।
यह अध्ययन प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के प्रोग्राम ऑन साइंस एंड ग्लोबल सिक्योरिटी से जुड़े पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता रयान मैनजुक और यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन–मैडिसन के सहायक प्रोफेसर सेबास्तियाँ फिलिप ने किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, डीआर कांगो ने दशकों से आधिकारिक तौर पर यूरेनियम उत्पादन की सूचना नहीं दी है, फिर भी कोबाल्ट प्रसंस्करण के दौरान यूरेनियम उसके निर्यातित उत्पादों में शामिल होता रहा।
Studio Global AI
अपना शोध जारी रखें
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"कांगो के कोबाल्ट निर्यात में छिपा यूरेनियम: वैश्विक परमाणु निगरानी में बड़ा छेद" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
प्रिंसटन और यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन–मैडिसन के शोधकर्ताओं के अनुसार, 2000–2024 के बीच डीआर कांगो से कोबाल्ट हाइड्रॉक्साइड की खेपों में 2,000–5,000 मीट्रिक टन प्राकृतिक यूरेनियम निर्यात हुआ। [2][3]
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
प्रिंसटन और यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन–मैडिसन के शोधकर्ताओं के अनुसार, 2000–2024 के बीच डीआर कांगो से कोबाल्ट हाइड्रॉक्साइड की खेपों में 2,000–5,000 मीट्रिक टन प्राकृतिक यूरेनियम निर्यात हुआ। [2][3] शोध में अनुमान है कि यह मात्रा लगभग 600–1,500 परमाणु हथियारों के लिए विखंडनीय पदार्थ तैयार करने या एक सामान्य हल्के पानी वाले परमाणु रिएक्टर को 10–25 वर्षों तक ईंधन देने के बराबर हो सकती है। [2][3]
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
अनुमानित 1,000–4,000 मीट्रिक टन यूरेनियम खनन अपशिष्ट यानी टेलिंग्स में रह गया, जिससे श्रमिकों और आसपास के समुदायों के लिए पर्यावरणीय तथा स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। [2][5][9]
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2000 से 2024 के बीच कोबाल्ट हाइड्रॉक्साइड की खेपों के साथ डीआर कांगो से 2,000–5,000 मीट्रिक टन प्राकृतिक यूरेनियम निर्यात हुआ।
अध्ययन के अनुसार, यह मात्रा लगभग 600–1,500 परमाणु हथियारों के लिए विखंडनीय पदार्थ तैयार करने या एक सामान्य हल्के पानी वाले परमाणु रिएक्टर को 10–25 वर्षों तक ईंधन देने के लिए पर्याप्त हो सकती है।
हालांकि, शोधकर्ता यह नहीं कहते कि यूरेनियम को जानबूझकर हथियार बनाने के उद्देश्य से निर्यात किया गया था। चिंता का मुख्य कारण यह है कि इस सामग्री का अधिकांश हिस्सा घोषित नहीं था। इसलिए उसके अंतिम उपयोग पर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा उपायों के तहत कोई स्पष्ट सीमा लागू नहीं थी।
शोध के मुताबिक, सार्वजनिक रूप से घोषित होकर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए की सुरक्षा निगरानी में आई मात्रा 10 प्रतिशत से भी कम रही। अधिकांश खेपें चीन पहुंचीं, जहां दुनिया की लगभग 95 प्रतिशत कोबाल्ट रिफाइनिंग क्षमता मौजूद है।
कोबाल्ट के साथ यूरेनियम कैसे गया?
शोध दल ने डीआर कांगो के खनिज वितरण संबंधी आंकड़ों, भू-रासायनिक डेटा, खदान-वार व्यापार रिकॉर्ड और कोबाल्ट प्रसंस्करण के रासायनिक मॉडलों को मिलाकर यूरेनियम की संभावित आवाजाही का पता लगाया।
भूगर्भीय परिस्थितियों में यूरेनियम और कोबाल्ट एक ही अयस्क में साथ मौजूद हो सकते हैं। यदि खनन या प्रसंस्करण के दौरान यूरेनियम को अलग नहीं किया जाता, तो वह कोबाल्ट हाइड्रॉक्साइड जैसे मध्यवर्ती उत्पाद में रह सकता है और उसी के साथ निर्यात हो सकता है। शोधकर्ताओं ने इस अप्रत्यक्ष रास्ते को परमाणु संसाधनों की निगरानी में एक कम पहचाना गया मार्ग बताया है।
खदानों के कचरे में बचा यूरेनियम
अध्ययन का दूसरा अहम निष्कर्ष खदानों से निकलने वाले अपशिष्ट यानी टेलिंग्स से जुड़ा है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 1,000–4,000 मीट्रिक टन यूरेनियम टेलिंग्स में फेंक दिया गया। यह यूरेनियम ऐसे रासायनिक रूपों में हो सकता है जो आसानी से स्थानांतरित हो जाते हैं।
बारिश या भूजल के साथ यह सामग्री आसपास के इलाकों में फैल सकती है। इससे रेडियोधर्मी धूल के सांस के जरिए शरीर में जाने, पानी के दूषित होने और मिट्टी के प्रदूषण का जोखिम पैदा हो सकता है।
खनिकों के लिए लंबे समय तक कम स्तर के विकिरण के संपर्क में रहना या रेडियोधर्मी पदार्थों से बनने वाली रेडॉन गैस को सांस के साथ अंदर लेना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इससे कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
इसी पृष्ठभूमि में डीआर कांगो विदेशों से सहयोग लेकर देश से निकलने वाले ट्रकों में रेडिएशन डिटेक्टर लगाने की कोशिश कर रहा है।
वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता क्यों?
यूरेनियम की खेपें अगर आईएईए को घोषित न हों और आधिकारिक परमाणु लेखांकन में दर्ज न हों, तो उनके इस्तेमाल पर निगरानी कमजोर पड़ जाती है। शोधकर्ताओं की चेतावनी है कि ऐसी सामग्री बिना पर्याप्त नियंत्रण के किसी नागरिक परमाणु कार्यक्रम या सैन्य कार्यक्रम तक पहुंच सकती है।
हालांकि अध्ययन में यह प्रमाण नहीं मिला कि निर्यात जानबूझकर हथियारों के लिए किया गया था, अघोषित परमाणु सामग्री का वैश्विक प्रवाह परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।
यह शोध अक्टूबर 2025 में प्रिंसटन में प्रस्तुत पहले के काम पर आधारित है। उस काम में यूरेनियम और कोबाल्ट के अयस्कों में साथ पाए जाने की भूगर्भीय तथा रासायनिक प्रक्रिया को समझने के लिए मॉडल का इस्तेमाल किया गया था।
शोधकर्ताओं ने क्या कदम सुझाए?
अध्ययन के लेखक समस्या से निपटने के लिए कई तत्काल कदम सुझाते हैं:
डीआर कांगो के खनन क्षेत्र का व्यापक राष्ट्रीय ऑडिट किया जाए।
यूरेनियम को कोबाल्ट आपूर्ति शृंखला से अलग करने के लिए नए नियम बनाए जाएं।
कोबाल्ट हाइड्रॉक्साइड की हर खेप में यूरेनियम की व्यवस्थित जांच की जाए।
खदान श्रमिकों के विकिरण संपर्क की नियमित निगरानी हो।
पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार खनन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और निरीक्षण तंत्र बनाया जाए।
लंबे समय में कोबाल्ट हाइड्रॉक्साइड जैसे कच्चे मध्यवर्ती उत्पाद को विदेश भेजने के बजाय डीआर कांगो में ही कोबाल्ट को धातु के रूप में परिष्कृत किया जाए। इससे यूरेनियम-मिश्रित उत्पाद के देश से बाहर जाने की संभावना घट सकती है।
सबसे पहले यूरेनियम के निष्कर्षण और निर्यात का सटीक लेखा-जोखा तैयार किया जाए।
फिलिप ने विश्वविद्यालय की प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “हमारे निष्कर्षों के आधार पर डीआर कांगो के खनन क्षेत्र का व्यापक राष्ट्रीय ऑडिट और यूरेनियम को कोबाल्ट आपूर्ति शृंखला से अलग करने के लिए नए नियम जरूरी हैं।”
इस अध्ययन पर Financial Times और Le Monde जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी रिपोर्ट की है। परियोजना में यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन–मैडिसन और प्रिंसटन के वैज्ञानिकों के साथ खोजी पत्रकारिता संस्था Lighthouse Reports के पत्रकारों ने काम किया।
interestingengineering.com
11 million pounds of uranium may have been shipped to China unofficially, finds study